मा बहन की चुदाई पापा और अंकल ने की

दोस्तों मेरा नाम श्यान सिंह हे और मैं दिल्ली में रहता हूँ काफी सालो से. लेकिन मेरा नेटिव यानी की मूल वतन राजस्थान हे. मैं वही पर पैदा और बड़ा हुआ. फिर मुझे अपने घर में घुटन सी होती थी जैस जैसे मैं बड़ा होता गया. और मैं दिल्ली काम के लिए आ गया. अब मैंने यही पर शादी कर लिए हे और राजस्थान मैं सिर्फ कुछ ख़ास मौको के ऊपर 2-3 साल में एक बार ही जाता हूँ.

घुटन की असली वजह मेरी माँ थी. या फिर यूँ कहे की मेरा बाप था! हमारे घर में चुदाई के जो काण्ड और काम होते थे वो घिनोने थे. मम्मी दूसरी की गोदी में होती थी चूत में लंड डलवा के और मेरा बाप मेरी बहन को चोदता था. मैं ये सब देख के उब गया और दिल्ली आ गया. आज बहुत सालों के बाद अपने दिल को हल्का करने के लिए मैं इस साईट के ऊपर अपनी एक आँखोदेखी को आप के सामने कह रहा हूँ.

बारिश के दिन थे और राजस्थान में तो बारिश किसी महर से कम नहीं हे. मैं 18 साल का था उस वक्त. घर में मेरे से छोटी बहन और मेरे बड़े भाई हे. बड़े भाई तो पहले से ही मुंबई में रहते थे चाचा की दूकान पर. बरसात में नहाने के लिए मैं भी अपने दोस्तों के साथ हाईवे वाली साइड पर गया था. हम लोगों ने बहुत मस्ती की और फिर मेरा एक दोस्त मुझे घर पर ड्राप कर गया. मैं पूरा भीग गया था इसलिए घर में पानी ना चूहे इसलिए मैं पीछे से वरांडा कूद के अन्दर गया. पीछे किचन के पास एक पानी का नल हे मैंने सोचा वही पर थोडा पानी डाल के घर में जाऊं ताकि कीचड़ न हो घर में.

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पीछे से कूद के अभी तो नल को हाथ ही लगाया था की अन्दर के कमरे से किचुड किचुड की आवाजें आने लगी. जिसे अनुभव होता हे वो जान लेता हे की चारपाई के ऊपर किसी चूत को चोदा जा रहा था. मैंने मन ही मन में सोचा बापू भी टाइम देखे बिना ही लग जाते हे!

लेकिन फिर दो औरतों की चुदने की आवाज आई मुझे, क्यूंकि सिसकियाँ बिना रुके आ रही थी. एक लो पिच की और एक थोड़ी घोघरी सी. घोघरी माँ की थी वो तो मैं जान गया लेकिन लो पिच वाली किस की थी? साला मैंने सोचा की लाओ देखूं तो. मैंने दबे पाँव कमरे में झाँका खिड़की से तो मैं ऊपर से निचे तक पूरा जल उठा. अन्दर दो नहीं चार लोग सेक्स की मस्ती में थे. माँ बापू के साथ मेरी बहन काजल और पड़ोस का एक अंकल लगे हुए थे. मेरी माँ चारपाई के अन्दर चुदवा रही थी. और उसे पड़ोस का ठरकी अंकल कस कस के चोद रहा था. मेरी बहन को पापा ने अपना लंड चूत में दे के घोड़ी बनाया हुआ था. मेरी तो सांस ही अटक गई. मेरी बहन इतनी बड़ी रंडी की अपने बापू का लंड भी ले ले! और माँ बिना किसी शर्म के बापू के सामने ही पडोसी के बड़े लंड से चुदवा रही थी.

मैं जलने लगा था और मैंने देखा की बहन मस्ती से अपनी गांड को हिला रही थी और बापू का मोटा लंड उसकी चूत में ट्टटों तक पेला गया था. बापू इसकी चिकनी कमर के ऊपर हाथ फेर रहे थे और बोले: आह अह्ह्ह्ह हिला बेटा अपनी कमर को जोर जोर से मुझे अच्छा लगा.

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उधर माँ भी किसी रंडी के जैसे पूरी ऊपर हो के अंकल के लंड को बहार निकालती थी. और फिर जब वो बैठती थी तो उसकी चूत के अन्दर पूरा लंड घुस जाता था. राघव अंकल को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती थी. सेक्स का सारा जिम्मा माँ न अपने ऊपर ही ले रखा था जैसे. वो बस निचे बैठ के माँ की कमर को तो कभी उसके बूब्स को पकड़ के हिलाते थे और दबाते थे. माँ के उछलने से ही चारपाई की किचुड किचुड की आवाजें आ रही थी.

कुछ देर माँ को गोदी में ऐसे उछालने के बाद अंकल ने कहा, चलो पीछे डालूं सोनम.

मेरी माँ खड़ी हुई और वो चारपाई से निचे उतर के फर्श के ऊपर घोड़ी बन गई. माँ ने चुदाई के वक्त अपने कपडे नहीं खोले थे. उसने सिर्फ अपने घाघरे को ऊपर कर लिया था और ऊपर के टॉप को हटा के बूब्स बहार निकाले हुए थे. उसके दोनों बूब्स के बीच में मंगलसूत्र लटक रहा था. माँ की निपल्स एकदम काली थी और बूब्स काफी बड़ी साइज़ के थे.

माँ ने अब पीछे से घाघरे को अपनी गांड के ऊपर कर लिया. अंकल अपने लौड़े को हिलाते हुए उसके पास खड़े हुए. और फिर उन्होंने माँ के हाथ में ही लंड दे दिया. माँ ने अपने हिसाब से लंड को गांड के ढक्कन पर लगा दिया. अंकल ने एक धक्का दिया और आधा लंड अन्दर घुसा.

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