परिवार मे चुदाई – ये कैसा ससुराल

चुदने को तैयार हमारी डॉली
दीपक ने उठ कर डॉली को पटक दिया और डॉली के ऊपर चढ़ कर उसकी चूत में अपना लंड जल्दी जल्दी पेलने लगा.
“आह… आह.. जल्दी करो मेरे राजा मम्मी पापा जाग रहे हैं….पेलो पेलो ..”
थोड़ी ही देर का दीपक का लंड फूल कर डॉली की चिकनी एवं गरम चूत में पिचकारी छोड़ने लगा. डॉली भी बहुत जोर से अपने चूत का पानी छोड़ने लगी.
“ये ले मेरी जान …मेरा लंड ..इस की क्रीम अपनी चूत. में ले ..ए …ए ….” कहते हुए दीपक डॉली की चूत में झड गया.
डॉली भी इस चुदाई के मजे से झड गयी.
“चलो अब चाय पी लें.” डॉली ने हँसते हुए बोला.
और वो दोनों अपनी शादीशुदा जिन्दगी की सुबह कि पहली चाय साथ में पीने लगे.
उधर राजेश्वारी देवी अपने पति राजनाथ के संग चाय कि चुस्कियां ले रहीं थी. घर में नया मेहमान आया है इसकी खुशी उन दोनों को थी.
अगले एक हफ्ते के अन्दर सारे मेहमान अपने घर चले गए. और घर में जीवन सामान्य दिनचर्या में चलने लगा. दीपक सुबह जल्दी काम पर निकल जाता था और शाम को अँधेरा होने के बाद ही वापस आता था. पर रात में दोनों जम के जवानी के खेल खेलते थे.
कैसे कैसे लगभग एक साल गुज़र गया पता ही नहीं चला.
एक दिन दोपहर में घर का काम करने के बाद डॉली को समझ नहीं आ रहा था कि शाम को खाने में क्या बनया जाए. वो सास से ये पूछने के लिए उनके कमरे कि तरफ जाने लगी. जैसे ही उसकी सास सुजाता देवी का कमरा करीब आ रहा था वहां से कुछ अजीब सी आवाजें आ रहीं थीं. उसे लगा सासू माँ कोई टीवी सरियल देख रही हैं. उसने रूम का दरवाजा खोल दिया. अन्दर का नज़ारा देख कर उसके हालत फाख्ता हो गयी. उसकी सास सुजाता देवी अपने घुटनों के बल हो कर पर कुतिया के पोस में बिस्तर पर थीं. पीछे से उसके ससुर उनकी चुदाई कर रहे थे. सासू माँ अपनी गोरी और मोटी गांड ऊपर उठा उठा कर लंड अपनी चूत में ले रही थीं. आह आह कि आवाजें पूरे कमरे में गूँज रहीं थीं. हर धक्के पर गांड पर पक पक की आवाज आती थी सासु मन के बड़े बड़े मम्मे हवा में झूल से जाते थे. कमरे में लाइट पूरी नहीं जल रही थी और खिड़की के परदे भी बंद थे इसलिए सारा दृश्य डॉली कि साफ़ नहीं दिख रहा था. वो डर था कि अगर सास ससुर ने उसे इस समय देख लिया तो सबकी स्थिति थोडा खराब हो जायेगी. इस लिए डॉली दबे पाँव उस कमरे से बाहर निकल आयी.
उसके पैरो में एक अजीब सी झुरझुरी हो रही थी. अन्दर कि चुदाई को देख कर उसे लग रहा था कि काश दीपक यहाँ होता. वो लिविंग रूम में आ कर सोफे पर बैठ गयी. उसने टेबल पर से एक गृहशोभा उठाई और पढने के लिए जैसे ही पेज पलटती. उसने देखा उसके ससुर सामने के सोफे पर बैठ कर अखवार पढ़ रहे हैं. उसके मुंह से चीख निकल गयी. वो डर के मारे एकदम से खडी हो गयी. ससुर ने उसे देखा.
“क्या हुआ बहु. तुम इतना डरी डरी क्यों हो… क्या हुआ?” ससुर ने पूछा.
“पापा जी वो उधर …उधर …” डॉली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले.
वो सासु मन के कमरे की तरफ देख रही थी. और जैसे काँप रही थी.
“आप तो मम्मी जी के साथ थे न?……” डॉली हकलाते हुए बोल रही थी.
राजनाथ को समझ में आ चुका था की डॉली ने उनकी पत्नी सुजाता को उनके भाई कैलाशनाथ के साथ रंगरेलियां मनाते देख लिया है. राजनाथ और कैलाशनाथ ने शुरू से अपने बीच में कोई पर्दा नहीं रखा, जवानी में नौकरानी से ले कर कॉलेज में रत्ना तक,जब भी किसी एक को चूत मिली तो उसने दुसरे के साथ मिल बाँट कर उसे चोदा. यहाँ तक शादी कि सुहागरात तक में दोनों नयी दुल्हन के साथ रहे. और आज भी दोनों एक दुसरे के घर जा कर एक दुसरे कि पत्नियों को नियमित रूप से चोदते थे.
राजनाथ को पता था कि डॉली सारा दिन घर पर रहेगी तो किसी न किसी दिन उसे पता तो चलेगा ही. इसी लिए उन्होंने योजना बना रखी थी कि डॉली को थोड़े दिन में किसी प्रकार से अपनी इन गतिविधिओं में शामिल कर लेंगे. पर आज अचानक से यह स्थिति आ गयी तो उन्हें लगा कि अब वो दिन आ गया है.
उसने डॉली का हाथ पकड़ लिया और पूछा,
“उस कमरे में कुछ भूत है क्या? आओ चल कर देखते हैं बेटी.”
डॉली इस सब बातों से अनजान थी. पर वो नहीं चाहती थी कि उसकी सास कि उसके ससुर इस अवस्था में देखे.
“नहीं पापा जी…कुछ नहीं हैं” वो बोली.
“अरे नहीं बहूँ. डर का हमेशा सामना करना चाहिए.” कहते हुए राजनाथ अपनी बहु को लगभग खींचता हुआ कमरे के अन्दर ले गया.
सुजाता देवी अपनी पीठ पर सीधा लेती हुईं थीं. उनके दोनों पैर हवा में थे. और कैलाशनाथ अपना मोटा लंड उनकी चूत में अन्दर बाहर पेल रहा था. चूत गीली थी हर झटके में चपर चपर की आवाज आती थी.
डॉली शर्म के मारे वो सब देख नहीं पा रही थी. अगर उसके ससुर ने उसका हाथ नहीं पकड़ रखा होता तो वो वहां से भाग ही जाती. पर उसकी हैरानी उस समय दुगुनी हो गयी जब उसने अपने ससुर मुस्कराते हुए देखा.
“कैलाश भाई, और जोर से पेलो अपनी भाभी को. जरा हमारी बहू भी तो देखे की हम लोग भी किसी जवान लड़के से कम नहीं हैं.”
जब राजनाथ ये बोले, तब जा कर सुजाता देवी और कैलाशनाथ को पता चला कि कमरे में और दो लोग हैं. दोनों ने राजनाथ की तरफ देखा और मुस्करा दिए. उनके चुदाई के काम में को भी रुकावट नहीं आयी.
डॉली अब थोडा थोडा समझ गयी कि मामला थोडा पेंचीदा है. पर उसकी समझ में ये गया कि सास ससुर खुल कर जीवन का आनंद लेते हैं. ससुर ने अपने दुसरे हाथ से अपना लंड पतलून से बाहर निकाल लिया. और डॉली का हाथ अपने लंड पर रख दिया.
डॉली तो मानों चौंक उठी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कुछ हो रहा है, पर ये सब देख कर उसकी चूत थोड़ी गीली सी हो गयी थी. उसने सोचा कि अगर वो इस कमरे से जबरदस्ती भाग गयी, तो उसके सास ससुर उसे परेशान करेंगे. उसके बारे में पता नहीं क्या कुछ दीपक के कान भर के उसे घर से निकलवा दें. उसने खुद को हालात के ऊपर ही छोड़ देना उचित समझा.
वह नीचे देख रही थी. उसका हाथ उसके ससुर ने जबरदस्ती खींच कर अपने लंड पर रखा हुआ था. डॉली ने अपना हाथ से धीरे धीरे ससुर के लंड को सहलाने लगी. ससुर का लंड खड़ा हो चुका था. वो डॉली को लेकर बिस्तर के कोने में बैठ गया. उसकी पत्नी और उसका भाई अभी चुदाई कर रहे थे और बिस्तर हर झटके पर हिल रहा था. राजनाथ ने डॉली का ब्लाउज और ब्रा उतार दिए और उसकी गोल गोल चुंचियां सहलाने लगे. डॉली एक दम गरम हो चुकी थी. ससुर ने उसे नीचे बैठा दिया और अपना खड़ा लंड उसके होठों पर लगा दिया. डॉली ने ससुर का इशारा समझते ही उनका लंड मुंह मने ले लिया और उसे धीरे धीरे चुभलाने लगी. ससुर जी बहु के मुखचोदन करने लगे. थोड़े देर डॉली के मुंह का आनंद लेने के बाद उन्होंने डॉली को सुजाता देवी के बगल में लिटा दिया.
“देखो तुम्हारी सास पूरी नंगी है, इस लिए तुम्हें भी नंगा होना पड़ेगा बहूँ”, राजनाथ बोले.
डॉली के रहे सहे कपडे भी दो मिनट में उतार फेंके. दोनों हाथों से उसकी टाँगे चौडी कि और डॉली की चूत कि फाँकें चाटने लगे. डॉली गहरी सीत्कारें भर रही थी. इसी बीच उसकी सासू माँ उसकी चुंचियां दबाने लगीं. राजनाथ अपनी जीभ से डॉली कि चूत जो चोदने लगा. डॉली थोड़ी ही देर में झड गयी.
राजनाथ उठ कर बैठ गया. उसने अपना लंड डॉली कि चूत के मुहाने पर टिकाया और एक जहतक लगाया. आधा लंड डॉली कि चूत में घुस कर जैसे अटक सा गया. डॉली निहाल हो उठी. ससुर ने दुसरे ही झटके में पूरा का लंड अन्दर पेल दिया.
इसी बीच कैलाशनाथ और सुजाता देवी कि चुदाई जोर पकड़ गयी थी. थोड़ी ही देर में दोनों झड गए.
राजनाथ ने डॉली को चोदना चालू कर दिया. कैलाशनाथ और सुजाता उसके अगल बगल बैठे थे. सुजाता उसकी चुन्चिया चूस रहीं थीं. कैलाशनाथ ने अपना लंड डॉली के मुंह में दे रहा था. डॉली को बड़ा अनद आ रहा था. एक लंड उसके मुंह कि चुदाई कर रहा था और दूसरा लंड उसकी चूत नाप रहा था. ऊपर से सास उसकी चुंचियां पी रही थीं. वह अपने ऊपर हो रही इस सारी कार्यवाही को बर्दाश्त न कर सकी और झड गयी. पर ससुर का लंड तो अभी भी ताना हुआ था और वो एक जवान छोकरे की तरह उसके पेले जा रहा था.
थोड़ी देर में ससुर ने उसको पलट के कुतिया के पोस में खड़ा किया. और खुद आ गया उसके मुंह के सामने.
“लो बहु थोडा मेरा लंड चुसो. अब मेरा भाई कैलाशनाथ तुम्हारी लेगा”
डॉली समझ गयी थी कि आ उसकी जम के चुदाई होने वाली है. और उसने वो स्थिति का पूरा फायदा उठाना चाहती थी. उसने गपाक से ससुर का लंड अपने मुंह में ले लिया. अपनी ही चूत के रसों से सना हुआ लंड चाटना थोडा अजीब तो लगा, पर यहाँ तो सब कुछ अजीब ही हो रहा था. वो लंड चूसने में इतना तल्लीन थी कि जैसे भूल ही गयी कि एक और लंड उसकी खैर लेने के लिए मौजूद है. उसने अपनी चूत के मुहाने पर कुछ गरम और टाइट सा महसूस हुआ. उसने अपनी गांड को उठा कर जैसे कैलाशनाथ के लंड को निमंत्रण दिया. कैलाश ने अपना लंड पूरा का उसकी चूत में समा कर गपागप उसे चोदने में बिलकुल देर नहीं लगाई.
बड़ा ही रंगीन नज़ारा था. सुजाता देवी बिस्तर पर नंगी खडी हुई थीं. उनके पति राजनाथ बिस्तर पर बैठ कर उनकी चूत चाट रहे थे. उन दोनों कि बहू डॉली कुतिया के पोस में राजनाथ का लंड चूस रहीं थीं. राजनाथ के भाईसाहब कैलाशनाथ पीछे से डॉली कि चूत में अपना आठ इन्ची हथियार पेल पेल कर उसे जीवन का आनंद प्रदान कर रहे थे.
डॉली ने महसूस किया कि उसके मुंह में ससुर जी का लंड फूल सा गया है. वह उसे और प्रेशर लगा के चूसने लगी. ससुर डॉली के मुंह में झड गए. लगभग इसी समय डॉली कि सास सुजाता अपने पति से चटवाते हुए झड गयीं. डॉली भी झड रही थी. और एक मिनट बाद ही कैलाशनाथ ने अपने लंड को चूत से निकाल लिया और डॉली कि गांड के ऊपर झड गए.
सारा परिवार इस चुदाई कि प्रक्रिया से थक चुका था. चारो लोग बिस्तर पर नंगे ही सो गए.
उस शाम डॉली मन ही मन ये सोच कर परेशान थी कि जब उस का पति शाम को घर आएगा तो उसका सामना कैसे करेगी. आज दोपहर के घटनाक्रम के दृश्य उसकी आँखों के सामने बार बार घूम जाते थे. उसका सासु माँ के कमरे के कार्यक्रम का गलती से देख लेना, उसकी ससुर का उसको चोदना, चाचा जी का उसको कुतिया बना कर चोदना, चाचा जी की सासू माँ से चुदाई, सासु माँ का खड़े हो कर ससुर जी से चूत चुस्वाना सब बार उसकी आँखों के सामने घूम जाता था. वो इस बात से बड़ी हैरान थी कि उसे ये सब अच्छा लगा था. बात तो साचा है चुदाई का कोई न दीं है ना धर्म. लंड में चूत घुस कर की चूत की मलाई बनाता है, तो लंड और चूत धारकों जीवन का आनंद प्राप्त होता है.
रोज की तरह दीपक शाम को कम से लौटा. डॉली अपनी दिन की हरकत से इतनी शर्मिंदा थी कि जैसे ही उसने दीपक की मोटर साइकिल की बात सुनी, वो घबरा कर बाथरूम में घुस गयी. बाथरूम में बैठ कर अपने मन को शांत किया और जब वो पूरा संयत हो गयी बाहर निकली. दीपक सासु माँ के कमरे में था. वो जैसे ही उनके कमरे में घुसी, दोनों अचानक चुप हो गए. दीपक डॉली की तरफ देख रहा था. डॉली को तो जैसे काटो तो खून नहीं था. उसे लगा कि उसके सास ससुर कोई गेम खेल रहे हैं उसके साथ. दीपक उसकी तरफ देख कर मुस्कराया.
“मैं चाय बनाती हूँ आप के लिए”, डॉली ने जैसे तसे कहाँ और कमरे से जल्दी से बाहर निकल गयी.
उसे जाने क्यों लगा कि उसके पति और उसकी सासु माँ उसकी घबराहट को देख कर हंस रहे हैं. पर उसने जैसे खुद को बताया कि ये उसका वहम है.
वो शाम डॉली के लिए बड़ी भारी थी. रात जब वो बिस्तर पर गयी, दीपक उसके बगल में लेट कर मंद मंद मुस्करा रहा था. डॉली ने आखिर पूछ ही लिया.
“क्या बात है जी, आज जब से आयें हैं घर बड़ा मुस्करा रहे हैं”
“अरे ऐसी कोई बात नहीं है”, दीपक बोला.
दीपक ने उसकी चुंचियां मसलना शुरू कर दिया. और दुसरे हाथ से उसकी चूत को उसके गाउन के ऊपर से ही रगड़ने लगा. डॉली आज की तारीख में दो दो मर्दों से चुद चुकी थी. पर उसके पति कि पुकार थी इस लिए चुदना उसका धर्म था. उसने झट से अपना गाउन उतार फेंका. दीपक ने देखा कि उस की प्यारी पत्नी डॉली ने आज गाउन के अन्दर न ब्रा पहनी हुई है न पैंटी. वो एक बार फिर मुस्कराया.
दीपक डॉली के गोर और नंगे बदन के ऊपर चढ़ गया. लंड तो खड़ा था ही और डॉली की चूत भी गीली थी. तो लंडा गपाक से घुस गया.
“आह …उई माँ …मई मर गयी …” डॉली अचानक अपनी चूत पर ही इस हमले पर हलके से चीख उठी.
“क्यों क्या हुआ …” दीपक ने पूछा, वो अभी भी मुस्करा रहा था.
“क्या पापा और चाचा जी का लंड खाने के बाद मेरा लंड अच्छा नहीं लगा आज रात?” दीपक ने पूछा.
डॉली को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था. तो क्या दीपक को शाम से ये सब पता था. और अगर उसे ये सब पता है फिर भी वो शाम से हंस रहा मुस्करा रहा है. और तो और वो उसे प्यार भी कर रहा है.
“क्या मतलब…” दीपक के लंड के धक्के खाते खाते वो इतना ही बोल पायी.
“अरे डॉली रानी मुझे आज तुम्हारी दिन कि सारी करतूत पता है…” दीपक हंस रहा था और दनादन चोद रहा था उसे.
डॉली को ये सब सुन कर एक अजीब तरह की अनुभूति हुई. उसे अपनी चूत में जैसे कोई गरम लावा सा छूटता हुआ महसूस हुआ. दीपक का लंड भी अब पानी छोड़ने वाला था. दोनों थोड़ी देर में ही झड गए.
दीपक उसके बगल में ढेर हो गया. डॉली अभी भी बड़ी कन्फ्यूज्ड थी.
“क्या तुम्हें मम्मी जी और पापा जी ने कुछ बताया है” डॉली ने पूछा.
दीपक ने उसे बताया कि उसे सब पता हुई. दीपक के परिवार में सब लोग आपस में काम क्रिया का आनंद लेते थे. पहले ये सब खुले में होता था. जब से दीपक डॉली का विवाह हुआ, ये सब छुप के हो रहा था. पर आज जब डॉली ने ये सब देख लिया, जैसा कि पहले से प्लान था, उसे इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया.
“चलो अच्छा हुआ जो हुआ, देर सबेर तुम्हें ये सब पता चलना ही था. उससे अच्छा ये हुआ कि तुम अब इस परिवार के इन आनंद भरें खेलों में शामिल हो गयी हो मेरी रानी.” दीपक ने शरारत भरी अदा से बोला.
“मुझे तो अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि एक ही परिवार के लोग आपस में ऐसा कर सकते है”, डॉली अभी भी हैरान थी.
“तुम्हारा सोचना भी जायज़ है. पर सेक्स इतना आनंद भरा काम है. जरा सोचो ये सब बाहर के लोगों से करना थोडा खतरे वाला काम हो सकता है. इस लिए हमारे परिवार में हम इतनी आनंददायक चीज को आपस में करते हैं.” दीपक ने बोला.
“पर फिर भी सोच के अजीब सा लगता है”, डॉली बोली.

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