उषा की कहानी

गौतम और उषा कि चुदाई देखते हुए सुमन उषा से बोली, “क्यों छिनाल उषा, गौतम का लण्ड पसन्द आया कि नही? मैं ना बोल रही थी कि गौतम का लण्ड बहुत ही शानदार है और गौतम बहुत अच्छी तरह से चोदता है? अब जी भर मस्त चुदवा ले अपनी चूत गौतम के लण्ड से। मैं भी अपनी चूत रमेश से चुदवा रही हूं।” रमेश जोरदार धक्को के साथ सुमन को चोदते हुए बोला, “यार गौतम, यह दोनो औरत बड़ी चुदासी है, चल आज दिन भर इनकी चूत चोद चोद कर इनकी चूतों को भोसड़ा बना देते हैं। तभी इनकी चूतों कि खुजली मिटेगी।” इतना कह कर रमेश सुमन कि चूत पर पिल पड़ा और दना दन चोदने लगा। गौतम भी पीछे नही था, वो अपना हाथों से उषा कि दोनो चूंची पकड़ कर अपनी कमर के झटकों से उषा कि चूत चोदना चालू रखा। थोड़ी देर तक ऐसे ही चुदाई चलती रही और दोनो जोड़े अपने अपने साथियों की जम कर चुदाई चालू रखी और थोड़ी देर के बाद दोनो जोड़े साथ ही झड़ गये। जैसे ही रमेश और गौतम सुमन और उषा कि चूत के अन्दर झड़ने के बाद अपना अपना लण्ड बाहर निकाला तो दोनो का लण्ड सफ़ेद सफ़ेद पानी से सना हुआ था और उधर सुमन और उषा कि चूतों से भी सफ़ेद सफ़ेद गाढा पानी निकल रहा था। झट से सुमन और उषा उठ कर अपने अपने पतियों का लण्ड अपने मुंह में भर कर चूस चूस कर सफ़ किया और फिर एक दूसरे की चूत में मुंह लगा कर अपने अपने पतियों का वीर्य चाट चाट कर साफ़ किया। थोड़ी देर के बाद रमेश और गौतम का सांस नोरमल हुआ और उठ कर एक दूसरे के गले लग गये और बोले। “यार एक दूसरे की बीवीयों को चोदने का मज़ा ही कुछ अलग है। अब जब तक हमलोग एक साथ है बीवीयों को अदल बदल करके ही चोदेंगे।”

थोड़ी देर के बाद सुमन और उषा अपनी कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई और तौलिया से अपनी चूत और जांघे पोंछ कर नंगी ही किचन कि तरफ़ चल पड़ी। उनको नंगी जाते देख कर रमेश और गौतम का लण्ड खड़े होना शुरु कर दिया। थोड़ी देर के बाद सुमन और उषा नंगी ही किचन से चाय और नाश्ता ले कर कमरे में आई और कुर्सी पर बैठ गई। रमेश और गौतम भी नंगे ही कुरसी पर बैठ गये। थोड़ी देर के बाद सुमन झुक कर प्याली में चाय पलटने लगी। सुमन के झुकने से उसकि चूंची दोनो हवा ने झूलने लगे। यह देख कर रमेश ने आगे बढ कर सुमन कि चूंचियों को पकड़ लिया और उन्हे दबाने लगा। यह देख कर उषा अपनी कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई और गौतम के नंगे गोद पर जा कर बैठ गई। जैसे ही उषा गोद में बैठी गौतम ने अपने हाथों से उषा को जकड़ लिया और उसकी चूंची को दबाने लगा। उषा झुक कर गौतम के लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगे और थोड़ी देर के गौतम के लण्ड को अपने मुंह में भर लिया। यह देख कर सुमन चाय बनना छोड़ कर रमेश के पैरो के पस बैठ गई उसने भी रमेश का लण्ड अपने मुंह में भर लिया। थोड़ी देर के बाद रमेश ने अपने हाथों से सुमन को खड़े किया और उसको टेबल के सहारे झुका कर सुमन कि चूत में पीछे से जाकर अपना लण्ड घुसेड़ दिया। सुमन एक हल्की से सिसकरी भर कर अपने चूतड़ हिला हिला अपनी चूत में रमेश का लण्ड पिलवती रही और वो खुद उषा और गौतम को देखने लगी। रमेश और सुमन को फिर से चुदाई शुरु करते देख गौतम भी अपने आप को रोक नही पाया और उसने उषा को अपनी गोद से उठा कर फिर से उसके दोनो पैर अपने दोनो तरफ़ करके बैठा लिया। इस तरीके से उषा की चूत ठीक गौतम के लण्ड के सामने थी। उषा ने अपने हाथों से गौतम के लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत से भिड़ा कर गौतम के गोद पर झटके साथ बैठ गई और गौतम का लण्ड उषा कि चूत के अन्दर चला गया। उषा अब गौतम के गोद पर बैठ कर अपनी चूतड़ उठा उठा कर गौतम के लण्ड का धक्का अपनी चूत पर लेने लगी। कमरे सिर्फ़ फस्सह, फस्सह का आवाज गूंज रही थी और उसके साथ साथ सुमन और उषा की सिसकियां।

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