दिपाली की चुदाई

हाए AV के दोसतो और पयरि सहेलिओ मेरा नाम विक्की मित्तल है और मैने IIT Roorkee से एनगिनीरिनग करनेय केय बद ईम, अहमेदबद सेय मबा किया है और देलहि मेन अपनेय परिवार कि हि एक एक्सपोरत इमपोरत सोमपनी मेन बहुत अस्सह्हि पोसत पर करया करता हून और 7-8 लसस वरशिक सलरी लेय रहा हून। मेरि उमरा 29 वरश है और मैन देखनेय मेन कफ़ि समरत और हनदसोमे हून बुस बोदी थोदि सि बुलकी है परनतु मेरि हेघत 5फ़त 10 इनच होनेय के करन मैन मोता नहि लगता हून। मैनेय अभि तक शदि नहि कि है इस लिये मे पुरे थत केय सथ सौथ एक्स मेन रेहता हून।वैसे भि मैन उ।प। कि एक बहुत हि बदि ज़मिनदार परिवर सेय समबनध रखता हून और मैने सौथ एक्स मेन हि अपना 4 बेद रूम फ़लत खरिद लिया है और मैं पूरि मौज मसति मैन रेहता हून। मैन भि इस्स का रेगुलर पथक हून और सरि कहनिया बरेय धयन सेय पधता हून। मुझे ये लगभग सरि कहनिया ( बुस कुछ एक 10% कहनिया छोद कर) बिलकुल कलपनिक लगति है। मैनेय कुछ पोइनतस निकलेय हैन अगर उन पर गौर किया जये तो आप भि मनगेय कि वोह कहनिया बिलकुल कलपनिक हैन। उन पोइनतस का जिकरा मैन अगलि दफ़ा करूनगा। मैन भि बरा हि रसिक मिजज का हून 15-16 वरश कि अयु से हि चुदै का मजा लेय रहा हून।अब तक मैं 50 सेय जयदा लरकिया चोद चुका हून जिनकि कहनि मैन अप सब को अवशया सुनौनगा और अज मैन अपको अपनि पहलि वलि सुदयि कि कहनि सुना रहा हून।

बत उन दिनो कि है जब मैन एलेवेनथ सलस्स मेन पधता था। हमरेय पदोस मेन एक पुनजबि फ़मिली रहति थि जिसमेय सिरफ़ तीन हे मेमबेरस थे। एक 70 वरशिया बुजुरग, एक लदका और एक लदकि। लदकेय कि उमरा लगभग 24-25 साल कि रहि होगि और लदकि कि उमरा 20-21 साल कि होगि।बुजुरग वयकति उन दोनो के पिता थे और अकसर बिमर सेय हि रहतेय थे जबकि उन दोनो कि मोथेर कि देअथ हो चुकि थि। वैसेय तो उस परिवार मेन 5-6 लदकिया और भि थि लेकिन वो सब कफ़ि उमरा कि थि और सब कि शदि हो चुकि थि और अपनेय पति के सथ अपनि ससुरल मेन हि रहति थि जो कि कभि-2 अपनेय पितजि को देखनेय परिवर केय सथ 2-3 दिन केय लिये अति रेहति थि। हमरा भि उस पुनजबि फ़मिली मेन कफ़ि अना जना था।

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लदकेय का नाम रजेश और लदकि का नम दीपलि था। दीपलि बहुत हि खुबसूरत थि। मैन रजेश को भै सहेब और दीपलि को जिजि कहता था। दीपलि का बदन मनो भगवन नेय सनचेय मेन धल कर बनया हो। गोरा चित्ता रनग हलका गुलबिपन लिये जैसेय कि दूध मेन चुतकि भर केसर दल दि हो। शरिर 36-24-38 सिज़े। चूचि एक दुम सखत और उभरि हुयि और उसकेय चुतद भरि थेय लगता था कि उसकेय चुतद कि जगह दो गोल बदि-2 बल्लस हो। वोह अदिकतर सलवर कुरता पहनति थि और जब चलति थि तो ऐसा मलूम होता था कि दो गेनद अपस मेन रगद खा रहि हो।जब वोह हसति थि तो गलो मेन बदेय पयरेय दिमपले पदतेय थे जिस सेय वोह और भि खूबसूरत लगनेय लगति थि।वोह बोलति बहुत थि और एक मिनुत भि चुप नहि बैथ सकति थि।उसमेय एक खसबत थि कि वोह किसि कि भि चिज मेन कोइ नुकस नहि निकलति थि चहे उसको पसनद हो या ना हो वोह हमेशा यहि कहति थि कि बहुत हि पयरि है। यदि उसको कुच खनेय के लिये दो और वोह उसको पसनद नहि अयि हो पर वोह तब भि उस कि तारिफ़ हि करति कि बहुत हि तसती बनि हैन। इस बत कि हुम सुब हमेशा हि दीपलि कि तरिफ़ किया करतेय थे। हमरि सोलोनेय के सभि उसकेय दीवनेय थे और एक बर बुस उसको चोदना चहतेय थे। मैन भि अकसर सोचता था कि कश मैन दीपलि को चोद सकु और एक दिन ऐसा मोका अ हि गया। सेपतेमबेर का महिना चल रहा था । उस दिन सुनदय कि छुत्ति थि और समय रहा होगा लगभग 11 बजेय सुबहा का। मैन किसि कम सेय अपनि छत पर गया था। हमरि दोनो कि छत अपस मेय मिलि हुयि हैन और छत सेय उनकेय कमरेय और बथरूम बिलकुल सफ़ दिखयि देतेय है। तो उस रोज जब मैन छत पर गया तो दीपलि केय गनेय कि अवज अ रहि थि सो मैन वैसेय हि उनकेय घर कि तरफ़ देखनेय लगा तो मैन चौनक गया कयोनकि दीपलि बिलकुल नुनगि बथरूम मेन पत्रेय पर बैथि थि और तनगेय चौरि कर रखि थि।

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