पत्नी को पति का तोहफा

प्रीति ने राज के वीर्य रिक्त लंड को अपने मूह में ले लिया तभी उसने अंजाने व्यक्ति के हाथ अपनी गांद पे महसूस किए, जैसे ही उस व्यक्ति
ने अपना लंड उसकी गीली चूत में पेला प्रीति ने सोचा. “हे भगवान अब ये मुझे चोद्ने वाला है.”

एक बार तो उसका मन किया की वो यहाँ से भाग जाए पर उसकी काम इच्छा ने उसे रोक दिया. उसके अंदर की आग इतनी भड़क चुकी थी कि वो
चुद्वाने के अलावा उसके पास कोई उपाय नही था.

अंजाने व्यक्ति उसके दोनो कुल्हों को पकड़ ज़ोर से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया, वहीं राज ने उसके पट्टी बँधे सिर को अपने लंड पर
दबा दिया जो अब खड़ा होने लगा था.

वो अंजना व्यक्ति उसकी गांद पर थप्पड़ मारते हुए ज़ोर ज़ोर से प्रीति को चोदे जा रहा था. और वो उतनी ज़ोर से राज के लंड को चूस रही थी. उसका
शरीर फिर तन रहा था.

अनजाना व्यक्ति जैसे ही अपने लंड को अंदर तक डालता प्रीति उतना ही अपने कुल्हों को पीछे की ओर धकेल उसके लंड को और अपनी चूत की
जड़ तक ले लेती. उस व्यक्ति का लंड राज के लंड से बड़ा था और प्रीति को उसकी चूत भारी सी महसूस हो रही थी.

“अगर राज यही चाहता है कि में अंजाने व्यक्ति से चुद्वाउ तो ठीक है आज मेने भी इसके लंड की एक एक बूँद को निचोड़ के पी जाउन्गि”
सोच कर प्रीति और ज़ोर से राज के लंड को चूसने लगी.

उस व्यक्ति अपनी पूरी ताक़त से प्रीति को चोद रहा था. और प्रीति जोरों से मूह को उपर नीचे कर राज के लंड को चूस रही थी. जब वो
पीछे को होती तो उस व्यक्ति का लंड जड़ तक समा जाता और जब वो आगे को होती तो राज का लंड उसके गले तक आ जाता.

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प्रीति पूरे आनंद के साथ इस समहुक चुदाई मे मस्त थी. वो अब घोड़ी बन पूरे जोश से चुद्वा रही थी. राज उसकी चुचियों को
मसल्ते हुए ज़ोर से उसके मूह को चोद रहा था और वो व्यक्ति पूरे ज़ोर से प्रीति के कुल्हों को पकड़ धक्के लगा रहा था.

उसका खून उबाल मार रहा था और उसकी चूत फिर से एक बार पानी छोड़ने को तय्यार थी, “चूऊऊऊओदूऊ मुझे और ज़ोर सी चोदो” वो
चीखी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

प्रीति ने पूरी ताक़त से अपनी गांद उस व्यक्ति के पाट के साथ सटा दी और उसने उस व्यक्ति का वीर्य छूटता महसूस किया. उसके लंड की
पिचकारी इतनी तेज थी कि उसे लगा की उसका वीर्य ठीक उसकी बच्चे दानी पर छूट रहा है. उसके लंड से इतना पानी निकला कि उसकी चूत
पूरी भर गयी और पानी चूत से टपकने लगा.

तभी राज ने उसके सिर को ज़ोर से पकड़ा और उसके मूह में अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी.

वो अंजना व्यक्ति अभी उसे चोदे जा रहा था. उसका लंड तेज़ी से उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था. प्रीति तकिये पर लेटी सोचने
लगी “हे भगवान क्या ये फिर मेरी चूत में अपना पानी छोड़ेगा.”

उस व्यक्ति ने उसे बालों से पकड़ अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक समा दिया. फिर एक बार प्रीति ने उसके गरम वीर्य की पिचकारी अपनी
चूत में महसूस की.

प्रीति निढाल हो बिस्तर पर गिर गयी और अपनी तेज सांसो को संभालने लगी. उसे अभी भी अपने आप पर विश्वास नही हो रहा था कि वो किसी
अंजान व्यक्ति से चुड़वाई है. एक ऐसे व्यक्ति से जिसकी उसने शक्ल भी नही देखी.

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वो अपने ख़यालों में खोई हुई थी कि उसने एक गाड़ी के जाने की आवाज़ सुनी. राज ने आगे बढ़कर उसके आँखों से पट्टी उतार दी.

“हॅपी बर्तडे मेरी जान !” राज मुस्कुरकर उसकी आँखों मे झाँक रहा था.

“वो कौन था राज?” प्रीति ने पूछा.

“ये में तुम्हे कभी नही बताउन्गा, यही तो तुम्हारा अनोखा तोहफा था.” राज ने जवाब दिया.
“तो क्या मुझे अपने अगले जनमदिन तक रुकना पड़ेगा.” प्रीति मन मन सोची.

प्रीति की आँखों में चमक देख राज ने कहा, “मुझे खुशी है कि तुम्हे तोहफा अच्छा लगा.”

अगले पूरे हफ्ते तक प्रीति अपने जनमदिन की रात की चुदाई के ख़यालों में खोई रही. जितना वो उस याद को मिटाने की कोशिश करती
उतनी ही याद ताज़ा हो जाती. उन यादों को सोचकर ही उसका बदन सिहर जाता कि किस तरह उसके पति और एक अंजान मर्द ने उसे चोदा था.

कभी तो उसे अपने आप पर गुस्सा आता कि ये सब क्यों हुआ और उसके पति ने कैसे एक अंजान मर्द को उनके बेडरूम मे ला अपनी ही पत्नी की
चुदाई करने दी, पर दूसरी और उसका दिल ये भी सोचता कि जितना आनंद उसे उस रात चुदाई में आया था उतना कभी नही आया. एक रात में
शायद ही कभी उसकी चूत इतनी बार झड़ी होगी.

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