शादी से पहले बुआ की चुदाई

अब शादी वाला घर था, तो कोई न कोई आस-पास होता ही था. इस समय कुछ भी करना इतना आसान नहीं होता. हम दोनों इशारों में बात करने लगे. मैं कभी बुआ को आंख मारता, तो वो शर्मा जातीं. कभी वो भी मुझे फ्लाइंग किस कर देतीं. मतलब अब हम दोनों ही एक दूसरे की प्यास को समझ गए थे.

इसी तरह 6-7 दिन बीत गए और इस बीच हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब आ गए. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैंने शीला बुआ को इशारे में कहा- मुझे आपसे मिलना है.
वो भी मेरा इशारा समझ गईं. वो मुस्कुरा दी.
मैं अपने घर की छत पर गया. वो भी मेरे पीछे पीछे छत पर आ गईं.

मैंने शीला बुआ से कहा कि मुझे आपसे काम है … अकेले में मिलना है.

बुआ बोलीं- इधर ही बोल न … क्या कहना है.
मैं- यहां नहीं … बिल्कुल अकेले में, जहां सिर्फ मैं और आप ही हो.
बुआ- ऐसा क्या काम है दूल्हे राजा?
मैं- आप अकेले में मिलोगी, तो बताऊंगा.

बुआ शायद मेरे इरादे भांप गयी थीं- चल बदमाश, अकेले में तू अपनी दुल्हन से मिलना … चल अभी कोई आ जाएगा.
ये कह कर वो जाने लगीं.
मैं थोड़ा उदास होते हुए बोला- शादी से पहले एक बार मिल लो प्लीज.
बुआ- बाद में बताती हूँ. अभी चल यहां से.

मैंने बुआ से वादा ले लिया था. बुआ ने भी वादा किया था कि अभी चल, मेरे शैतान भतीजे … तुझे जो चाहिए वो मिल जाएगा.
बुआ के मुँह से ये सुनते ही मैं खुश हो गया. शायद वो भी मेरी तरह चुदवाने के लिए बेकरार थीं.

अब हम दोनों नीचे आ गए. मैं सारे रिश्तेदारों के बीच से नजर बचा कर उनसे मिलना मुश्किल था. लेकिन फिर भी मुझे उनसे मिलना तो था ही.

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उसी शाम को शीला बुआ ने मेरे फ़ोन पर कॉल किया और हमारी बात हुई.
शीला बुआ ने कहा- एक तरीका है.
मैंने पूछा- बोलो कैसे?
बुआ- तू शहर से कुछ सामान लाने का बहाना बना दे और बोल दे कि मैं तेरे साथ चल रही हूँ.
मैं- फिर?
बुआ- सब लोग अभी गांव आए हुए हैं. शहर वाले घर पर कोई नहीं है.

मैं आगे की कहानी समझ गया. बस फिर क्या था. मैंने पिताजी से शाम को ही बात कर ली. मैंने पिताजी से कहा कि मुझे मेरे एक दो दोस्त को शादी का कार्ड देना है … तो जयपुर जाना है.

पिताजी ने कहा कि अकेले कैसे जाओगे … तुम नहीं जा सकते.
मैंने तपाक से बोल दिया कि शीला बुआ को भी जयपुर काम है, तो वो भी आ रही हैं.

बस फिर क्या था, पिताजी मान गए.

फिर अगले दिन सुबह बहुत अच्छे से तैयार हुआ और कार लेकर सीधे शीला बुआ के घर पहुंच गया.
मैंने कॉल करके बोला- जल्दी बाहर आ जाओ.
बुआ- बस अभी आयी दूल्हे राजा, थोड़ा सब्र करो.
मैं- बस वो ही तो नहीं हो रहा.
बुआ- चल शैतान.

फिर बुआ बाहर आईं. हल्के से लाल रंग की कुर्ती और काली लैगी में … खुले बाल और लाल लिपस्टिक उफ्फ … मेरी सपनों की परी ने तो मुझे मार ही डाला.

मैंने जैसे तैसे खुद को संभाला और शीला बुआ गाड़ी में आकर बैठ गईं. मैं कुछ देर तक उनको निहारता रहा.
शीला बुआ चुटकी बजाते हुए बोलीं- दूल्हे राजा चलो.
मैंने कहा- आपके गाल पर कुछ है. जरा इधर आना तो.

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शीला बुआ मेरी तरफ को झुकीं, तो मैंने उनके गाल पर चूम लिया. फिर कुछ कहे बिना गाड़ी चलाने लग गया. वैसे तो बुआ मुझसे खुल कर बात करती हैं … लेकिन वो थोड़ी शर्मीली भी हैं. इसलिए चुम्बन से वो थोड़ी सी शर्मा गईं.

अब तो बस शीला बुआ के घर पहुंचने की देरी थी. रास्ते में मैंने बुआ की बहुत तारीफ की.
मैंने शीला बुआ से ये भी पूछा कि क्या आपका बॉयफ्रेंड है?
उन्होंने कहा कि हाँ है.
मैं- उसके साथ कुछ किया है कभी?
बुआ ने थोड़ा शर्माते हुए कहा- हाँ.
मैं- कहाँ?
बुआ- शैतान … गाड़ी चला.
मैं- बताओ न.
बुआ ने शर्माते हुए कहा- होंठों पर प्यार किया था … बस अब तू और नहीं पूछेगा.
मैं- और ‘उसका..’ क्या किया?
बुआ ने शर्माते हुए कहा- तू घर चल, तेरी खबर लेती हूं.

ऐसे ही बातों बातों में हम दोनों घर आ गए.

बुआ ने दरवाजा खोला. हम दोनों अन्दर आ गए. अन्दर आते ही दरवाजा बंद कर दिया और जैसे ही दरवाजा बंद हुआ. मैंने बुआ को पीछे से पकड़ लिया और दरवाजे के सहारे लगा कर उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

बुआ थोड़ी सी सहम गईं, लेकिन जल्द ही समझ गईं. मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया और जोर से सीने से लगा लिया.
मैंने कहा- आई लव यू.

मैं उनकी गर्दन और गाल, आंख सब जगह किस करने लगा. बुआ भी आंखें बंद करके मेरा साथ देने लगीं.
बुआ ने भी आई लव यू टू कहा.

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