कर्जदार की बीवी से मिला चुदाई का सुख

मैं बोला- भाभी जी, मुझे आपसे बहुत सिम्पैथी है … आपने ऐसे आदमी से शादी कैसे कर ली, जो आपको गंदी गाली देता है और शराबी भी है. आप इतनी अच्छी हो … और पढ़ी लिखी हो.
भाभी जी ने बताया- अरे नहीं सर, वो पहले ऐसे नहीं थे, अभी एक साल से ऐसे हो गए हैं.
मैंने भाभी जी से पूछा- आपके बच्चे कितने हैं?
भाभी जी ने बताया कि बस 3 साल का लड़की है.
मैंने उनसे कुछ देर और इधर उधर की बात की और कहा- अच्छा ठीक भाभी जी … कोई और बात हो, तो बताना.

मैंने कॉल काट दिया और अपने काम में व्यस्त हो गया. फिर 2 दिन बाद रात 11 बजे भाभी जी का कॉल आया.

मैं भाभी जी का नम्बर स्क्रीन पर देख कर बहुत खुश हो गया. मैंने कहा- हैलो.
भाभी जी बोलीं- सर, मैं दीपा बोल रही हूँ.
मुझे अभी मालूम चला कि भाभी जी का नाम दीपा है.

मैं बोला- जी हां बोलिए भाभी जी.
भाभी जी बोलीं- आज वो फिर से शराब पी कर आए और उन्होंने मुझे बहुत मारा और गाली दी. वो बोल रहे थे कि वो मुझे गिरफ्तार करके ले जाएगा, तो ले जाए या फिर तुम जाओ, कहीं से भी पैसा लेकर आओ. मैंने कहा कि मैं कहां से लाऊं, तो बोले कि जाओ … कहीं भी धंधा करो कुछ भी करो … मुझे तो बस पैसा चाहिए.

भाभी जी ने मुझे ये बताया और रोने लगीं.

अब मैं बोला- देखिए भाभी जी … मुझे आपसे सहानुभूति है … मगर मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता क्योंकि मेरे हाथ में कुछ नहीं है. आपके पास सिर्फ 7 दिन हैं.
फिर भाभी जी बोलीं- यदि आप चाहो, तो अभी आप पैसा जमा कर दो ना … और मेरे पति के लिए भी कुछ काम बताओ. यदि मेरे लिए भी काम की जुगाड़ हो, तो मैं भी करने को राजी हूँ.
मैंने सोचा कर बोला- भाभी जी काम तो है … पर क्या आपके पति मान जाएंगे?
भाभी जी बोलीं- आप आकर समझा कर देखना.
उनकी बात पर मैं बोला- ठीक है भाभी जी … मैं आपके घर सुबह आता हूँ.

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अगले दिन मैं उनके घर गया. उनके पति से मिला और उसको खूब अच्छे से समझाया.

उस वक्त तो वो मान गया. फिर मैंने उसके पति को मेरे एक दोस्त के ऑफिस में सुपरवाइजर का जॉब दिला दिया. इस जॉब से उसको 12000 रुपये महीने का काम मिल गया.

दो दिन बाद मैंने भाभी जी को बोला- अगर आप बुरा न माने और आपको गलत न लगे, तो मेरे घर में खाना बनाने का काम करोगी?
भाभी जी झट से मान गईं. मैंने 5000 महीने का बोला, वो राजी हो गईं.

फिर मैं वहां से आ गया. अगले दिन सुबह भाभी जी से कॉल किया और बोलीं- सर मैं आपके मोहल्ले में आ गयी हूँ. आपका घर कहां है.
मैं जल्दी से बाहर आया और उसे देखने लगा. भाभी जी मेरे ही घर के सामने ही खड़ी थीं. मेरे हाथ का इशारा देते ही वो मेरे घर में अन्दर आ गईं.

भाभी जी बोलीं- मैं आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगी, मेरे पति को भी आपने काम में लगवा दिया. अनजान होते हुए भी आपने हमारे लिए सोचा.

इस पर मेरे मुँह से ऐसे ही निकल गया- आपके लिए तो भाभी जी मुझे कुछ भी करना पड़ता, तो मैं कर देता.
ये सुनकर भाभी जी बोलीं- क्या?
मैं बोला- सॉरी … मेरा मतलब वो आपको गाली दे रहा था और आप लोगों की स्थिति खराब देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा … इसलिए मैंने ये बोला.

अब भाभी जी मेरा घर देख कर बोलीं- अरे बाप रे ये सब क्या है … सब इतने फैला हुआ सामान … ये घर है कि कबाड़खाना.
मैं बोला- भाभी जी मैं बैचलर हूँ न, इसलिए ये सब ऐसा पड़ा है.
भाभी जी बोलीं- चलो कोई बात नहीं, मैं सब देखती हूँ.

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मैं नहाने घुस गया, फिर तैयार होकर काम के लिए जाने लगा.

भाभी जी बोलीं- खाना?
मैं बोला- आप आज कबाड़खाने को घर बना दो … खाना शाम को खाऊंगा. आप जब मर्जी हो चली जाना, मेरे पास दूसरी चाभी है, मैं घर खोल लूँगा.

मैं मुस्कुरा कर चला गया. भाभी जी भी हंस दीं. मैंने दरवाजे के लॉक की चाभी उनको दी और चला गया.

मैं ऑफिस में दिन भर भाभी जी के बारे में ही सोचता रहा. उनकी वो कातिल मुस्कराहट मुझे अन्दर तक गरम कर देती थी. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उनको पाने के लिए मेरा मन मचल रहा था.

मैं शाम को 6 बजे घर पहुंच गया. जब मैं घर के अन्दर गया, तो देखा कि घर बहुत सुंदर लग रहा था.

भाभी जी अभी भी काम कर रही थीं. मैं बोला- अरे भाभी जी आप अब तक गयी नहीं?
वो बोलीं- आप खाना खा कर नहीं गए थे … पहले मैं आपको खाना खिला दूं तब जाऊंगी.

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