नाज़ुक सी कली नाज़नीन

मैं नीचे लेटा देख रहा था, मेरा लंड बार बार उसकी चूत के अन्दर बाहर आ जा रहा था, मैं उसके निप्पल चूस रहा था, मगर वो सबसे बेखबर बस जोर जोर मुझे चोदने में लगी थी।

जब एक कोमल सी लड़की, जिसकी चूत पूरी कसी हो आपके ऊपर चढ़ के खुद आपकी चुदाई करे तो आप कितनी देर रोक सकते हो।

मैंने भी बड़ी कोशिश की, मगर रोक न सका।

वो ऊपर से चोद रही थी तो मैं भी नीचे से उसकी कमर को पूरी मजबूती से पकड़ के नीचे से उसकी ठुकाई कर रहा था।

ए सी कमरा होने के बावजूद हम दोनों को पसीना आ रहा था।

वो झड़ी या नहीं झड़ी, मुझे पता नहीं पर मैं झड़ गया।

जब मेरा वीर्य झड़ा तो मैं न जाने उसे क्या क्या कह गया- कितनी गालियाँ उस को दे डाली… मगर वो फिर भी लगी रही जब तक मेरे वीर्य की आखरी बूँद कंडोम में न निचुड़ गई।
जब तक मैं निढाल होकर चित्त हो कर बेड पे न गिर गया।

वो मेरे ऊपर लेट गई, मैं उसकी पीठ और चूतड़ों पर हाथ फेरता रहा।

जब तूफ़ान थम गया तो वो उठी और बाथरूम में चली गई, फ्रेश हो कर बाहर आई और कपड़े पहन कर तैयार हो गई।
मगर मैं नंगा ही रहा।

मैंने उसे पैसे दिए।

जब वो जाने लगी तो बोली- अंकल, आप विक्की के पापा है?

मुझे बड़ी हैरानी हुई- हां…
मैंने जवाब दिया- अगर तुम मुझे पहचान गई थी तो मेरे साथ क्यों किया?
मैंने पूछा।

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‘तो क्या हुआ, यह तो मेरा काम है, जो मुझे पैसे देगा उसके साथ तो मुझे करना ही पड़ेगा, चाहे वो कोई भी हो!’

मैंने उसे इशारे से पास बुलाया, जब वो मेरे बिल्कुल करीब आ गई तो मैंने उसे बाँहों में भर लिया और एक ज़ोरदार चुम्बन उसके होंठों पे जड़ दिया।

उसने भी चुम्बन का जवाब चुम्बन से ही दिया।

‘फिर कब मिलोगी?’ मैंने पूछा।

‘फिर कब, अभी मिल लो, अभी तो दो ही बजे हैं, मैं तो तीन बजे तक फ्री हूँ।’ वो बड़ी बेबाकी से बोली।

‘और पैसे?’ मैंने पूछा।

‘दूसरे ट्रिप के अलग से लगेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया और फिर से बेड पे लेटाया।

‘पैसे की चिंता नहीं है, असली मज़ा इस बात का है कि मैं अपनी बेटी की क्लासमेट को चोद रहा हूँ।’

और मैं फिर से उस नाज़ुक कली को मसलने के लिए तैयार हो गया।

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