ताकि हुई बहन को भाई ने तगड़ा चोदा

तो पिछली स्टोरी में आपने पढ़ा शिखा और उसके पेरेंट्स मथुरा से वापस आ रहे थे, और मैं फ्लॅट पर वेट कर रहा था की कब दूसरा दिन खिले, और शिखा की गांद मिले.

शिखा 4 बजे अराउंड पहुँच गयी अपने फ्लॅट पर, और उसके पेरेंट्स उसे ड्रॉप करके कही चले गये. मैने देख लिया और उसे कॉल किया.

विवेक: ये तेरे मों-दाद तुझे ड्रॉप करके फ़ौरन कहा चले गये?

शिखा: अर्रे उनको ऑफीस से कॉल्स आ रही थी. कुछ अर्जेंट मीटिंग है, तो आ जाएँगे 1-2 अवर्स में वापस.

विवेक: अर्रे वाह, मज़ा आ गया. फिर तो तू पहुँच फ्लॅट पर, मैं आ रहा हू.

शिखा: नही कोई ज़रूरत नही है आने की. बहुत ताकि हुई हू मैं भैया.

पर मैं कहा सुनने वाला था. मैने फोन कट किया, और चल दिया भागा-भागा, गांद ना सही छूट का ही एक रौंद लग जाएगा ये सोच कर. शिखा उपर गयी, और फ्लॅट का लॉक खोल पाए वो तब तक मैने पीछे से उसे पकड़ कर फ्लॅट में एंटर कर लिया.

शिखा: ओह बहनचोड़, हवा में उडद कर आए हो क्या? देखो-देखो छूट के लिए शक्तिमान बन गया बहनचोड़.

विवेक: क्या करू यार, तेरी छूट के सिवा अब किसी की छूट में मज़ा नही आता. तूने गुलाम बना लिया मेरा लंड.

मैने शिखा का बाग उसके कंधे से उतार फेंका, और पीछे से ही उसे ज़ोर से हग किया.

शिखा: उम्म्म भैया, यार सच में बहुत ताकि हुई हू. ऐसे ज़ोर से हग किया आपने तो बहुत अछा लगा.

विवेक: इसीलिए तो आया हू मैं अपनी शिखा की पूरी बॉडी दबाने. उसका सारा दर्द निकालने.

शिखा: मेरा दर्द निकालने या अपना लंड निकालने?

मैने पीछे से ही उसके बूब्स पकड़ कर हल्के-हल्के से दबाने शुरू किए.

शिखा: उम्म भैया मत करो यार, सच में बहुत ताकि हुई हू. अभी आप पेलोगे तो नही झेल पौँगी झटके, और वैसे भी टाइम नही है. अभी मों दाद कभी भी आ जाएँगे यार.

मैने बूब्स पकड़ कर उसे उठाया, और वैसे ही पीछे से उठाए हुए बेड पर लिटा दिया उसे. फिर पीछे से उसके उपर लेट गया बूब्स को पकड़े हुए.

शिखा: अफ बहनचोड़ एम्म्म सारा दर्द निकल रहा है बॉडी से भैया तुम्हारे वेट की वजह से एम्म्म मा आहह. धीरे से दब्ाओ भैया, मेरे सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स में लगता है आपका पिंच करना यार.

मैने एक हाथ से अपनी जीन्स खोली और नीचे कर दी. फिर उसकी लेगिंग भी उतारने लगा.

शिखा: अर्रे-अर्रे भैया, नही-नही यार, प्लीज़ अभी नही यार. टाइम भी नही है, और मॅन भी नही है. भैया बहुत थकावट है.

विवेक: मॅन तो मैं बना दूँगा मेरी जान. रुक जेया 2 मिनिट बस.

शिखा: नही भैया प्लीज़, आज नही. आज रेस्ट लेने दो, कल सुबह जैसे ही मों दाद निकले, वैसे ही आ जाना चाहे तो.

मैने उसकी छूट को हाथ में पकड़ कर काज़ कर दबाया.

शिखा: ह्म्‍म्म्म एम्म्म उफ़फ्फ़ बहनचोड़ छ्चोढो यार. सूखी पड़ी है छूट भैया दर्द हो रहा है उसमे.

फिर मैने उसकी छूट के होंठो के बीच में हरकत करनी शुरू की, और 2 उंगलियों से पहले तो उसकी छूट की बाहरी दीवारें खुज़ाई. फिर अंदर डाल कर चलाने लगा.

शिखा: एम्म्म बहनचोड़ मान भी जया करो कभी मेरी बात भैया. हर बार अपनी करते हो आहंम माआ, भैया निकालो उंगलियों को यार एम्म्म म्‍म्म्मम.

धीरे-धीरे उसकी छूट गीली होने लगी, और मेरा लंड अपनी शेप में आ गया. मैने लंड पकड़ कर पीछे से उसकी छूट की द्वार पर रखा, और जान-बूझ कर ज़ोर का झटका मारा, और पूरा लंड उतार दिया छूट में.

शिखा: ह एम्म मदारचोड़, एम्म्म एक बार में पेल दिया रे लंड!

बस फिर क्या था, दोनो हाथो से उसे जाकड़ लिया और उपर से भी सारा बॉडी वेट डाल दिया उसी के उपर. उसकी बॉडी की अब फुल मसाज हो रही थी. अब नीचे से उसके पैर थोड़े मोड़ कर लंड पेलना शुरू कर दिया. डीप और स्लो फक, अफ मज़ा ही आ गया.

छूट भी गीली हो रही थी, तो लंड को भी लूब्रिकॅंट की तरह मिल रहा था छूट का रस्स. मस्त ग्रिप बन रही थी छूट की लंड पर.

शिखा: मस्त मज़ा आ रहा है भैया आ.

ऐसे ही पाट पाट पाट और शिखा की मोन्स से कमरा गूंजने लगा.

शिखा: बहनचोड़ कितना रोका, पर नही, हुआ वही जो ये बहनचोड़ को करना था.

विवेक: चुड गयी ना चूतिया शिखा. तेरी कोई औकात ही नही है. शिखा अब तो तू रंडी हो गयी है इस विवेक के लोड की. तू कितना भी रोक-टोक करे, कुछ भी करे, पर अगर विवेक का मॅन है तेरी बजाने का, तो तू बजेगी. बस यही औकात है तेरी. दो कौड़ी की रंडी है तू कुटिया. शिखा तो बस चुड अब.

शिखा: एम्म एसस्स विवेक, फक मे, फक मे, छोड़ो इस रंडी शिखा को जैसे चाहो.

मुझे भी जोश आ गया उसकी बातों से बहनचोड़, तो मैने उसे और तोड़ा ज़ोर से जाकड़ लिया, और लगा पेलने डीप और हार्ड शॉट्स. पाट पाट पाट पच पच पच.

शिखा: अया एस चला दी रेल बहनचोड़ एम्म्म म्‍म्म्मम म्‍म्म्मम आआहह मा क्यूँ छ्चोढ़ कर जाते हो मुझे फ्लॅट पर अकेला यार. ये जल्लाद मेरी सारी जवानी निचोढ़ लेगा, और मुझे पता है मुझसे शादी भी नही करेगा. मैं क्या लेकर जौंगी अपने हज़्बेंड के लिए?

ये बहनचोड़ तो मेरी गांद भी खोलने को बोल रहा है आअहह आमम. देखो मा गांद का नाम सुनते ही सेयेल में कैसे तूफान आ गया आअहह. आराम से छोड़ विवेक लोड, छूट से डाल कर मूह से निकलेगा क्या?

शिखा झाड़ गयी और उसने अपने फेस बेड पर पटक दिया. बाकी बॉडी तो मेरी पकड़ में थी. मैने भी उसके पैर थोड़े और मोड़ कर उसे कुटिया बनाया, और दे दाना दान पेलने लगा, और झाड़ गया उसकी छूट में ही.

शिखा: मिल गयी शांति? अब निकल मदारचोड़, इससे पहले की मेरी मा और बाप आ जाए. कमर तोड़ कर रख दी मेरी हरामी ने.

विवेक: पर तेरी गांद?

शिखा: चुप भोंसड़ी के. अब हाथ भी नही लगाना वरना लंड काट दूँगी. बोला ना कल आना.

मैने झुलस कर वाहा से निकल आया, पर गुस्सा तो बहुत था शिखा की बच्ची पर. मदारचोड़ की गांद आज ही पेलुँगा चाहे जो हो जाए.

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