उन्हें लगा कि ये नहीं जागेगा तो एक उंगली से उन्होंने मेरे लौड़े की स्किन को नीचे की ओर खिसका दिया। इससे मेरे लौड़े का सुर्ख लाल टोपा बाहर आ गया।
मेरा लंड फड़क रहा था और मेरी धड़कन बढ़ गई थीं।
उन्होंने मेरे लौड़े से निकली हुई पानी की कुछ बूँदों को उंगली से उठाया और फिर उसे चाट लिया।
बस फिर वो कमरे से निकल गईं।
अगर वो थोड़ी देर और ऐसा ही करती रहतीं.. तो मेरा तो निकल जाता।
उस दिन मैं कोचिंग के लिए नहीं गया। जैसे-तैसे अपने आपको रोका और मुट्ठी नहीं मारी, क्या पता चाची को चोदने का मौका कब मिल जाए।
मैं चाहता तो उसी टाइम चाची को पकड़ सकता था.. लेकिन मैं कुछ और ही चाहता था, मैंने सही टाइम का इंतज़ार किया।
दोपहर को लगभग 1:00 बजे रचना और मेहता आंटी आईं और ऊपर चली गईं।
मैं भी थोड़ी देर बाद ऊपर चला गया।
आंटियों को चोदने की तैयारी
वहाँ पर वही सब कुछ चल रहा था। मैंने अपने मोबाइल से वो वीडियो क्लिप बना ली.. इसी के साथ मैं इन आंटियों को एक साथ कैसे चोदूँ.. इसका तरीका मुझे एकदम दिमाग़ में आ गया।
मुझे पता था कि नफ़ीसा आंटी भी थोड़ी देर बाद आएँगी इसलिए मैंने डोरबेल का कनेक्शन काट दिया और नफ़ीसा आंटी का वेट करने लगा।
थोड़ी देर बाद वो आती हुई दिखाई दीं।
मैं भाग कर ऊपर चला गया। मुझे पता था कि आज डोरबेल नहीं बजेगी तो आंटी अपने आप ऊपर आ जाएंगी।
जो सोचा था वो ही हुआ।
नफ़ीसा आंटी ऊपर आ गईं और मैं दीवार के पीछे छुप गया। नफ़ीसा आंटी ने गेट नॉक किया.. अन्दर से सविता चाची ने पूछा- कौन है?
नफ़ीसा आंटी ने बोला- मैं हूँ नफ़ीसा।
सविता चाची ने पूछा- अकेली हो या और कोई है?
नफ़ीसा ने बोला- सिर्फ़ मैं ही हूँ।
इसके बाद मेहता आंटी ने गेट खोला लेकिन वो नज़ारा देखने लायक था। क्योंकि मेहता आंटी नंगी ही बाहर आ गई थीं। नफ़ीसा और मेहता आंटी आपस में गले मिलीं। मुझे इस ही मौके का इंतज़ार था.. मैं झट से बाहर आया और उन्हें पकड़ लिया।
वो एकदम से डर गईं। मेहता आंटी एकदम से घर के अन्दर भागीं और दरवाजा बंद करने की कोशिश करने लगीं।
मैंने दरवाजे को धक्का दिया और पूरा दरवाजा खोल कर खड़ा हो गया। मैंने अन्दर घुस कर नफ़ीसा आंटी का हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया।
ये सब देख के सारी आंटियों में अफ़रा-तफ़री मच गई और अपने आपको तौलिया.. बेडशीट और साड़ी आदि से ढकने लगीं।
इन सबके बीच में खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा था।
सविता चाची ने बोला- ये क्या बदतमीजी है?
मैंने कहा- रिलॅक्स चाची.. मैं तो सिर्फ़ एंजाय करने आया हूँ। मैं इसके बारे में किसी को नहीं बताऊँगा।
चाची ने कहा- चले जाओ नहीं तो मैं..
मैंने उनकी बात काटते हुए कहा- चाची जी.. मैंने आपकी क्लिप मोबाइल पर बनाई है.. सो प्लीज़ मेरी बात मान लीजिए।
रचना आंटी जो लगभग 32 साल की थीं उन्होंने कहा- अरे सविता कोई बात नहीं.. मान ले बात.. वो किसी को नहीं बताएगा।
अब आंटियां करती भी तो भी क्या करतीं… उनकी पोल तो खुल ही चुकी थी।
सभी आंटियां असमंजस की स्थिति में थीं।
माहौल को खोलने के लिए सबसे पहले रचना आंटी सोफे से उठ कर खड़ी हुईं और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर सोफे पर बैठा दिया।