पति के दोस्त की दुल्हन बनकर सुहागरात

विधि विधान के अनुसार शादी शुरू हुई. हम दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. बाद में पंडित जी ने मयूर से मेरी मांग में सिंदूर भरने को कहा. तभी मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और सिर्फ इस पल का आनन्द उठाने लगी. वो फीलिंग ऐसी थी कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती.

बाद में हम दोनों ने इस हसीन पल की बहुत सारी सेल्फ़ी भी लीं.

रात को तकरीबन 9 बजे हम सब घर आए और घर के गेट से ही मयूर ने प्रतीक के सामने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.

प्रतीक ने स्माइल करते हुए कहा- आज तुम्हारा दिन है मयूर, जी लो इस दिन को.
मयूर ने प्रतीक का धन्यवाद किया.

प्रतीक ने भी कहा- तुमने हमारे खानदान को वारिस दिया है, तो मैं इतना तो कर ही सकता हूं ना अपने सबसे करीबी दोस्त के लिए. अब हम दोनों मिल कर अपनी पत्नी का मजा लेंगे.
वे दोनों मुस्कुराने लगे.

मयूर मेरे सामने देख कर कहने लगा कि मेरा बस चले तो मैं तुम्हारे पांव जमीन पर छूने ही ना दूं.
मैंने उसकी इस बात पर उसको सामने से नजर भर कर देखते हुए एक प्यारी सी स्माइल दे दी.

मुझको बहुत सारे मर्दों ने अपनी गोद में लिया है … लेकिन मयूर की गोद में जो मजा आता था ना … वो मुझे कभी किसी और की गोद में कभी नहीं आया था.

प्रिय पाठक आप यदि मेरी इस बात का अर्थ न समझे हों, तो इसको मैं बाद में कभी आपको लिखूँगी.

बाद में हम मयूर के कमरे में चले गए उसने कमरा एकदम बहुत ही अच्छी तरह से सजा रखा था. मैं एक नई नवेली दुल्हन की तरह ही जाकर बेड पर बैठ गई. मैंने घूंघट मुँह तक ले लिया.

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थोड़ी देर बाद मयूर कमरे में आया. वो प्रतीक से कुछ बात करके आया था. उसके साथ प्रतीक भी कमरे के दरवाजे तक आया था. प्रतीक ने हम दोनों को बेस्ट ऑफ लक कहा और वहां से अपने कमरे में सोने चला गया.

अब हमारी सुहागरात प्रारंभ हो गई.

आह … क्या बड़ी ही मस्त फीलिंग थी. मेरा घूंघट उठाकर मयूर मेरी गोद में लेट गया और मेरे चेहरे को काफी देर तक देखता रहा. उसने एक हाथ से मेरे चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया और मुझे किस करने लगा. वो कभी मेरे गाल पर चुम्बन लेता, तो कभी होंठ पर चूमता, तो कभी गले पर … तो कभी कान के पीछे.

मैं लगातार एक अलग अहसास से गर्म होती जा रही थी. मैंने भी उसे बहुत ही टाईटली अपनी बांहों में भर लिया.

मयूर ने मेरी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से मसलते हुए मुझे बेड पर लेटा दिया. बेड पर लेटाने के बाद उसके हाथ मेरे ब्लाउज के हुक खोलने में व्यस्त हो गए. मेरा ब्लाउज खुलते ही ब्रा में कसी हुई मेरी चूचियां उसकी आंखों के सामने उछलने लगी थीं.
वो मेरी रसीली चूचियों को अपने हाथों से सहलाने लगा. फिर झुक कर उसने अपने होंठ मेरी चूचियों के बीच बनी दरार पर रख दिए और जीभ से मेरी दूध घाटी को ऐसे चाटने लगा जैसे वो किसी मक्खन के गोले को चाट रहा हो.

मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसके मुँह को अपनी चूचियों पर दबा लिया. उसके हाथ मेरी चूचियों के साथ साथ मेरे नंगे पेट पर भी घूम घूम कर मेरे मखमली शरीर का आनन्द ले रहे थे.
उसके हाथों में ना जाने कैसा जादू था कि मैं उत्तेजना के मारे हमेशा सिसकारियां भरने लगती थी.

तभी उसने मेरी चूचियों को मेरी खुली हुई लटकती ब्रा से बाहर निकाल लिया. अब वो मेरी दायीं चूची के निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा. मुझे भी मज़ा आने लगा था. तभी मेरी चूत में भी पानी आने लगा था.

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कुछ देर चूचियों का मर्दन करने के बाद वो उठा और उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए.

मैं उत्सुक निगाहों से उसके लंड के दर्शन की प्रतीक्षा करने लगी. जब उसने अपना अंडरवियर नीचे किया, तो उसका फनफनाता लंड देख कर मेरी तो बांछें खिल उठीं. शायद यह उन सब लंडों से ज्यादा लम्बा और मोटा था, जो मैंने आज से पहले अपनी चूत में लिए थे.

मयूर का लंड देख कर ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था. पूरा नंगा होने के बाद उसके हाथ अब मेरे कपड़ों का बोझ कम करने में व्यस्त हो गए. कुछ ही सेकंड्स में ही उसने मुझे भी नंगी कर दिया.

उसने झुक कर मेरी जांघों और नाभि को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. तभी मैंने हाथ बढ़ा कर उसके मूसल जैसे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.

मयूर तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गए. मुझे लंड मसलता देख, वो भी मेरी चूत के आसपास अपनी उंगली घुमाने लगा. फिर उसने अपनी बीच वाली उंगली मेरी चूत में घुसा ही दी.

मैंने उसके लम्बे लंड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, तो उसने अपना लंड मेरी तरफ कर दिया. मैंने बिना देर किये उसके लंड के सुपारे को अपनी जीभ से चाट लिया और उसको अपने होंठों में दबा लिया.

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