विधवा भाभी की चुदाई-2

अगले 2 दिनों में मैंने लाली से मजाक करना शुरु कर दिया। धीरे धीरे वो भी मुझसे मजाक करने लगी। अब वो मुझसे शरमाती नहीं थी। अब लाली खुद ही तौलिया ले आती थी। उस दिन भी जब मैं नहा रहा था तो वो तौलिया ले कर आई और खड़ी हो गई और मेरे लण्ड को देखने लगी।

मैंने कहा- साली जी, आज तुम ही मेरे लण्ड पर साबुन लगा दो।

वो बोली- क्या जीजू, मुझसे अपने लण्ड पर साबुन लगवाओगे?

मैंने कहा- तो क्या हुआ?

वो बोली- दीदी क्या कहेंगी?

मैंने ॠतु को पुकारा तो वो आ गई और बोली- क्या है?

मैंने कहा- मैं लाली से अपने लण्ड पर साबुन लगाने को कहा तो यह कह रही है कि दीदी क्या कहेंगी। अब तुम इसे बता दो कि तुम क्या कहोगी।

ॠतु ने कहा- मैं तो कहूँगी कि लाली तुम्हारे लण्ड पर साबुन लगा दे। आखिर वो तुम्हारी साली है। मैं भला इसे कैसे मना कर सकती हूँ।

मैंने लाली से कहा- देखा, यह तुम्हें कुछ भी नहीं कहेगी।

लाली ने कहा- फिर मैं साबुन लगा देती हूँ।

ॠतु चली गई। लाली ने थोड़ा सा शरमाते हुये मेरे लण्ड पर साबुन लगाना शुरु कर दिया। मुझे खूब मज़ा आने लगा। उसकी आंखे भी गुलाबी सी होने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोली- अब बस करूं या और लगाना है।

मैंने कहा- थोड़ा और लगा दे, तेरे हाथ से साबुन लगवाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

वो साबुन लगाती रही। थोड़ी ही देर में जब मुझे लगा कि अब मेरा रस निकल जायेगा तो मैंने कहा- अब रहने दो।

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उसने अपना हाथ साफ़ किया और चली गई।

मैं नहाने के बाद बाहर आया और ड्राईंग रूम में सोफ़े पर बैठ गया। मैंने ॠतु को पुकारा, ॠतु, जरा तेल तो लगा दो।

लाली मेरे पास आई और बोली- मैं ही लगा दूं क्या?

मैंने कहा- यह तो और अच्छी बात है। तुम ही लगा दो।

लाली मेरे लण्ड पर तेल लगा कर बड़े प्यार से मालिश करने लगी तो मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया। लाली ठीक मेरे लण्ड के सामाने जमीन पर बैठ थी। मेरे लण्ड से रस की धार निकल पड़ी और सीधे लाली के मुँह पर जाकर गिरने लगी।

लाली शरमा गई और बोली- क्या जीजू, तुमने मेरा मुँह गन्दा कर दिया।

मैंने कहा- तुम्हारे तेल लगाने से मैं कुछ ज्यादा ही जोश में आ गया और मेरे लण्ड का रस निकल गया। आओ मैं साफ़ कर देता हूँ।

वो बोली- रहने दो, मैं खुद ही साफ़ कर लूंगी।

लाली बाथरूम में चली गई। ॠतु किचन से मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी। ॠतु ने कहा- अब तुम्हारा काम बनने ही वाला है।

नाश्ता करने के बाद मैं दुकान चला गया। रात को मैं लाली के लिये एक झुमकी ले आया। मैंने उसे झुमकी दी तो वो खुशी के उछल पड़ी और ॠतु को दिखाते हुये बोली- देखो दीदी, जीजू मेरे लिये क्या लाये हैं।

ॠतु ने कहा- तू ही उनकी एकलौती साली है। वो तेरे लिये नहीं लायेंगे तो और किसके लिये लायेंगे।

रात को खाना खाने के बाद हम सोने के लिये कमरे में आ गये। मैंने लाली से मजाक किया, क्यों लाली, मेरा लण्ड तुझे कैसा लगा।

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उसने शरमाते हुये कहा- जीजू, यह भी कोई पूछने की बात है।

मैंने कहा- तेरी दीदी को तो बहुत पसन्द है, तुझे कैसा लगा।

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