सामने वाली भाभी चालू निकली

हेल्लो दोस्तो, मैं मनीष देल्ही से आज एक मस्त कहानी ले कर आया हूँ. ये कहानी एक दम सच्ची है. क्योकि ये सब मेरे साथ 1 महीने पहले ही हुआ है. तो अब ज़्यादा टाइम खराब ना करते हुए, कहानी शुरू करता हूँ.

मेरी उम्र 20 साल है, और मैं बी.कॉम कर रहा हूँ. मैं दिखने मे हॅंडसम और थोड़ा सा स्मार्ट भी हूँ. मैने अभी तक सेक्स न्ही किया था पर इंटरनेट से हिन्दी सेक्स स्टोरी पढ़ कर काफ़ी कुछ जान लिया था.

तभी मेरे घर के सामने वाले घर पर एक कपल रहने को आया. दोस्तो, क्या लड़की थी. उसके आने से मोहल्ले मे एक नयी सी रौनक सी आ गई थी. सब लड़के उसके दीवाने हो गये थे.

क्योकि वो चीज़ ही कुछ ऐसी थी. उसका नाम रीता था, और उसका रंग दूध जैसा गोरा. फिगर 32-28-36 था, मैं उसकी गांड का दीवाना था. क्योकि वो बहुत मोटी और सेक्सी थी.

मुझसे मेरे सारे दोस्त जलते थे, क्योकि मेरा घर उसके घर एक दम सामने था. सुबह सबसे पहले मैं उसी के दर्शन करता था. मेरी उनके साथ थोड़ी बहुत बोल चाल थी.

मैं रीता भाभी को सोच सोच कर अब मूठ भी मारने लग गया था. क्योकि उसने मेरे दिल दिमाग़ पर राज कर लिया था. फिर अचानक ही उसके पति दुबई 2 साल के लिए काम करने के लिए चले गये थे.

ये बात आग की तरह पूरे मोहल्ले मे फैल गई. अब रीता भाभी घर मे अकेली थी, सारे लड़के उसके घर के पास ही चक्कर लगाने लग गये. सब उसे पटाने मे लगे रहेते थे.

पर मैने उस पर कभी ट्राइ न्ही किया, क्योकि वो मेरे घर के सामने रहती थी. मुझे डर लगता था, की कही वो मेरे घर वालो को इस बारे मे ना बता दे. इसलिए मैं ज़्यादा कुछ न्ही कहता था.

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एक रात की बात है, मैं अपने दोस्त की बर्थडे पार्टी से घर वापिस आ रहा था. रात काफ़ी हो चुकी थी, इसलिए गली मे कोई न्ही था. मैं जेसे ही अपने घर के पास आया, तभी उपर से रीता भाभी ने मुझे आवाज़ मारी.

रीता – अरे मनीष सुनो.

मैं – हा जी भाभी बोलिए ?

रीता – क्या तुम मेरे घर मे आकर, टीवी का सेटप बॉक्स ठीक कर दोगे ?

मैं – क्यो भाभी क्या हो गया ?

रीता – उसमे कोई भी चायनल न्ही आ रहा है.

मैं – ठीक है भाभी मैं आता हूँ.

फिर मैं उनके घर गया, मैने अंदर बैठ के उनका सेटप बॉक्स ठीक कर दिया. फिर मैं जाने लगा. पर तभी भाभी ने मुझे रोका और बोली.

रीता – रूको, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूँ.

मैं – न्ही भाभी उसकी ज़रूरत न्ही है.

रीता – न्ही रूको, मैं आती हूँ बना कर अभी.

उनकी आँखो मे मुझे कुछ अजीब सा लग राहा था. मैं समझ गया की उनके पति को गये हुए 4 महीने हो गये है. इसलिए इन्हे लंड की प्यास लगी हुई है. इसलिए आज उन्होने मुझे इस टाइम ही बुलाया है.

फिर भाभी किचन मे गई और थोड़ी देर बाद वो मेरे लिए चाय बना कर ले आई. भाभी मेरे साथ बैठी हुई थी, और चाय पी रही थी. मेरी नज़र उनके बूब्स पर थी. जो उनकी मॅक्सी मे से सॉफ सॉफ दिख रहे थे.

मेरा मन उन्हे चूसने का हो रहा था. तभी भाभी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया, और उनकी आँखें मुझे बहुत कुछ कहने लग गई. वो अपने होंठ अपने दांतो से चबाने लग गई.

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ये देख कर मेरा दिमाग़ खराब हो गया, और मैने चाय टेबल पर रखी. फिर मैने भाभी का चेहरा अपने हाथो मे लिया. और फिर उनके होंठो को अपने होंठो से मिला कर ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया.

भाभी ने मुझे कुछ न्ही काहा, और वो भी मेरे होंठो को चूसने लग गई. हम दोनो किस्सिंग का पूरा मज़ा ले रहे थे. धीरे धीरे मेरे हाथ उनके बूब्स पर आ गये. जो काफ़ी मुलायम और मक्खन जेसे सॉफ्ट थे.

भाभी के बूब्स मैं ज़ोर ज़ोर से दबाने लग गया, जिससे भाभी के मूह से मस्ती से भरी सिसकारिया निकलने लग गई. मुझे सच मे बहुत मज़ा आ रहा था. भाभी भी अपने हाथो से मेरे लंड को मसलने लग गई थी.

अब मुझसे और न्ही रुका गया, मैने भाभी को खड़ा किया और बेडरूम मे ले गया. मैने भाभी को पूरा नंगा कर दिया और भाभी ने मुझे नंगा कर दिया. फिर भाभी नीचे बैठ गई और मेरे लंड को देख कर वो बोली.

रीता – ओये मनीष तेरा बहुत बड़ा है, तेरे भय्या का तो इसके आगे कुछ भी न्ही है.

मैं – भाभी बकवास बंद कर और अपना मूह खोल कर इसे अंदर लो.

फिर भाभी ने मेरा लंड अपने मूह मे डाला, और ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गई. मैं भी उनका सिर पकड़ कर उनका मूह चोदने लग गया. जब मेरा लंड पूरा उनके मूह की थूक से गीला हो गया. तो मैने उन्हे बेड पर लेटा दिया, और उनकी टाँगे खोल कर उपर उठा दी.

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