Yaun Vasna Ke Vashibhoot Par Purush Sahvas

अन्तर्वासना की आदरणीय पाठिकाओं एवम् पाठकों को टी पी एल का अभिनन्दन!

लगभग तीन माह पहले मेरी रचना
संतान के लिए परपुरुष सहवास
पढ़ कर मुझे राजस्थान प्रदेश की रहने वाली अर्पिता चौहान का एक सन्देश मिला था।

उस सन्देश में मेरी रचना के बारे परपुरुष सहवास पर उसने अपने विचार लिख कर भेजे थे और उस विषय पर कुछ दिनों तक मेरा उसके साथ संदेशों का आदान प्रदान होता रहा।

अंत में अर्पिता ने अपने विचारों के पक्ष में अपने जीवन के एक अनुभव का विवरण लिख कर भेजा जिससे मुझे उसके विचारों से कुछ हद तक सहमत होना पड़ा।

अर्पिता द्वारा उसके जीवन के अनुभव पर लिखे गए विवरण के आधार पर मैंने यह रचना लिख कर अन्तर्वासना पर प्रकाशित करने की अनुमति लेने के लिए उसे एक माह पहले भेजी थी।

कुछ दिन पहले अर्पिता ने मेरी उस रचना में कुछ तथ्यों पर सही जानकारी दे कर मुझे अन्तर्वासना पर प्रकाशित करने का अधिकार दे दिया।

मैंने अर्पिता के द्वारा भेजे गए सही तथ्यों को उसी के शब्दों में लिखी निम्नलिखित रचना में सम्मलित करते हुए उसे सम्पादित कर के आप सब के मनोरंजन के लिए प्रस्तुत कर रही हूँ।
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अन्तर्वासना की असंख्य पाठिकाओं एवम् पाठकों को मेरा प्रणाम!

मेरा नाम अर्पिता चौहान है और मैं अपने ससुराल में अपने पति, पुत्र एवम् विधवा सास के साथ राजस्थान प्रदेश के एक प्रसिद्ध धार्मिक शहर में रहती हूँ।

मैं अपने मम्मी-पापा की इकलौती संतान हूँ और जब मैं अल्प व्यस्क थी तब एक दिन बहुत ही तेज़ ज्वर से पीड़ित होने के कारण अकस्मात् ही मेरी मम्मी की निधन हो गया।

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मम्मी की आकस्मिक मृत्यु के बाद पापा ने मुझे सम्भाल तो लिया लेकिन मम्मी की कमी को पूरा नहीं कर सके और वह भी उनके गम में दो वर्षों के बाद इश्वर को प्यारे हो गए।

इतनी कम आयु में मेरे सिर से मम्मी एवम् पापा का साया उठ जाने के बाद मेरे सबसे छोटे मामा और मामी मुझे रहने के लिए अपने ही घर ले आये थे।

मेरे मामा-मामी दोनों ही हमारे शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर हैं और दोनों का शहर में एक नर्सिंग होम है जिसमें मामा जी सर्जन हैं तथा मामी प्रसूति विशेषज्ञ हैं।

उन दोनों की उन्नीस वर्षीय बेटी अपूर्वा पिछले वर्ष से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है और वहीं हॉस्टल में रहती है।

मामा-मामी ने अपूर्वा के साथ साथ मुझे भी अपनी बेटी की तरह बहुत ही प्यार से पाल पोस कर बड़ा किया।

मेरा विवाह, ससुराल
लगभग ढाई वर्ष पहले जब मैं इक्कीस वर्ष की हुई थी और मेरी स्नातक की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी तब उन्होंने मेरी शादी कर दी थी।

मेरे पति शहर के एक बहुत बड़े औषिधि व्यापारी एवम् विक्रेता माने जाते हैं और हमारे घर पर हर तरह की सुख-सुविधा का सामान उपलब्ध है।

क्योंकि औषधि कंपनियों की ओर से आये दिन उन्हें कोई न कोई उपहार मिलते ही रहते हैं जिसके कारण घर में किसी भी वस्तु की कमी नहीं है।

मेरी विधवा सास बहुत ही विन्रम और धार्मिक स्वभाव की महिला है और वह भी मुझे बेटी की तरह प्यार करती है।

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मेरे पति मुझे बहुत ही प्रेम करते हैं और मेरी हर की इच्छा की पूर्ति एवम् ख़ुशी का ध्यान भी रखते हैं तथा मेरे आनन्द एवम् संतुष्टि के लिए सदा तत्पर रहते हैं।

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