एक नर्स के साथ चुदाई

मैंने कहा, ‘सिस्टर ये ग़लत है लेकिन मेरा बदन मेरी बात नहीं मानता. अआप इसको समझाओ की ऐसा ना करे’ .

ऐसा कहते कहते मेरे हाथ निशा की चुचियों के ऊपर पहुँच गए और सहलाना शुरू कर दिया . मेरी कमर हिलने लगी और लंड को पीठ मे दबा कर रगड़ने लगा निशा की आंखें बंद हो गयी और वो धीरे धीरे आह.. ओह इश श श श स् स् स् स् की आवाज़ निकलने लगी . उसकी चुचियाँ सहलाने से फूल कर तन गई थी और उसके चेहरे पे और गले पे और सीने पे लाली छा गई थी , उसके चुचियों की गरमी उसके ड्रेस के ऊपर से भी महसूस हो रही थी. तभी मैंने उसके ड्रेस के ऊपर के दो बटन खोलने की कोशिश करी तो वो उठ कर खड़ी हो गई और बोली, ‘प्लीज़ डॉक्टर ड्रेस मत खोलो’ .

‘अच्छा निशा ड्रेस नही लेकिन प्रोमिस करो की मुझे किस करने दोगी’

कहते कहते मैं स्टूल पे बैठ गया और निशा को खींच कर अपनी गोदी मे बैठा लिया . अब उसकी गांड मेरे लंड के ऊपर आ गयी उसकी पीठ मेरे सीने से लगी थी और मेरे दोनों हाथ उसके दोनों चुचियों को ड्रेस के ऊपर से सहला और दबा रहे थे . उसकी चुन्चियाँ एकदम मख्खन जैसी थी.. मेरे दोनों हाथों मे समाँ रही थी.. वो चूची को सहलाने से मस्त हो रही थी और ऊऊ..ओ ओ o आ आ डॉक्टर ईई ओह्ह डॉक्टर आः डॉक्टर आ आ स्.स्.स्.स्.स्. उसके मुहँ से निकाल रहा था . मैंने उसको मस्त होते देख कर उसके कन्धों को चूमना शुरू कर दिया , उसके कान को चूमा कान को जीभ के नोंक से सहलाया.. फ़िर कान की पत्ती को होंठों मे ले कर चूसना शुरू किया.. , गाल पे पप्पी ली और गले को भी चूमा और दोनों चूची को ड्रेस के ऊपर से पकड़ ऊपर नीचे, दांये और बांये हिलाने लगा ऐसा करने से वो गरम होती जा रही थी.. फिर मैंने धीरे से उसके कान में फुसफुसाकर पूंछा ‘निशा क्या तुम्हे ये अच्छा नही लग रहा ‘?

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‘डॉक्टर आप सेक्स करना चाहते है या प्यार? सेक्स तो सिर्फ़ 2 मिनट का होता है’ .

मैं समझ गया जरूर उसका पति उसके जिस्म में 2 मिनट में झड़ जाता होगा . वैसे उसका जिस्म इतना सेक्सी था की शायद मैं भी पहली बार ज्यादा देर नही टिक पाऊंगा.. मैं उसे भी तैयार करने के बाद चोदना चाहता था. लेकिन निशा की चुचियों को सहलाते हुए मैंने पूंछा,

“निशा तुम्हारे हिसाब से प्यार क्या होता है?”

तो वो बोली ‘जो माँ और बच्चे मे होता है और मेरा कोई बच्चा नही है’ .

मैंने कहा ” कोई बात नही मैं आ गया हूँ ना मैं तुम्हारा बच्चा हूँ’.

कहते कहते मेरे हाथ निशा की दोनों जांघों को सहलाने लगे. जांघों पे हाथ पड़ते ही वो उठ कर खड़ी हो गई और बोली ‘ डॉक्टर अब और मत करना’ .

मैंने स्टूल बीच से हटाया और निशा को पीछे से कास कर पकड़ लिया अब मेरा लंड ठीक उसके गांड पे था . मैंने उसके गले के पीछे किस करते हुए अपने लंड को उसकी गांड पे दबा कर खूब रगड़ा . तभी मेरा मोबाइल बज उठा और मुझे जाना पड़ा .उस दिन के बाद एक चीज साफ थी की उसे लंड और चूत की होली पसंद नही थी . शायद उसकी चुदाई का अनुभव बहुत ही बुरा था उसे चुदाई मे शायद प्यार और अपनापन नहीं मिला था . उस दिन के बाद से हम जब कभी अकेले मिलते तो एक दुसरे से लिपट जाते और एक दुसरे को खूब सहलाते . जब भी मैं उसके पीछे से लिपटता था तो खड़े खड़े अपने लंड को उसकी गांड पर खूब रगड़ता और उसकी चुन्चियों और जांघों को खूब सहलाता .

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जब कभी हम दोनों सामने से लिपटते तो मैं लंड को ड्रेस के ऊपर से उस के चूत पे दबा दबा कर रगड़ता और हाथ से उसकी पीठ को और गांड को ड्रेस के ऊपर से सहलाता . ऐसे ही मौका मिलते ही कभी चंद मिनटों के लिए तो कभी आधे एक घंटे चूमा चाटी और एक दुसरे के जिस्म की रगडाई चलती रही . मैंने कभी उसे चोदने के लिए जल्दबाजी नही दिखाई. हाँ मैंने उसे फील करवाया की मै उसके जिस्म को और उसे प्यार करता हूँ.. हम लोग बातें भी करते थे.. और मै उसके जिस्म की तारीफ़ भी करता था. एक दिन उसकी केबिन मे जब हम चूमा चाटी कर रहे थे उस समय उसकी पीठ दीवाल से सटी थी और उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाये हुए थे और मैं अपने सीने से उसकी चुचियों को और लंड से उसकी फूली हुयी गदराई चूत को रगड़ रहा था और वो मस्त हो रही थी तब मैंने कहा, “निशा , एक बात कहूं “?

“हाँ डॉक्टर बोलो”

“मैं तुम्हारा बच्चा हूँ ना?

“हाँ डॉक्टर ”

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