पत्नी के आदेश पर सासू माँ को दी यौन संतुष्टि-1

पत्नी के आदेश पर सासू माँ को दी यौन संतुष्टि-1

(Patni Ke Aadesh Par Sasu Maa Ko Di Yaun Santushti-1)

मेरे एक बचपन के मित्र राघव ने लगभग एक माह पहले मुझे अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं में से एक घटना पर एक रचना लिख कर भेजी थी।
उसने मुझे अनुरोध भी किया था कि मैं उस रचना को हिंदी में अनुवाद एवं सम्पादित करके अन्तर्वासना पर प्रकाशित करा दूँ।
मेरे मित्र राघव की इच्छा और अनुरोध का सम्मान करते हुए मैं निम्नलिखित रचना को अनुवाद एवं सम्पादित करके आप सब के लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ।

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प्रिय मित्रो, मैं यौन सम्बन्ध पर लिखी गई रचनाओं में बहुत रूचि रखता हूँ तथा मैंने इन्टरनेट पर बहुत से श्रोताओं के जीवन में घटी काम-वासना की रोमांचक घटनाएँ भी पढ़ी हैं।
मैंने अपने जीवन में घटित घटनाओं के बारे में कभी लिखने का सोचा भी नहीं था, लेकिन मेरे बचपन के मित्र सिद्धार्थ वर्मा के सुझाव एवं प्रोत्साहन पर ही मैं अपने जीवन की एक कामोत्तेजक घटना का विवरण लिखने का पहला प्रयास कर रहा हूँ!

मैं आप सब को मेरे साथ दो वर्ष पहले घटित एक घटना के बारे में बताना चाहता हूँ जो सौ प्रतिशत सत्य है और उसका सुख एवं आनन्द मैं आज भी प्राप्त कर रहा हूँ।

इससे पहले कि मैं उस घटना का उल्लेख करूँ मैं आप सब को अपने बारे में कुछ जानकारी देना चाहूँगा।
मेरा नाम राघव है, मैं पच्चीस वर्ष का हूँ तथा मैं छह फुट का बहुत ही हष्टपुष्ट और सुडौल डील डौल वाला युवक हूँ।

मैं अजमेर में एक सरकारी बैंक में अकाउंटेंट हूँ और अपनी बाईस वर्षीय पत्नी रूचि के साथ उसी बैंक की कर्मचारी आवास कालोनी की एक बिल्डिंग में दूसरी मंजिल के सिंगल बैड रूम फ्लैट में रहता हूँ जिसमें एक बैठक, एक शयनकक्ष, एक रसोई, एक बाथरूम तथा दो बालकनी है।

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मेरी शादी ढाई वर्ष पहले हुई थी और तब से मेरी पत्नी रूचि पास ही की मार्किट में एक बुटीक चलाती है तथा अधिकतर रात के आठ बजे तक वहीं पर ही रहती है।
उसके तराशे हुए बदन की व्याख्या तो कोई कवि ही कर सकता है लेकिन फिर भी मैं थोड़ी चेष्टा कर के आपके लिए उसका कुछ विवरण देता हूँ।

रूचि बहुत ही खूबसूरत है, उसका कद पांच फुट सात इंच है, रंग गोरा है, चेहरा गोल, गुलाबी गाल तथा थोड़ा उठे हुए, आँखें हिरणी जैसी, नाक पतली और होंठ गुलाब की पंखुड़ियों जैसे।
उसकी गर्दन सुराहीदार है, कंधे चौड़े हैं, उठी हुई चौड़ी छाती पहले चौंतीस-बी साइज़ की थी लेकिन अब शादी के बाद बढ़ कर चौंतीस-डी की हो गई है।

उसके नारंगी जैसे गोल और मखमल जैसी मुलायम त्वचा वाले उरोज बहुत ही सख्त, ठोस तथा कसे हुए हैं और उन गोरे उरोजों पर गहरे भूरे रंग की चूचुक एक नजरबट्टू का काम करते हैं।
उसकी पतली कमर का नाप पच्चीस इंच, गोल मटोल नितम्बों का नाप छत्तीस इंच है, उसकी टांगें लंबी हैं तथा जांघें मसल एवं सुडौल हैं।

उसके सिर के काले बाल उसकी कमर तक लंबे है तथा बगल एवं जघनस्थल के बाल गहरे भूरे और छोटे हैं।

रूचि के माता पिता अलवर के पास खैरथल के निवासी हैं और वहाँ के बहुत बड़े आढ़ती होने के कारण बहुत ही धनवान भी हैं।
रूचि उनके घर की इकलौती संतान होने के कारण उसके माता पिता मुझे अपना दामाद नहीं बल्कि पुत्र ही मानते हैं और आये दिन कोई न कोई तोहफा हमारे घर भेजते रहते हैं।

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जब भी मैं ससुराल जाता हूँ या वे हमारे घर आते हैं तब रूचि की माँ यानि मेरी सास रूचि से अधिक मेरा बहुत ध्यान रखती है और अपना पूरा प्यार मुझ पर न्यौछावर करती है।

हमारी शादी के लगभग छह माह बाद यानि दो वर्ष पहले जब मेरी सास, पूरे वर्ष का राशन आदि अपने साथ ही लेकर, अकेले ही हमारे घर आई तब हमें थोड़ा आश्चर्य हुआ।

जब रूचि ने माँ से पापा के नहीं आने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि आजकल मंडी में अनाज की फसल आई हुई है इसलिए वे उसी में व्यस्त हैं और कुछ दिनों में आ जायेगें।

सासू माँ के आने के दो दिन बाद जब मैंने ससुर जी को फोन कर के हमारे घर आने के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि काम की वजह उन्हें आने में तीन से चार सप्ताह लग सकते हैं।

हमारे घर सिर्फ दो या तीन दिन रहने वाली मेरी सास जब डेढ़ माह तक वापिस अपने घर जाने का नाम नहीं लिया तब हमारे सुखमय तरीके से चल रहे जीवन में उथल पुथल मच गई थी।

रूचि की माँ के आने से मुझे थोड़ी दिक्कत महसूस होने लगी थी क्योंकि मेरा रूचि को प्यार करने के लिए उचित जगह और समय मिलना बहुत मुश्किल हो गया था।

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