वीदेसी मॉनिका आंटी के मज़े लिए-1

हेलो गाइस, मी नामे इस अंकित, आगे 21, डन मी ब.कॉम लास्ट एअर. ई वॉंट तो शेर मी लाइफ एक्सपीरियेन्स हियर. थिंग्स हॅपंड फ्यू यियर्ज़ बॅक जब मे कुछ 18-19 साल का था.

उन्न दीनो मुझ मे काफ़ी हार्मोंस चेंज और ग्रो होने की आक्टिविटी शुरू हो चुकी थी. सो ई स्टार्टेड तो गेट अट्रॅक्टेड टुवर्ड्स गर्ल्स आंड फीमेल्स तोसे टाइम.

सड़क पर चलती हर कोई औरत या लड़की को घूरता रहता था. स्पेशली डॉन’त नो वाइ ई लीके फट मीटी बल्की वुमन सो मच तोसे टाइम. जिनके मोटे मोटे बूब्स और गांद होती थी. मुझे उन्न साइज़ की औरतो और लड़कियो को देखने मे बहुत मज़े आता था.

फिर उन्न दीनो टीवी पे आक्ट्रेस भी कूम कपड़ो पे आने लगी थी गानो मे. तो मुझे देखने मे बहुत मज़ा आता था. आंड ई बिकम लेडी लुस्टेर तोसे टाइम. दिन रात सोते जागते औरते, लड़किया दिमाग़ मे.

उससी वजह से यूयेसेस साल मेरे नंबर सिर्फ़ पासिंग मार्क्स थे. मई जैसे तेसे पास हो गया. उससी साल हमारा दूसरा घर बन कर रेडी हो गया था और हम सब यूयेसेस नये घर मे शिफ्ट हो गये थे.

कुछ दिन दादा दादी हमारे साथ रहने के बाद पुराने वेल घर मे रहने चले गयी देख संभाल के लिए. फिर मेररे पेरेंट्स ने सोचा की यूयेसेस पुराने घर के आधे उपर वेल हिस्से को रेंट पे लगा दे. और नीचे के हिस्से मे दादा दादी रहने लगे थे.

तो फिर उन्होने उपर का हिस्सा पुराने घर का रेंट पे लगाने रख दिया. और नीचे मेरे दादा दादी रहते थे.

कुछ टाइम बाद हे वाहा उपर के हिस्से मे एक वीदेसी लेडी रहने आ गयी जो योगा और आयुर्वेध का इंडिया मे सीखने आई थी. थोड़े दिन निकालने के बाद मे अपने दादा दादी से पुराने घर मिलने गया.

वाहा आंटी जो रहने आई थी जिनका नाम मॉनिका था, उनके दो बाकछे थे जो वाहा विदेश मे जर्मनी मे रहते थे. मई बचपन से यूयेसेस एरिया और घर मे रहता था, वाहा के सारे लोग और बाकछे मुझे जानते थे.

इसलिए मई भी वाहा पड़ोस मे खेलने लगा पड़ोस के बाचो के साथ. लेकिन अभी तक मेने मॉनिका आंटी को नही देखा था. कुछ देर बाद मे अपने घर पुराने वेल गया खेल कर. वाहा बेत कर टीवी देख रहा था तब अचानक से मॉनिका आंटी नीचे आई और किचन मे जाके अपने लिए खाना बनाने लगी.

जब मैने पहली बार उनपे नज़र घुमाई तो देखता रह गया. क्या औरत थी, 6 फीट लंबी, हुट्टी कुट्टी जबरदस्त मांसल, गोल मटोल. जबरदस्त बड़े बूब्स और छोड़ी मोटी गांद और लंबे वेवी हेर और स्किन काफ़ी फेर थी. और 32 33 साल की औरत.

देखते ही मेरी हालत कराब. इतनी लंबी छोड़ी हुट्टी कुट्टी औरत इश्स घर मे. अब मेरे दिमाग़ मे उससी की इमेज घूमने लगी. मई अब न्यू घर मे भी मॉनिका आंटी की बॉडी का ही सोचता रहता. उनको नंगा इमॅजिन करता दिन रात.

फिर पेरेंट्स को बोला की मेरे दोस्त पुराने वेल घर के साइड है मेरा मॅन वाहा लगता है इसलिए मे कुछ दिन वाहा रहना चाहता हू. पेरेंट्स को कोई प्राब्लम न्ही थी.

मई अपना स्कूल बाग भी पुराने घर मे ले आया ताकि पेरेंट्स स्टडी के नाम पे ना बुलले.

अब मई पुराने घर मे दादा दादी के साथ नीचे वेल हिस्से के घर मे रहने आ गया. और सोचने लगा कैसे भी करके मॉनिका आंटी के नज़दीक रहने का मोका मिल जाए तो.

घर के उपर का जो हिस्सा था उसमे 2 रूम थी. जिसमे एक रूम मे छोटा स्टोर का हिस्सा अटॅच था और एक बातरूम था जो अलग से बना हुआ था और तोड़ा सा छत का स्पेस था खुला.

दो रूम मे से एक रूम मे बाल्कनी थी जिसका रिघ्त साइड सिर्फ़ 4 फीट उँची वॉल थी जो खुली छत थी उसकी वॉल से ही साइड अटॅच थी. जो खुली छत ओपन छत थी वो 4 फीट वॉल से कवर थी.

मतलब ये था की खुली छत से 4 फीट चाड कर रूम की बाल्कनी पे जया जा सकता था. किचन नीचे था तो मॉनिका आंटी खाना बनाना नीचे आती थी.

अब वो जब जब नीचे कोई काम से आती तो मे उनसी बाते करने लगा जैसे तेसे करके इंग्लीश मे. और उनके कुछ काम मे भी मदद करने लगा. और कुछ ही दीनो मे मॉनिका आंटी मुझसे काफ़ी घुल मिल गयी और.

मई घर के उपर हिस्से मे भी काफ़ी टाइम बैटाने लगा मॉनिका औनी के साथ. अब मे उनके के काफ़ी नज़दीक आ गया था. मॉनिका आंटी यहा आयुर्वेध और योगा की प्रॅक्टीस करने आई है.

एक रात मे दादी से बात कर रहा था उनसे पता चला की मॉनिका आंटी तो बाल्कनी वेल रूम मे सोती है और ये सुन कर अब मेरे दिमाग़ मे था की आधी रात को छत से कूद के बाल्कनी मे मॉनिका आंटी को देखु.

लेकिन यूयेसेस रात उनका दरवाज़ा सिद्धियो से जो उपर 2न्ड फ्लोर पे जाता थॉ वो एक डोर थे वो उनकी साइड से बंद था. सो मे जेया नही पाया उपर उनकी साइड से डोर बंद होने के कारण.

अब मैं अगले दिन मोका देख कर दोपहर मे 2न्ड फ्लोर के मैं डोर का जो चितकने वाला लॉक था यूयेसेस होल को अंदर से खुरेच खुरेच कर और बड़ा करता गया और तोड़ा ढीला कर दिया ज़्यादा स्पेस होल मे होने से.

वो लॉक चितकने ढीली रहती जिससे डोर लॉक न्ही हो पता था ठीक से. मेरा काम बन गया था. आ ब वो दिन बीत जाने के बाद आधी रात मे उठ. और देखा दादा दादी सब सो रहे है.

अब मे उपर छत की और गया 2न्ड फ्लोर पे और डोर को तोड़ा हिला के खोल लिया. और अब मे छत से होकर उनकी बाल्कनी मे 4 फीट की दीवार कूद कर चला गया.

धीरे चॉक ए डोर की और गया रूम के बाल्कनी के. बाल्कनी के डोर पे कर्टन लगा हुआ था जो उडद रहा था. अब मैने देखा की उंड़र मॉनिका आंटी सो रही थी बॅक करके उल्टी और उनकी निघट्य घुटनो तक उँची उठी हुई थी.

अब मे होल होल रूम मे एंटर हुआ और रूम को पूरा देखा खड़े खड़े. सब सो रहे थे गहरी नींद मे. अब मे बेड के किनारे घुटनो के बाल बेत गया और नज़दीक से मॉनिका आंटी की नंगी टाँगो की पिंदलियो को निहारने लगा देखने लगा गोर से.

वो टाँगो की पिंडिल्या उफ़फ्फ़ इतनी ज़्यादा मोटी मांसल गोल मटोल भीम जैसे बड़ी और लंबी भारी भरकम भारी हुई वेल शेप थी की मेरे जैसे 2 फेसस उनकी एक टाँग की पिंडली के नीचे ईज़िली डूब जाए या हाइड हो जाए, एपिक साइज़.

मेरी हालत वाहा कराब हो गयी थी. मे धीरे धीरे उनकी निघट्य को किंच कर थाइस तक ले गया. अफ उनकी झांगे. इतनी ज़्यादा मोटी और छोड़ी. भीम जैसे मांसल छोड़ी बड़ी भारी की मेरे जैसे 4 5 फेसस उनकी एक ही झांग के नीचे ही डूब के मार जाए.

उपर से उनकी हाइट 6 फीट लंबी जो उनकी बॉडी को बहुत लार्ज कर देती है जिससे उनकी टांगे झांगे गांद सब ट्रिपल पॅकेज बोनस से एपिक ह्यूज साइज़ से थे. जो बहुत रेर है. इतनी लंबी छोड़ी हुट्टी कुट्टी औरत ओरिसस तरह की रेर बड़ी छोड़ी भारी मांसल लंबी भीम के टांगे और झांगे औरत की मैने आज तक देश मे तो क्या टीवी मे भी शायद नही देखी.

बुत वो बहुत कर्वी वेल फिगर भी थी. जिससे उनकी फुल बॉडी आंड फिगर बहुत हुट्टी कुट्टी कूर्वी छोड़ी औरत का लगता है. ई वाज़ इन हेवेन तो सी सच ह्यूज लेग्स आंड थाइस इन मी होल लाइफ बाइ ओपन आइज़ सो क्लोज़.

मेरी हार्टबीट बढ़ गयी थी और हाथ काँपने लगे और मे धीरे धीरे करके अपना मूह उनकी झांगो की और ले जाने लगा चूमने के लिए जैसे ही मेरे लिप्स और उनकी झांग की दूरी 5 – 6 इंच रह गयी.

उससी वक़्त अचानक से तेज़ हवा हुई और विंडो के पर्दे से वाहा पड़ी खाली ग्लास गिर गयी जिसकी थोड़ी आवाज़ हुई. ये सुनते हे में फुर्ती से घुटनो के बाल ही स्पीड से बाल्कनी में आ गया.

लकिली मॉनिका आंटी नींद मे थी तो उनकी आँख खुलने मे 10 से 15 सेक जैसे लगे और आधा उठ कर उन्होने लेते से ही ग्लास वो साइड मे करदी और फिर से अपनी निघट्य ठीक करके सो गयी.

अब मे बाहर बाल्कनी मे खड़ा हुआ वेट कर रहा था की मॉनिका आंटी अपनी निघट्य उपर करले तो मे उनकी भीम जैसे मोटी टाँगो और झांगो के डरसन करलू.

इश्स चक्कर मे 1 से भी ज़्यादा घंटा हो गया पेर उनकी निघट्य उपर नही हुई. क्यूंकी वो एक ही पोज़ मे सोती रही. अब कुछ सुबह के 4 से बाज गयी थे. क्यूंकी 5 बजे से तोड़ा दिन की रोशनी शुरू हो जाती है और थोड़ी बहुत आवाज़ भी सुरू हो जाती है तो मई दर्र से नीचे चला गया सोने.

आयेज की कहानी नेक्स्ट पार्ट मे.

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