हैलो फ्रेन्ड्स, मेरा नाम राघव है और अभी मैं 23 साल का हूँ। ये उस वक़्त की बात है जब मैं कोटा के एक कोचिंग इन्स्टिट्यूट में पीएमटी की तैयारी कर रहा था। उस वक्त मेरी उम्र 18 साल थी।
मैं उधर एक किराए के मकान में रहता था। मकान में तीन और स्टूडेंट्स रहते थे.
हम सब ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे और फर्स्ट फ्लोर पर मकान-मलिक उनकी बीवी.. जिनका नाम सविता था, रहते थे।
उनका एक लड़का जयपुर के एक कॉलेज में था। उनकी एक लड़की भी थी जो इंटीरियर डिज़ाइनर थी.. उसकी शादी हो चुकी थी।
लैंडलार्ड सुबह ऑफिस जाते और शाम को आते थे.. और सविता चाची दिनभर घर में अकेली रहती थीं।
वो रोजाना सुबह 5-6 बजे नीचे फ्लोर की झाड़ू लगाने आती थीं.. तब मैं सोता रहता था।
सविता चाची 35 साल की थीं.. वो थोड़ी सी मोटी थीं और दिखने में औसत थीं।
सविता चाची ने मुझे नंगा देखा
मेरी आदत थी कि मैं कमरे में नंगा ही सोता था।
एक रात की बात है मैं अपने कमरे में नंगा सो रहा था.. तब लाइट चली गई।
कमरे में बहुत गर्मी हो रही थी.. तो मैंने उठ कर दरवाजा खोल दिया और परदा लगा कर सो गया।
नींद में मैं यह भूल गया कि मैं नंगा ही हूँ.
कुछ देर बाद लाईट आ चुकी थी.. लेकिन मुझे नहीं पता था।
सुबह जब चाची झाड़ू लगाने आईं.. तो उन्होंने मेरा दरवाजा खुला हुआ देखा। उन्हें लगा कि मैं जाग गया हूँ.. इसलिए वो कमरे के अन्दर आ गईं।
उन्होंने मुझे आवाज़ देकर मुझे जगाया और मेरी आँख खुल गई।
उस वक्त कमरे में अंधेरा था.. चाची ने लाईट ऑन की और पीछे मुड़कर देखा तो मैं बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था।
मैंने चाची की तरफ देखा तो चाची मेरी ओर देख रही थीं।
सुबह का वक़्त था इसलिए मेरा लंड बम्बू की तरह खड़ा था। ये सिर्फ़ 1-2 सेकेंड की बात थी.. सविता चाची के हाथ में उस वक़्त झाड़ू थी.. वो झट से पीछे मुड़ीं और परदा को साइड से हटाते हुए कमरे से बाहर चली गईं।
उस दिन फ्लोर का झाड़ू लगाना अधूरा ही रह गया। मैं उस दिन बहुत शर्मिंदा था.. लेकिन मैं मन ही मन खुश भी था क्योंकि किसी औरत ने मुझे आज पहली बार अपनी आँखों के सामने नंगा देखा है।
मैं जल्दी से तैयार होकर कोचिंग के लिए चला गया।
कुछ दिनों तक मैं चाची से नज़रें नहीं मिला पाया।
लेकिन महीने के अंत में मुझे किराया देना था। मैंने लैंडलॉर्ड को पैसे दिए लेकिन उन्होंने कहा- हर बार तो तुम अपनी आंटी को ही तो देते हो.. इस बार भी उन्हीं को दे देना.. क्योंकि मैं हिसाब नहीं रखता।
अब मैं क्या करता.. मजबूर था।
अगले दिन लैंडलॉर्ड की लड़की आई और बोली कि किराया मम्मी को दे देना और मैंने गर्दन हिला दी।
उसी रात को लैंडलॉर्ड और उसकी लड़की दिल्ली चले गए.. उनकी लड़की का कोई इन्टरव्यू था।
घर में चाची अकेली थीं और मैं डर रहा था कि चाची को पैसे कैसे दूँ।
पड़ोसन आन्टियों को नंगी देखा
मैं हिम्मत करके ऊपर गया.. लेकिन ऊपर मुझे कुछ औरतों के हंसने की आवाज़ आ रही थी और उन आवाजों में पॉर्न मूवी की आवाज़ भी शामिल थी।
मैं दबे पाँव दरवाजे की तरफ़ गया। मैंने कान लगा कर सुना.. सच में वहाँ ऐसी ही आवाजें आ रही थीं।