दीदी को चोद बन गया बहनचोद

हेल्लो दोस्तो मैं रमण वर्मा आज आपके लिए एक बहुत ही मस्त कहानी ले कर आया हूँ. मुझे उम्मीद है आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी. क्योकि आज मैं आपको बताने वाला हू की कैसे मैं एक भाई से बहेनचोद भाई बन गया.

ये सब मैं आपको अच्छे से डीटेल मे पूरा बताउँगा की कैसे मैं एक सिंपल भाई से बेहेनचोद भाई बन गया.

तो चलिए शुरू करते है.

ये बात आज से 2 महीने पहले की है, जब मैं कॉलेज से 20 दीनो के लिए फ्री हो गया था. मेरे घर मे मैं ,मेरे मम्मी पापा, और मेरी बड़ी बेहेन सोनम है. बड़ी बहन सोनम की शादी हो चुकी है.

उनकी शादी को 2 साल हो चुके थे, वो पहले ही काफ़ी खूबसूरत थी. खैर अब मैं 20 दीनो के लिए एक दम फ्री हो चुका था. इसलिए मम्मी पापा ने मुझे काहा की मैं इस बार अपनी छुट्टिया अपनी बेहेन के घर बिता आउ.

मुझे उनका आइडिया बहुत अच्छा लगा, इसलिए मैं अगले ही दिन अपनी पॅकिंग करके दीदी के घर की ओर निकल लिया. दीदी का घर मेरे घर से करीब 70 की.मी दूर था, मैं सुबह 6 बजे वाली ट्रेन मे बैठ कर उनके घर 9 बजे तक पहुच गया.

जीजू को मेरे आने का पता था, इसलिए वो मुझे लेने आ गये. कुछ ही देर मे हम घर पर आ गये. जीजू मुझे घर के बाहर छोड़ कर अपने ऑफीस के लिए निकल गये. मैने घर की डोर बेल को बजाया.

कुछ ही देर मे दीदी ने डोर ओपन किया, दीदी और मैं काफ़ी टाइम बाद मिले थे. इसलिए उन्होने मुझे देखते ही अपनी बाहों मे भर लिया. मैं तो उनको देख कर ही काफ़ी हैरान था.

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क्योकि दीदी अब पूरी तरह से बदल चुकी थी, उसके बूब्स काफ़ी बड़े हो चुके थे. चेहरा काफ़ी ज़्यादा निखर चुका था, गांड पहले से काफ़ी ज़्यादा बाहर आ गई थी. मैं तो उनके जिस्म को देखता ही रह गया. उनका फिगर शायद कुछ ऐसा था 36-30-38.

पर जेसी भी थी मेरी बेहेन एक दम बॉम्ब बन चुकी थी. मैं अपने मन मे सोच रहा था, की लगता है की जीजू ने दीदी पर अपनी पूरी मेहनत करी है. पूरे घर मे मेरी बेहेन ही गोरी थी.

सच मे मेरे जीजू और उसकी फॅमिली काफ़ी लकी थी, जो उन्हे ऐसी बहू मिली है. दीदी के सुसराल मे सास सुसर और उनका एक देवर. वो और जीजू और उन दोनो की एक प्यारी सी छोटी सी लड़की.

फॅमिली काफ़ी अच्छी थी, मैं आते ही सबसे बारी बारी से मिला. सब ने मुझे बहुत प्यार किया. दीदी ने कुछ ही देर मे मेरे लिए ब्रेकफास्ट तयार कर दिया, मैने ब्रेकफास्ट किया और फिर सबसे बातें करने लग गया था.

फिर दीदी ने मुझे काहा की मैं जा कर सो जाउ. फिर मैं दीदी के रूम मे ही सोने के लिए चला गया. मैं सोने से पहले दीदी के बारे मे सोचने लग गया. मेरा 7 इंच का लंड दीदी को चोदने के बारे मे सोचने लग गया.

मैने पहले कभी ऐसा न्ही सोचा था, पर दीदी का मस्त जिस्म देख कर मेरा लंड पागल हो रा था. मैं पहले ऐसा न्ही था, पर जब से मैने हिन्दी सेक्स स्टोरीस पढ़ना शुरू किया है.

तब से मेरे लिए सारे रिश्ते ख़त्‍म हो गये है, अब मुझे सिर्फ़ एक ही रिश्ता दिखता है और वो है चूत और लंड का रिश्ता. इस रिश्ते मे कभी भी नफ़रत न्ही आती, सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार ही होता है.

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खैर मैने दीदी के बाथरूम मे गया और उनके मस्त जिस्म को सोच कर पहले मूठ मारी और फिर मैं आराम से दीदी के सपने लेते हुए सो गया. फिर मैं शाम को करीब 4 बजे उठा.

मैं बाहर आ कर टीवी देखने लग गया. टीवी देखते हुए 9 बज गये, अब तक जीजू भी अपने ऑफीस से आ गये थे. मैं उनके साथ बैठ कर काफ़ी देर तक बातें करता रहा, मेरी और जीजू की काफ़ी बनती थी.

फिर दीदी ने सब के लिए डिन्नर लगा दिया था, इसलिए हम सब एक साथ बैठ कर डिन्नर करने लग गये. डिन्नर करने बाद अब सोने की बारी थी. दीदी ने मुझे खुद ही कह दिया की आज तू मेरे साथ सो जाइयो.

जीजू ने भी सोचा की आज भाई बेहेन काफ़ी टाइम बाद मिले है. तो एक साथ अकेले मे बैठ कर बातें कर लेगें. फिर वो अलग रूम मे सोने के लिए मान गये. जीजू के मम्मी के पापा अपने रूम मे सोते थे.

जीजू का भाई अपने रूम मे और एक उनके घर मे गेस्ट रूम था, जिसमे आज जीजू ने सोना था. फिर जब सोने के लिए चले गये तो मैं भी दीदी के रूम मे चला गया. मैने उनके रूम मे देखा की वाहा एक सिंगल बेड है.

ये देख कर मैं काफ़ी खुश हो गया, क्योकि आज तो शायद मुझे दीदी को चोदने का आज मौका मिल जाए. मेरा लंड जो सुबह से उनको चोदने के लिए तड़प रहा है. शायद अब जा कर उसे दीदी की चूत की गरमी मिल जाए.

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