विधवा भाभी की चुदाई-2

उसने शरमाते हुये कहा- मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

मैंने पूछा- तुझे क्यों अच्छा लगा।

वो बोली- इस लिये कि आपका बहुत बड़ा है।

मैंने पूछा- जब मैं तुम्हारी दीदी के साथ करता हूँ तब कैसा लगता है?

वो बोली- तब तो और ज्यादा अच्छा लगता है। लेकिन जीजू, एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि तुम्हारा इतना बड़ा है फिर भी दीदी के अन्दर पूरा का पूरा घुस जता है।

मैंने कहा- तेरी दीदी को इसकी आदत पड़ गई है।

वो बोली- लेकिन पहली बार जब आपने घुसाया होगा तो दीदी दर्द के मारे बहुत चिल्लाई होगी?

मैंने कहा- दर्द तो पहली पहली बार सब औरतों को होता है। इसे भी हुआ था और यय खूब चिल्लाई भी थी। लेकिन लाली बाद में मज़ा भी तो खूब आता है। तुम चाहो तो अपनी दीदी से पूछ लो।

लाली ने ॠतु से पूछा- क्यों दीदी, क्या जीजू सही कह रहे हैं?

ॠतु ने कहा- हाँ लाली, तभी तो मैं इनसे रोज रोज करवाती हूँ। बिना करवाये मुझे नींद ही नहीं आती। तुम भी एक बार इनका अन्दर ले लो। कसम से इतना मज़ा आयेगा कि तुम भी रोज रोज करने को कहोगी।

लाली बोली- ना बाबा ना, मुझे बहुत दर्द होगा क्योंकि मेरा तो अभी बहुत छोटा है।

ॠतु ने कहा- छोटा तो सभी का होता है।

लाली बोली- मुझे दर्द भी तो बहुत होगा।

ॠतु ने कहा- पगली, एक बार ही तो दर्द होगा उसके बाद इतना मज़ा आयेगा कि तू सारा दर्द भूल जायेगी। तूने देखा है ना कि कैसे इनका मेरी चूत में सटासट अन्दर बाहर होता है।

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वो बोली- हाँ, देखा तो है।

ॠतु बोली- फिर एक बार तू भी अन्दर ले कर देख ले। अगर तुझे मज़ा नहीं आयेगा तो फिर कभी मत करवाना।

वो बोली- बाद में करवा लूंगी।

ॠतु ने कहा- आज क्यों नहीं।

वो बोली- मैं कहीं भागी थोड़े ही जा रही हूँ।

ॠतु ने कहा- तो फिर आज तू इसे मुँह में ले कर चूस ले। जब तेरा मन कहेगा तभी इसे अन्दर लेना।

वो बोली- ठीक है, मैं मुँह में लेकर चूस लेती हूँ।

ॠतु ने मुझसे कहा- तुम लाली के बगल में आ जाओ।

मैं लाली के बगल में आ गया। लाली ने मेरी लुंगी हटा दी और अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया। उसके हाथ लगाने से मेरा लण्ड फनफनता हुआ खड़ा हो गया। लाली उसे सहलाने लगी। मुझे मज़ा आने लगा, मैंने कहा- अब इसे मुँह में ले लो।

वो बोली- जरूर लूंगी, पहले थोड़ा सहलाने दो ना।

मैंने कहा- ठीक है।

थोड़ी देर तक सहलाने के बाद लाली उठ कर बैठ गई। उसने शरमाते हुये मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

ॠतु ने मुस्कराते हुये पूछा- क्यों लाली, कैसा लग रहा है?

वो बोली- दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है।

ॠतु ने कहा- मेरी बात मान जा और इसे अपनी चूत के अन्दर भी ले ले। फिर और ज्यादा अच्छा लगेगा।

वो बोली- बहुत दर्द होगा।

ॠतु ने कहा- तू इतना डरती क्यों है। मैं हूँ ना तेरे पास।

उसने कहा- अच्छा, मुझे पहले थोड़ी देर चूस लेने दो, फिर मैं भी अन्दर लेने की कोशिश करुंगी।

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लाली मेरा लण्ड चूसती रही। मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसकी चूत पर रख दिया लेकिन वो कुछ नहीं बोली। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरु कर दिया तो वो सिसकारियां भरने लगी।

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