सासु को ससुराल में चोदा

जोरदार झटके मारता जाता ! मंजू ने मेरी कमर पर हाथ रखकर मेरे चूतड़ों को आगे पीछे करने में मदद करने लगी मैं मंजू की जीभ, चूची को बीच बीच में चूसता जाता अब मंजू मुँह से जोर जोर से उउउउ आआह्ह्ह्हाह्ह्हआह्ह्ह स्स्स्स्स्स्स्स्स आअह आआह्ह की आवाज आने लगी मंजू का चेहरा लाल सुर्ख पड़ गया मंजू ने अपना मुह फाड़कर कही मुह से सीटी लगाने लगती उउउउ आआह् ह्ह्हाह्ह् हआह्ह् ह स्स्स्स्स् स्स्स्स करती जाती मैं लण्ड की जोरदार वारि करने लगा उधर बाहर जोर जोर से वारिस होने लगी वारिस तड़ तड़ की आवाज के आगे मंजू की आवाज दब गई इस तरह से लगातार
आखिरी में तरह से लगातार कई झटके मारने के बाद दोनों एक साथ स्खलित हो गए

लगभग 8 मिनट तक लण्ड-चूत की लड़ाई चलती रही और आखिर में दोनों ने हार मान लिया मंजू ने मेरे पीठ पर दोनों हाथो को रखते हुए कस कर अपने सीने से चिपका लिया मुझे मैं भी सखिलित हो गया और मंजू को चूमते हुए मंजू के ही ऊपर लेट गया ! करीब 3 मिनट बाद मंजू ने अपने ऊपर से उठाया तो मैं उठा और कपडे पहन लिया ! बाहर अभी भी पानी गिर रहा था पूरी छत में पानी बह रहा था ! मंजू नंगी ही दरवाजे के सामने ही बैठ कर पेसाब करने लगी ,फिर कमरे के अंदर आई और बार ब्रा और पेंटी पहन कर गाउन डाल लिया ब्रा

का हुक मेरे से ही लगवाया ! और पलट कर मुझे किस करते हुए बोली ”आप बहुत मजेदार हैं” और इतना कह कर मुझे छोड़ते हुए पास ही रखी गैस चूल्हे को जलाया और दूध गर्म करने लगी तो मैंने कहा अब इतनी रात को दूध नहीं पीउंगा तो हॅसते हुए बोली ” बस पेट भर गया दूध से ” तो मैं हँसते हुए जबाब दिया ”आपके दूध से तो कभी भी पेट नहीं भरेगा” और इतना कहकर पास में जाकर झुक कर मंजू की चूचियों को दबा दबाने लगा तो मंजू फिर से खड़ी हो गई और मुझे चूमते हुए बोली ”आप बहुत मजेदार हैं” और बाते करने लगी इतने उफना कर तपेली से बाहर गिरने लगा तो उई माँ करते हुए जल्दी से गैस को बंद किया ! मैं बाहर जाकर देखा तो हलकी हलकी बूंदा बांदी

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अभी भी हो रही थी मैं छत के एक किनारे पर बैठकर पेसाब किया और अंदर रूम में आया तो मंजू बिस्तर पर लेटी हुई थी, मैं भी पास जाकर बैठ गया तो मंजू बोली ”पानी गिर रहा है क्या” तब मैंने उन्हें ”हां” में जबाब दिया तो खुद बाहर निकली और घूम घूम कर देखने लगी और मेरे पास आकर बोली ”आपकी चारपाई अब बाहर कर देती हूँ पानी बंद हो गया” और मेरे उत्तर प्रतीक्षा किये बिना ही चारपाई को घसीटने लगी तो आवाज आने लगी तब मैंने चारपाई का दुसरा सिरा पकड़कर उठा लिया और बाहर छत में लगाया और दोनों चारपाई गए और बाते करने लगे तो मुझे नींद आने लगी और मैं कब सो गया पता ही नहीं चला ! मेरी नींद सुबह साढ़े छः बजे खुली तो देखा की चारो तरफ उजाला फैला हुआ है ! मैं उठकर चारपाई में बैठ गया और इधर उधर देखने लगा इतने में सासु माँ पानी की बोतल और एक

गिलास लेकर आई और पानी दिया मैं पानी पीने लगा और सासु माँ मंजू के कमरे के पास गई और दरवाजे को ठोकने लगी और मंजू मंजू कहकर आवाज देने लगी तो मंजू चाची उठ गई तो सासु माँ ने मंजू से कुछ कहा और छत से नीचे चली गई ! कुछ देर में मंजू चाची साड़ी-ब्लाउज में मेरे पास आई और पानी पीने लगी और धीरे से बोली ”बहुत अच्छी नींद लगी” इतना कहकर मुस्कुराई और छत से नीचे चली गई और कुछ देर में वापस आई उनके हाथ में नीम की दातुन थी जिसे मुझे दिया ,दातुन के बाद मैंने चाय पीया और छत से नीचे आ गया सुबह का नास्ता किया और करीब 8 बजे अपनी कार से वापस गया ! दिसंबर 2014 में मंजू चाची मेरी पत्नी के साथ मेरे यहाँ आई तो मौका पाकर दर्शन के बहाने होटल में भी लेजाकर चोदा ! (होटल की चुदाई बिस्तार से सुनाऊंगा)

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