कमसिन बेटी की महकती जवानी-6

फिर बापू ने पद्मिनी का हाथ उठाया और नल से फव्वारा जैसा पानी बनाते हुए उसे नहलाने लगा और अपने शरीर में भी पानी डालने लगा.

फिर नीचे बैठकर उसने पद्मिनी की चूत और जाँघों में साबुन लगाया और उससे घूमने को बोला. पद्मिनी घूमी और अब उसका बाप उसके चूतड़ों पर साबुन लगाने लगा. पद्मिनी ने गुसलखाने के शीशे में देखा कि बापू का लंड अब खड़ा होने लगा था.

बापू ने पद्मिनी की चूतड़ों की दरार में हाथ डाल दिया और उसकी गांड के छेद में साबुन लगाया. बापू का हाथ जैसे वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. वो बार बार पद्मिनी की गांड के छेद में रगड़े जा रहा था.

अब बापू खड़ा हुआ और पानी से खुद को नहलाया. बाद में उसने तौलिए से अपना और पद्मिनी का शरीर पोंछा. इसी दौरान बापू ने नीचे बैठ कर पद्मिनी की चूत की एक मस्त पप्पी ले ली.

फिर घूमकर बापू पद्मिनी का पिछवाड़ा पौंछने लगा. पद्मिनी ने शीशे में देखा कि बापू ने उसके चूतड़ों को फैलाया और अपना मुँह उसकी दरार में डाल दिया. अब उसको बापू की जीभ अपनी गांड के छेद पर रगड़ने का अहसास हुआ. वो क़रीब 5 मिनट तक उसकी गांड चाटता रहा.

पद्मिनी के पाँव उत्तेजना से काँपने लगे और वह बोली- छी: बापू, क्या गंदी जगह को चाट रहे हो.
बापू बोला- बेटी, तेरी कुँवारी गांड बहुत मस्त है. बहुत जल्दी मैं तेरी गांड भी मारूँगा.

पद्मिनी बोली- आप माँ की भी गांड मारते थे?
पापा- हाँ बेटी, वो तो बहुत मज़े से अपनी गांड में लंड करवाती थी. अगर 3-4 दिन उसकी गांड नहीं मारता था तो वो तो कहने लगती थी कि सुनो जी, मेरी गांड खुजा रही है, आज इसमें ही डाल दो.
पद्मिनी तो ये सुनकर हैरान ही रह गयी.

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फिर दोनों वापस कमरे में आ गए. बापू का लंड अब फिर से तना हुआ था. उसने पद्मिनी को अपने गोद में खींच लिया. बापू ने फिर से पद्मिनी को चूमना शुरू किया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा. साथ ही उसके निप्पलों को भी मसलने लगा. वह मजे से आह कर उठी.
फिर बापू बोला- बेटी, तेरी चूत अभी भी दर्द कर रही है क्या?
पद्मिनी बोली- जी बापू, अभी भी हल्का दर्द है.

बापू- बेटी, मेरा तो अब फिर खड़ा हो गया है, मैं अभी तो तेरी गांड नहीं मारूँगा क्योंकि तेरी गांड में अभी मुझे बहुत मेहनत करनी होगी, तभी वो आराम से मेरा लंड लेने को तैयार होगी. पर तू अपने बापू का लंड चूस तो सकती ही है, मुझे इसमें बड़ा मज़ा आएगा और मेरा लंड शांत भी हो जाएगा.

पद्मिनी अपने बाप का लंड चूसने को राजी हो गयी.
बापू बोला- तुम बैठ जाओ.. मैं खड़े होकर तुम्हारे मुँह में अपना लंड डालता हूँ.
अब वो पद्मिनी को बैठाकर, अपना लंड उसके मुँह के सामने लाया, पद्मिनी ने भी उसे चूमना और चाटना शुरू किया. वो हल्के से पद्मिनी के मुँह में धक्के लगाने लगा. पद्मिनी ने भी मस्ती में आकर लंड चूसना शुरू कर दिया.

थोड़े देर में बापू आह आह करने लगा और बोला- आह बेटी, तुम तो बहुत मज़ा दे रही हो. आह आज तो तुम्हारी माँ की याद आ गयी, वो भी ऐसे ही लंड चूसती थी, काश तुम मेरी बीवी होती तो खुलेआम भी खेल सकती थी.

फिर वो लंड से बहुत ज़ोर से धक्के मारने लगा और बोला- बेटी, तुम अपने बापू का रस पियोगी ना? बहुत स्वादिष्ट लगेगा, शुरू में हो सकता है तुमको इसका स्वाद अच्छा नहीं लगे, पर जल्दी ही तुम इसकी दीवानी हो जाओगी. तुम्हारी माँ तो इसकी दीवानी थी. बोलो ना अब मैं झड़ने वाला हूँ, तुम लंड रस पियोगी ना?
पद्मिनी ने बापू का लंड चूसते हुए, उसकी तरफ़ देखकर हाँ में सर हिला दिया.

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बापू ख़ुश हो गया. फिर जल्द ही उसने धक्कों की गति बढ़ा दी.. और चिल्लाना शुरू कर दिया- हाय बेटी.. मैं झड़ा..
यह कहते हुए उसने अपना रस पद्मिनी के मुँह में छोड़ना शुरू कर दिया. पद्मिनी को उसके वीर्य का स्वाद शुरू में तो अच्छा नहीं लगा, पर जल्दी ही मैं उसे गटक कर पी गयी. बाद में उसे स्वाद ऐसा कोई बुरा भी नहीं लगा. बापू तो जैसे मस्त हो गया. पद्मिनी के मुँह में लगे हुए अपने वीर्य को साफ़ करके उसने उसे बहुत प्यार किया और फिर उसे बांहों में लेकर सो गया.

इस चुदाई की कहानी के लिए मुझे ईमेल जरूर कीजिएगा.

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