Tag «hindi sex kahaniya»

जेत्जी से चुदवाने को तैयार

मेरी बात सुन कर माया मुझसे लिपट गयी और बोली, “आपने मेरे सर पर बड़ी ही जिम्मेवारी दी है। मैं इसे दिलोजान से पूरी करने की कोशिश करुँगी। आपने पहले मुझे नौकरानी से जेठानी बनाया और अब जेठानी से आगे बढ़ कर सौतन बना दिया। सौतन शब्द बोलने में शायद बुरा लगता होगा, पर हम …

सेठी साब की दमदार चुदाई

मैंने फ़ौरन भाभी का सर अपनी छाती पर लगा कर मेरा एक स्तन भाभी के मुंह में दिया और बोली, “भाभी सा, यह सच है की मैं सेठी साहब के वीर्य से माँ बनना चाहती हूँ। सेठी साहब की पत्नी सुषमाजी को सेठी साहब के वीर्य से बच्चा नहीं हो रहा। सुषमा जी को कैसे …

मा के बाद अब आंटी की बारी

मेरे प्यारे पाठकों, मेरी कहानी के दूसरे भाग में आपका स्वागत है, कहानी के पहले भाग को पढ़ना सुनिश्चित करें क्योंकि इसे वहीं से जारी रखा गया है। धन्यवाद, अब शुरू करते हैं… इसलिए, चूंकि मेरे चाचा बस पर चढ़ते समय फिसल गए थे, हमें उन जगहों को बदलना पड़ा जहां हम सोएंगे। इसलिए नई …

भाभी की छोटी सी चूत मे सेठी साहब का बड़ा लंड

मैंने सेठी साहब को भाभी को चोदना शुरू करने से रोका। मेरे पास इसी काम के लिए इस्तेमाल हो ऐसे तेल की एक बोतल थी। मैं उसे बड़ी चुप्पी से याद रख कर अपने साथ मायके ले आयी थी, क्यूंकि मुझे डर था की कहीं सेठी साहब का मन करे मेरी गाँड़ मारने का तो …

मेरी भाभी मेरे प्रेमी की दीवानी

मैं नहा कर तैयार होने के लिए बाथरूम में गयी। मैं नहा कर तौलिया पहन कर बाहर निकल ही रही थी की मुझे भाभी की दस्तक बाथरूम के दरवाजे पर सुनाई दी। भाभी ने बताया की वह चाय नाश्ता ले कर आयी थीं। मैंने बिना सोचे समझे हड़बड़ाहट में जब आधा दरवाजा खोला तो भाभी …

बदलते रिश्ते और भरपूर चुदाई

यह कह कर सुषमा बिना कोई चिंता के मेरे ऊपर मरे बदन को अपनी नंगी करारी टाँगों के बिच में ले कर मेरे ऊपर सवार हो गयी और अपनी चूत को मेरे लण्ड के करीब लाकर मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत की पंखुड़ियों के केंद्र बिंदु पर सटा दिया। सुषमा अब मुझे चोदने …

kamukta भाजी वाला के साथ सेक्स किया

मैं शेला, 5.3”. 40-34-40 का पुष्ट जिस्म, पति ज़्यादातर बाहर रहते हैं, पर मेरा हट्टाकट्टा नौकर शामू मेरे घर में ही रहता है, सो मैं अपने नौकर शामू से चुदवाकर मस्त रहती हूँ। आजकल भी पति बाहर गये हुए हैं पर इसी समय इस हरामखोर शामू को भी गाँव जाना था सो शामू गाँव चला …

मुझे गन्दा गन्दा लगता है !

बात उन दिनों की है जब मैं अट्ठारह साल की थी, पढ़ाई में अच्छी नहीं थी इसीलिए दसवीं कक्षा में थी। मेरे दोस्त बड़े बड़े थे अक्सर क्रिकेट खेलते थे… दोस्त से मेरा मतलब था लड़कों से लड़कियाँ मुझसे शुरू से नापसंद थी… बहुत पढ़ाकू और एक नंबर की स्वार्थी होती है लड़कियाँ ! हमेशा …


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