कर्जदार की बीवी से मिला चुदाई का सुख

मेरा दिल खुश हो गया और मैंने हंस कर कहा- वाह भाभी जी, आपको तो मेरा बड़ा ख्याल है.
भाभी जी ने भी मुस्कुरा कर कहा- मुझे आपका ख्याल रखना अच्छा लग रहा है.

मैं खाने की टेबल पर आ गया. भाभी ने छोले की सब्जी, पूड़ी और चावल बनाया था. मैंने खाना खाया, सच में क्या स्वादिष्ट खाना बना था.

मैंने भाभी जी से बोला- वाह क्या खाना बनाया है … बहुत बढ़िया … ऐसा खाना तो किस्मत वालों को ही मिलता है.
इस पर भाभी जी बोलीं- शादी कर लीजिए … रोज ही आपको ऐसा खाना मिलेगा.
मैं तुरंत बोल पड़ा- भाभी जी कोई आप जैसी मिल जाए, तो मैं अभी शादी कर लूं.
भाभी जी बोलीं- मेरे जैसी क्यों?
मैंने बोला- खाना भी आप जैसा होना चाहिए और खिलाने वाली भी आप जैसी होना चाहिए. जैसी आप हो, वैसा ही आपका बनाया हुआ खाना है … एकदम चटपटा और नमकीन.
भाभी जी हंस कर बोलीं- अच्छा मैं नमकीन हूँ … फालतू की तारीफ मत करो … ऐसा क्या है मुझमें.
मैं बोला- नसीब वाला है आपका पति.

इस पर भाभी जी रोने लगीं.

मैं उनके पास गया और पूछा- सॉरी मैंने कुछ गलत बोल दिया क्या?
भाभी जी ने कहा- आप क्यों सॉरी बोल रहे हो … मेरी किस्मत ही खराब है. जबसे शादी हो कर अपने पति के घर आई हूं, तब से ही तकलीफ भरा जीवन जी रही हूँ. पहले मेरे सास ससुर ने दु:ख दिया … उसके बाद हम गांव से शहर आए, तो यहां ये बिगड़ गए. हमेशा शराब पी कर मारना पीटना.
इतना कह कर भाभी जी फिर से सुबकने लगीं.

मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा, तो वो पलट कर मुझसे लिपट गईं और रोने लगीं. मैंने उनके पीछे पीठ को सहला रहा था.
मैं भाभी जी से बोला- अगर आप मेरी बीवी होतीं, तो मैं आपको बहुत प्यार करता. आपकी सब इच्छा पूरा करता.

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मैं भाभी जी से ये बोल ही रहा था कि तभी मेरे शेरू ने उनको टच करना शुरू कर दिया. जो भाभी जी ने भी महसूस कर लिया था.
भाभी जी मुझसे अलग हो कर बोलीं- आज से आपके घर का और आपका ख्याल मैं रखूंगी … क्या आप मेरा ख्याल रखोगे?

वो जैसे ही ये बोलीं, बस ऐसा सुनते ही मैं सीधा उनके होंठों पर टूट पड़ा. मेरे इस हमले से वो डर गईं. फिर धीरे धीरे मेरा साथ देने लगीं.

दस मिनट किस करने के बाद मैं बोला- आप मुझे गलत तो नहीं समझी न?
भाभी जी बोलीं- मैं आपको पसंद करने लगी हूं.

उनकी यह बात सुन कर, मैंने फिर से उन्हें चूमना शुरू कर दिया और भाभी जी की चूचियों को दबा दिया. भाभी जी के मम्मे बहुत बड़े और कड़क थे. मैंने जैसे ही भाभी जी के मम्मों को दबाया, उनके मुँह से आह निकल गई.

इसके बाद मैं भाभी जी को बेड पर ले गया और उनकी साड़ी को खोल दिया.

भाभी जी मुझे कामुक निगाहों से देखते हुए मेरा साथ देने लगीं. मैंने लगे हाथ भाभी जी का पेटीकोट और ब्लाउज भी निकाल दिया. अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थीं.
मैं उनकी खूबसूरती को निहार रहा था.

तभी भाभी जी बोली- सिर्फ देखते ही रहोगे या कुछ आगे भी बढ़ोगे?

मैं उनके चढ़ ऊपर गया और भाभी जी के होंठों को चूमना चालू कर दिया. मैंने भाभी जी के टमाटर से लाल हो चुके गालों पर चुम्मी की. उनकी आंखें वासना में लाल होने लगी थीं. मैंने चूमना जारी रखा और धीरे धीरे भाभी जी के गले पर चूमते हुए उनके चूचों को चूसना और दबाना चालू कर दिया.

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अब वो आह आह करके कामुक आवाजें निकालने लगी थीं. मैं उनके एक निप्पल को चूस रहा था और दूसरे निप्पल को अपनी दो उंगलियों में दबा कर मींज रहा था. इससे भाभी की जोश बढ़ रहा था.

चूचियों के बाद मैं नीचे का रुख करते हुए उनके पेट पर आ गया. मैंने भाभी जी के सपाट और चिकने एकदम बेदाग़ पेट पर किस करना चालू कर दिया. मैं उनकी एकदम गोल और गहरी नाभि से खेल रहा था.

इसके बाद मैंने भाभी जी की फूली हुई डबलरोटी की तरह चूत को हाथ लगाया. भाभी जी की चूत पर बिल्कुल भी बाल नहीं थे … एकदम चिकना मैदान था मानो आज दिन में ही भाभी जी ने अपनी चूत की झांटें साफ़ की हों.

फिर मैं उनकी चूत के दाने को छेड़ने लगा. इससे भाभी एकदम से तिलमिला उठीं और उनके पूरे शरीर ने एक गहरी सी झुरझुरी ली. मैंने उनकी जांघों पर किस करते हुए चूत को सनसनी देने का काम किया.

इसके कुछ पल बाद भाभी जी उठीं और मेरे कपड़े खींचते हुए फाड़ने सी लगीं. कुछ ही पलों में भाभी जी ने मुझे पूरा नंगा कर दिया और मेरे लम्बे लंड को पकड़ कर दबाने लगीं. उन्होंने मुझे बेड पर चित लिटा दिया और मुझे ऊपर से नीचे तक किस किया. मैं अपने जिस्म पर भाभी जी के रसीले मदभरे होंठों का स्पर्श महसूस करते हुए मदमस्त हुआ जा रहा था.

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