गांव की मौसी की चुदाई कहानी

मौसी ने अपना लहंगा भी नाभी के नीचे पहना था. थोड़ी मोटी थी और जैसा की मैं कहा मुझे बड़ी उमर की मोटी औरते पसंद है तो मेरे लिए एक दम अप्सरा लग रही थी. मौसी की गहरी नाभी मेरी जीभ को बुला रही थी कि घुस जा नाभी की गहराई मैं. मौसी ने नाश्ता ला कर बगल की मेज़ पर रख दिया. जिसके लिए वो मुड़ी तो उनका मोटा हिलता चूतड़ मेरी आँखो के सामने था. जो की मौसी के घाघेरे पर चिपका हुआ था. मौसी बिस्तर पर मेरे बगल मैं बैठ गयी और मुझे नाश्ता दिया और मैं उनकी छातियों और पेट को घुरते हुए नाश्ता करने लगा. जब नाश्ता ख़त्म होने वाला था तो मौसी ने अपनी चोली मैं हाथ डाल कर कुछ बाहर निकाला और पूछा लल्ला ये क्या है मुझे आज तेरे बिस्तर पर मिला. मौसी के हाथ मैं भाभी की छोटी सी काली कच्छी थी जो कल रात मैने मूठ मारने के लिए यूज़ पुष्ट थी. मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गयी. इसका मतलब आज सुबह चाय देने मौसी कमरे मैं आई थी भाभी नही. मुझसे कुछ बोले नही बना मैं बहुत घबड़ा गया की आज तो मौसी मुझे बहुत माँ रेगी और मेरी खाल उधेड़ देगी. वो मेरे चेहरे को देख कर बोली ये तो तेरी भाभी की कच्छी है ये तेरे कमरे मैं क्या कर रही है लाल मेरे. अब मैने मौसी को सच बताना की ठीक समझा और सोचा मौसी से माँ फी माँग लूँ क्योंकि इसको सब पता चल गया था. शायद माँ फ़ कर दे.

मौसी मैं भाभी की पॅंटी बाथरूम से ले कर आया था. मौसी मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी अब मैं इसको कभी हाथ नही लगाउन्गा माँ मुझे माँ फ़ कर दो . तू अपनी भाभी को इस नज़र से देखता है और उसकी ब्रा पॅंटी को इस काम के लिए यूज़ करता है बोल. प्लीज़ मुझे माँ फ़ कर दो अब ऐसा नही होगा . मैं मौसी से आँख नही मिला पा रहा था. आज जब सुभह मैं तेरे को चाय देने आई क्योंकि तेरी भाभी को कुछ काम था तब मैने तेरे बिस्तर पर ये तेरी भाभी की ब्रा पॅंटी और कुछ किताबे रखी हुई पाई उनको देख कर मुझे अहसास हुआ के मेरा बेटा जवान हो गया और उसकी भी कुछ उमंगे है खेत मैं काम करने के अलावा और उसके शरीर की भी कुछ इच्छाए हैं जो हर एक जवान लड़के ही होती है जो वो पूरा नही कर पा रहा है और अपनी जवानी की इच्छा को दबा रहा है. मौसी के ये शब सुनते ही मैं तो एकदम सकते मैं आ गया की ये क्या कहा रही है और उनकी तरफ देखने लगा. हां मेरे लल्ला आज मुझे पता चला बेटे की जवानी कितनी तड़प रही है. तू अगर अभी शहर मैं होता तो अपनी गर्ल फ्रेंड बना कर उसके साथ संभोग कर के अपनी गर्मी को शांत करता पर तुझे यहाँ अपने खेतो मैं काम करना पड़ रहा है.

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मैने भी आज सोच लिया बेटा क्योंकि तुझे अपने मौसाजी के काम संभालने पड़ रहे है तो तू उनका एक और काम को पूरा कर कह कर वो मेरी ओर देखने लगी. मैने अचरज़ से पूछा वोक्या मौसी.

तेरे मौसाजी का एक फ़र्ज़ अपनी पत्नी यानी की तेरी मौसी की तरफ भी है वो यह कि अपनी पत्नी के जिस्म की भूख को शांत करना और मेरा फ़र्ज़ था अपने पति के जिस्म की भूख को शांत करना. जब तूने अपने मौसाजी के बाकी काम संभाल लिए है तो आज से तू यह काम भी करेगा अपनी मौसी के जिस्म की गर्मी तू शांत करेगा और ये तेरी मौसी भी तुझे अपना पति मान कर तेरे साथ संभोग करेगी. मौसी की बात सुन कर तो मैं हकबका रहा गया. ना जाने कितनी बार सपने मे मैने मौसी मौसाजी को चोदने के बारे मैं सोचा था और आज मौसी खुद कह रही थी मैं उसको चोदु और उसके साथ चुदाई करू. मौसी तुम ये क्या कह रही हो. सच ही तो कह रही

हू बेटा मेरे जिस्म मैं भी आग लगती है उसको भुझाने वाला तो कोई चाहिए और अपने भान्जे से अच्छा प्यार करने वाला किसी को और कौन मिल सकता है. सच मौसी तुम सच कह रही हो मैं तुमको चोद सकता हूँ तुम्हारी चूत मैं अपना लण्ड डाल कर उसको चोद सकता हूँ. मैं इतना उत्तेजित हो गया कि एक बार मैं सब कुछ बोल गया. मौसी मुझे देख कर मुस्कुराइ बेटा तेरी मौसी का तो भोसड़ा है हाँ पर तू मेरा भोसड़ा चोद सकता है

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मेरा लण्ड मौसी की बात सुन कर एक दम टन्ना गया. मैं जाने कब से तुमको चोदने की सोचा करता था तुम तो मेरे लिए किसी अप्सरा से कम नही हो ना जाने कितने बार मैने तुम्हारे बारे मैं सोच कर मूठ मारी है तुम्हारी बड़ी बड़ी चूचियाँ और तुम्हारे मोटे चूतडो को प्यार करने की कल्पना से ही मेरा लण्ड लोहे की तरह खड़ा हो जाता है.

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