छोटी गलती के बाद की और बड़ी गलती

मगर मैं उसके साथ सेक्स करने से बच रही थी, मगर कब तक बचती। दिन ब दिन मेरी अपनी हालत खराब हो रही थी। अब तो मैं भी अक्सर उसके बारे में सोच अपनी चूत और गांड में गाजर मूली लेती, घर में अकेली होती तो उसका नाम पुकार पुकार के उसको चोदने के लिए कहती।

मुझे लग रहा था कि अब मेरे से ज़्यादा दिन अपने पर काबू नहीं रखा जा सकता। पट तो मैं पहले ही चुकी थी उस से इसी लिए उसकी हर ज्यादती को मैं हंस कर सह लेती थी, और उसकी बदतमीजियों में मुझे मज़ा भी आता था। वो हफ्ते में एक दो बार ज़रूर मेरे घर आता, और मैं जितना भी सोच कर रखती के अपने मन को काबू में रखना है, उसकी बातों के जाल में नहीं फंसना, वो जब भी आता मुझे और भी झँझोड़ जाता। मेरे सारे विचार जो मैं सोचती वो तहस नहस कर जाता, उसके जाने के बाद मैं अक्सर गाजर या मूली का सहारा लेती और अपने आप को कोसती कि इतना बढ़िया लंड तेरे सामने था, तो तूने उसे पकड़ा क्यों नहीं।

पर एक बार जब वो हमारे घर आया हुआ था, तो वो किचन में मेरे सामने नंगा हो कर बैठ गया और अपना लंड मुझे हिला हिला कर दिखाने लगा।
मैं भी बार बार उसके तने हुये लंड को देख रही थी और अंदर ही अंदर अपने आप से लड़ रही थी। मगर जल्द ही मैं वो जंग हार गई। मैंने खुद को रोक नहीं पाई और आगे बढ़ कर मैंने उसका लंड सीधे अपने मुँह में ले लिया।
“आह… क्या आनन्द… क्या मज़ा!” मैंने सोचा।

वो बोला- अरे वाह स्वीटी… क्या बात है, मज़ा आ गया यार, चूस अपने यार का लंड!
और वो मेरी पीठ पर हाथ फेरता रहा, और मैंने करीब 2-3 मिनट तक अपनी तसल्ली से उसका लंड चूसा।

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जब मैंने उसका लंड अपने मुँह से निकाला तो मैंने उसको खुद ही कह दिया- तुम कह रहे थे कि तुम्हारे दोस्त का घर खाली ही रहता है, अगर है प्रोग्राम तो बता देना!
वो बोला- तो ठीक है, मैं कल उस से बात करके तुझे बता दूँगा, तू तैयार रहना, फिर चलते हैं वहाँ।

और दो दिन बाद उसने मुझे बताया- कल यानि के बुधवार को हम चलेंगे, मैंने गाड़ी ले कर आऊँगा, तुम मुझे पार्क के पास मिलना, ठीक 11 बजे!

मैं अब खुद सेक्स के लिए इतनी पागल हो चुकी थी कि मैंने उस रात को ही ब्यूटी पार्लर जा कर अपने सारे बदन की फुल वेक्सिंग कारवाई, आई ब्रो बनवाई, फेशियल करवाया, और बाज़ार से आते हुये अपने लिए नई ब्रा और पेंटी भी ले कर आई।

रात को तो मुझे नींद ही नहीं आ रही थी, तरह तरह के ख्याल मन में आ रहे थे। और इन्ही बातों को सोचते सोचते मैं ना जाने कब सो गई।

सुबह बच्चों को तैयार करके उनके स्कूल कॉलेज भेज और उसके बाद सारे घर के काप निपटा कर नहा धोकर मैं पूरी तरह से तैयार हो कर घर से निकली। आज मैंने अपने पति की मौत के बाद पहली बार सुर्ख लाल लिपस्टिक अपने होंठों पर लगाई थी। वरना मैं बहुत ही कम लिपस्टिक लगाती थी, और अगर लगाती भी थी, तो बहुत हल्की सी।

मेरे जाने से पहले ही वो गाड़ी लेकर खड़ा था, मैं जाकर सीधी उसकी कार में बैठ गई। मेरे बैठते ही उसने मुझे एक खूबसूरत गुलाब का फूल दिया और आगे बढ़ कर मेरे होंटों का चुम्बन भी लिया, मैंने भी पूरी मोहब्बत से उसके चुम्बन का जवाब दिया।

उसके बाद उसने कार चलाई और थोड़ी ही देर में हम एक घर में दाखिल हुये। घर में गाड़ी पार्क करके वो मुझे सीधा बेडरूम में ले गया। अंदर सब पर्दे खींचे हुये थे, हल्की रोशनी थी, ए सी ने पूरा कमरा ठंडा कर रखा था।

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कमरे का दरवाजा बंद करते ही वो मुझसे लिपट गया। मैं तो खुद बेताब थी, मैंने भी उसके गले में अपनी बाहें डाल दी।
‘ओ मेरी स्वीटी, मेरी जान…’ और ‘ओह मेरे प्यारे…’ कह कर हम दोनों एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो गए। होंटों से होंठ तो ऐसे चिपके जैसे कभी जुदा होने ही न हो। मेरी सारी लिपस्टिक वो एक चुंबन में ही खा गया।

मेरा दुपट्टा उसने खींच कर फेंक दिया और मेरी मांसल पीठ का मांस अपने हाथों में भर भर कर नोचने लगा। फिर पीठ से आगे आ गया, मुझे धकेलता हुआ बेड पे ले गया और मुझे बेड पे लेटा कर खुद भी मेरे ऊपर लेट गया, मेरे दोनों मम्मों को खूब दबाया।

उसका हर स्पर्श मुझे बहुत बेचैन कर रहा था। मैंने खुद ही उसे अपने ऊपर खींच लिया, फिर से हमारे होंठों की आपस में गांठ पड़ गई। दो बच्चों की माँ मैं ऐसे बेहाल हो रही थी, जैसे आज मेरी ज़िंदगी का आखरी सेक्स हो, फिर मुझे ये सब नहीं मिलने वाला हो।
“बहुत गर्म हो रही हो आंटी!” वो बोला।
मैंने कहा- तुमने मेरे तन मन में वो आग लगा दी है, जिसे मैं बरसों से दबा कर बैठी थी, और अब इस आग में मैं झुलस रही हूँ, मुझे ठंडा करो, मुझे तृप्ति दो।
वो बोला- अरे जानेमन, आज तो तेरी वो चुदाई करूंगा कि तू सारी उम्र याद रखेगी।

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