मेहता आंटी उठीं और नफ़ीसा आंटी का हाथ पकड़ कर मेरी गोद में बैठा दिया और मेरा हाथ उनकी जाँघों पर रख दिया।
नफ़ीसा आंटी सलवार कुर्ते में थीं। मेरा लंड उनकी गाण्ड के ठीक नीचे वाइब्रेट कर रहा था.. जो वो महसूस कर रही थीं।
मैं तीनों आंटियों को तो पहले भी नंगी देख चुका था.. लेकिन नफ़ीसा आंटी को नहीं देखा था।
सविता चाची ने कहा- नफ़ीसा.. छोकरे के कपड़े उतारो।
वो खड़ी हुईं और मेरे शर्ट को और बनियान को उतार दिया।
अब वो मेरी बेल्ट खोलने लगीं, मैंने इसमें उनकी हेल्प की.. तो वो अपनी आँखें ऊपर करके मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दीं।
फिर उन्होंने मेरी पैन्ट की ज़िप और बटन खोल कर खींच कर निकाल दी।
चड्डी के ही अन्दर से मेरे लंड के आकार का पता चल रहा था।
बाकी तीनों आंटियां भी मेरे आस-पास खड़ी होके लंड के बाहर आने का इंतज़ार कर रही थीं और प्यासी लोमड़ी की तरह सब कुछ देख रही थीं।
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