जावान दीदी की चुदाई सरदार ने की

हेल्लो दोस्तों में आज आप को मेरा नाम नहीं बता सकता क्योंकि यह कहानी कुछ ऐसी हे की मुझे अपना नाम बताने में शर्म आ रही हे. पर मुझे विश्वास हे की आप को मेरी कहानी पढ़ कर मजा आएगा. यह कहानी मेरी बहन मंजू की हे जिसके सर चुदाई का भूत सवार हे.

दोस्तों मेरे घर में में, मेरी बहन और मेरी माँ हे. मेरे पापा बचपन में चल बसे थे. में अपनी बहन से 10 साल छोटा हूँ, जब मेरी बहन 18 साल की हुई तो उसका जिस्म देखने वाला बन गया था. उसके बूब्स और गांड एकदम बहोत बहार आ गये थे, मुझे अभी इतना नहीं पता था की सेक्स क्या होता हे और कैसे करते हे पर मेरी बहन को इसमें बहुत इंटरेस्ट था.

जब हम तीनो रात में बेडपर सोते थे तो मेरी बहन सेक्सी बुक्स पढ़ती थी और अपनी सलवार और पेंटी उतार के अपनी चूत में उंगलिया डाल कर अपनी चूत का पानी निकालती थी. मम्मी को काफी बार इस बात का पता चल जाता था की मंजू रात को यह सब करती हे, पर शुरु में तो मम्मी कुछ बोली नहीं. पर जब मम्मी को पता चला की मेरी बहन पडोस के एक सरदार पर सेट हो गयी हे तो उन्हें उस पर बहुत गुस्सा आया और मेरी बहन का घर से निकलना बंद कर दिया.

वह सरदार हमारे घर के पास ही रहता था और उसकी शादी भी हो चुकी थी, मेरी बहन उसे अब फोन पर बाते करने लगी थी, एक रात की बात हे जब हम तीनो बहार सो रहे थे तो दीदी ने उसे फोन कर के अपने घर बुला लिया, में मम्मी के साथ लेटा सब कुछ देख रहा था. सरदार दीदी के बिस्तर पर आ कर बैठ गये और दीदी के बूब को मसलने लगे, उसने दीदी के सारे कपड़े उतार दिए और दीदी की बूब्स और चूत को मसलने लगा.

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दीदी के मुह से अहह औउ ओह अहह की आवाजे निकलने लगी थी. फिर सरदार दीदी को उठा के बाथरूम में ले गया और इतने में ही मम्मी उठ गयी, फिर वह भी उठकर बाथरूम में गयी तो उनके सामने दीदी और सरदार एक दुसरे से चिपके हुए थे. मम्मी को देख कर सरदार तो भाग गया पर दीदी कहा जाती, फिर दीदी ने उस रात मम्मी से रो रो कर माफ़ी मांग ली. और मम्मी ने उसे आखरी मौका देकर माफ़ कर दिया.

पर दीदी की चुदने की आदत थी और वह ठीक नहीं होने वाली थी. वह कुछ दिन ठीक रही और फिर वह एक हमारे घर से थोड़ी दूर एक मुसलमान लडके पर सेट हो गयी, पहले तो वह लड़का हमारे घर के आसपास चक्कर लगता रहता था और दीदी को देखता था और अब दीदी मुझे साथ ले जाती की वो मार्केट जा रही हे पर वो मार्केट के बहाने से उस लडके से मिलती थी और वह मेरे सामने दीदी को किस करता था.

एक बार शाम को दीदी बहार घूम रही थी और तभी वह लड़का दीदी के पास आया और तब अँधेरा भी हो चूका था और इसलिए उसने दीदी को साइड लिया और अपनी पेंट उतार दीदी को अपना लंड चुस्वाने लगा. दीदी ने मुझे कहा की अगर कोई आये तो बता देना. उस शाम दीदी ने उसका लंड १० मिनिट तक चूसा और जब दीदी वापस आई तो उसके चेहरे पर सफ़ेद पानी जैसा था जिसे दीदी ने अपने हाथो से साफ करके चाट लिया.

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ऐसे ही कुछ दिन निकल गये, शाम होने वाली थी और दीदी घर से गायब हो चुकी थी, मम्मी उसे पड़ोस में ढूंढने लगी थी. फिर मम्मी ने मुझे पूछा की वह कोई नए लडके के साथ घुमती हे क्या? तो मेने उसे उस मुसलमान लडके के बारे में बताया. मम्मी गुस्सा हो गयी और जल्दी दे उसके घर गयी, में मम्मी के साथ था, जब मम्मी ने दरवाजा खोला तो दीदी पूरी नंगी बेड पर लेटी हुई थी और दीदी की चूत में उस लडके के अपना लंड डाला हुआ था.

जैसे ही मम्मी को देखा तो वो डर गया उसने जट से अपना लंड दीदी की चूत से बहार निकाला और उसका लंड बहुत बड़ा था और खून से भरा हुआ था, मम्मी ने दीदी को थप्पड़ मारे और उसके कपड़े पहना कर खीच कर घर ले आई, दीदी से ठीक चला भी नहीं जा रहा था उसकी सलवार खून से भरी हुई थी.

घर आते ही मम्मी ने उसे रूम में बंद किया और उसकी पिटाई करने लगी, में बहार बैठा मम्मी की बात सुन रहा था. जहाँ तक मुझे याद हे मम्मी बोल रही थी की करम जली तुजे मैंने क्यों जन्म दिया, तू तो रंडी निकली कुत्ती कहिकी. इतनी को गली की कुत्ती नहीं चुदती जितनी तू चुदती हे. तूने तो अपना मुह काला कर लिया अब मेरा मुह काला करने में तुली हुई हे.

दीदी बोली की मम्मी आब आप प्लीज़ चुप करो मुझे बहुत दर्द हो रहा हे.

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