गर्लफ्रेंड की सहेली की प्यास बुझाई

तो मैंने जया को उसमें सरसों का तेल लगाने को कहा।
जया कमर मटकाते हुए हुए गई और तेल ले आई, आते ही उसने उंगली में ज़रा सा तेल लगाया और उंगली सीधा काजल की गांड में घुसा दी।
काजल चिहुंक उठी। अब जया ने ढेर सारा तेल उसकी गांड में और ऊपर लगा दिया, और मेरे लण्ड पर भी तेल की मालिश कर दी।

अब मेरी बारी थी, मैंने अपना लौड़ा सेट किया और धीरे से धक्का दिया, तो गांड का मुंह खुल गया। अब फिर से धक्का दिया तो एक इंच घुस गया। उधर काजल चिल्लाने लगी। तो जया उसकी चुचियाँ चूसने लगी।

धीरे धीरे जब वो शांत हुई तो मैंने जया को इशारा किया।
जया उसके होठों को चूसने लगी। बारी मेरी थी तो मैंने एक ज़ोरदार धक्का मारा। आधे से ज़्यादा लण्ड घुस गया और उधर काजल छटपटाने लगी, वो ज़ोर ज़ोर से हाथ पटक रही थी, जया के चूसने के कारण चिल्ला नहीं पा रही थी।

उसने काफ़ी कोशिश की अपनी गांड को आगे करके लण्ड बाहर निकालने की, लेकिन मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ रखा था। तो उसकी हर कोशिश बेकार हुई।

धीरे धीरे जब उसने चिल्लाना बन्द किया तो मैंने धीरे धीरे अपना लण्ड आगे पीछे करना शुरू किया, उसकी गांड तंग थी, पर तेल के साथ कम दिक्कत हो रही थी। जल्दी ही उसने मेरा साथ देना शुरू कर दिया और मेरे साथ साथ अपनी कमर हिलाने लगी।

धीरे धीरे मैंने भी रफ़्तार पकड़ ली। हालांकि पूरा लौड़ा अब भी नहीं गया था, पर मैंने कोशिश छोड़ दी, मैं काजल को चोट नहीं पहुंचाना चाहता था।

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जया अब काजल की चूचियाँ पी रही थी और काजल चिल्लाए जा रही थी।

उसकी गांड काफ़ी तंग थी तो मैं भी ज़्यादा देर टिक ना सका, 7-8 मिनट के बाद मैं काजल की गांड में ही झड़ गया।

अब मैं सचमुच थक चुका था, मैं लेट गया। और अब दोनों 69 की मुद्रा में आकर एक दूसरे को चूस रही थीं।
दोनों ने थोड़ी ही देर में एक दूसरे को झाड़ दिया।

हम तीनों ही लेट गए, हम सबको नींद आ ही जाती पर तभी मुझे होश आया और मैंने उन दोनों को कपड़े पहनने को बोला। हम कोई भी खतरा नहीं उठा सकते थे। तो बाथरूम में जाकर हम सबने एक दूसरे को साफ़ किया और वापस आकर कपड़े पहने।

फिर काजल ने दर्द की एक गोली खाई और फ़िर वो दोनों एक कमरे में गईं सोने।

मैं जानबूझकर हॉल में सोफ़े पर ही सो गया। आखिर घरवालों की नज़र में बढ़िया भी तो बनना था।

हुआ भी वही, सुबह काजल की मम्मी और बड़ी मम्मी आईं। मुझे सोफ़े पर लेटा हुआ देखकर मुझे जगाया और फ़िर कहने लगीं- बेटा कमरे में सोना चाहिये था।

मैं- अरे नहीं आंटी, ये ठीक था।
तो वो काजल को डांटने लगीं कि मुझे सोफ़े पर क्यों सोने दिया।
काजल मासूम बनकर बोली- मैंने तो बहुत कहा पर इसे यहीं सोना था तो मैं क्या करूँ।

बस फ़िर क्या था, वही तारीफों का दौर, संस्कारी लड़का वगैरह वगैरह।
मुझे नाश्ता करने के बाद विदा मिली।

अब काजल की मम्मी खुश थीं, काजल और जया बहुत खुश थीं।
और मैं?
मैं तो सबसे ज्यादा खुश था.

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