होली में जम कर चुदाई करवाई

holi mai jamkar chudai kiहाय रीडर्स. में आप Kamukta के लिये एक और कहानी लेकर आई हूँ मुझे आशा है की ये आप को बहुत पसन्द आयेगी ससुराल मे यह मेरी पहली होली थी. शादी को 8 महीने हो चुके थे. होली वाले दिन सुबह से ही में बेकरार थी. दरअसल आज अपनी माँ के घर पर जाने का मौका जो मिल रहा था. ऊपर से में होली भी बड़ी धूमधाम से मनाती हूँ. सुबह करीब 10.30 बजे में और मेरा पति हमारे घर पहुँचे. हमारे घर पर सब लोग बड़ी बेसब्री से हमारा इन्तजार कर रहे थे. वहा पहुँचने पर हमारा जोरदार स्वागत हुआ. मेरी बहनों और मेरी सहेलियो ने हम दोनो को रंगो से बुरी तरह रंग दिया. में पूरी तरह से रंग में हो गयी थी.

मैने उस वक़्त एक सफेद टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी. टी-शर्ट भीग कर मेरे कपड़ो से चिपक गयी थी और मेंरी ब्रा चमकने लगी थी. मेरी माँ ने मुझे इशारा किया और ऊपर के कमरे में जा कर कपड़े बदलने को कहा. में ऊपर छत पर चली गयी और दरवाजा बंद करके कमरे की लाइट चालू करके जैसे ही मैने अपनी टी-शर्ट उतार कर फैंकी, दीवार के पीछे से कोई निकल कर मेरे सामने आ कर खड़ा हो गया. ये रोहित था. उसे देख कर मेरे होश उड़ गये पर फिर खुद को संभाल कर पास पड़ी चादर से अपनी ब्रा को ढकते हुये मैने उससे कहा, “तू यहा क्या कर रहा है?”

कुछ नही मेरी जान. तुझे मिलने को आया हूँ. और क्या तू ये चादर से खुद को ढक रही है. ज़रा मुझे भी तो देख लेने दे अपनी ये कातिल जवानी.” उसने जवाब दिया.

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“तू जाता है यहा से या में माँ को बुलाऊँ.” मैने कहा.

“हाये हाये. कैसे नखरे कर रही है. वो दिन भूल गयी, जब हर दुसरे दिन खुद ही मेरे सामने नंगी हो जाया करती थी.” उसने बड़ी बेशर्मी से कहा.

में कुछ बोलती इससे पहले वो मेरे पास आ गया और मेरे कंधे पर पड़ी चादर उठा कर एक तरफ फैंक दी. फिर बोला, “देख नैनसी, एक बार तुझे नंगी देख लू तो चला जाऊंगा. और तुझे वादा है की तुझे टच भी नही करूँगा.”

में फँस गयी थी. दरअसल रोहित मेरा कजन था और शादी से पहले का यार भी था और में करीब साल भर तक उसके साथ सेक्स का खेल खेलती रही थी. उसने ही मुझे जवानी का असली मज़ा लेना सिखाया था. पर अब में एक शादीशुदा औरत थी. किसी और की बीवी थी.

में थोड़ी देर तक चुपचाप खड़ी सोचती रही और फिर उससे बोली, “देख रोहित, तू सिर्फ़ देखेगा. करेगा कुछ नही.”

“तेरी कसम नैनसी.” वो बोला.

में उसकी तरफ घूमी और अपनी जीन्स खोल कर एक तरफ डाल दी. अब में सिर्फ़ ब्रा और पेन्टी में उसके सामने थी. काले रंग की मेंचिंग ब्रा और पेन्टी मेरे गोरे बदन पर क़यामत ढा रही थी. मेरी ब्रा मेरे साइज़ से छोटी थी और मेरे बूब्स उसमे समा ही नही रहे थे और मानो बाहर आने को बेताब थे. ऊपर से ब्रा के नेट के कपड़े में से मेरे हल्के भूरे निपल्स भी झाँक रहे थे.

फिर मैने अपनी पेन्टी भी उतार कर एक तरफ रख दी. उसके बाद जब मैने अपनी ब्रा उतारी तो मेरे दोनो भारी भारी बूब्स बाहर उछल पड़े. उनकी थिरकन देख कर वो मदहोश हो गया. उसने मुझे इशारा किया. मैने अपनी ब्रा उसकी तरफ उछाल दी.

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उसने मेरी ब्रा लपक ली और उसे सूंघ कर बोला, “क्या बात है साली, तेरे बूब्स तो काफ़ी बड़े और भारी हो गये हैं. लगता है तेरा पति जी भर कर मसलता है इनको.”

फिर अपनी जगह पर खड़ा होता हुआ बोला, “नैनसी मेरी जान, मुझ से रहा नही जा रहा. एक बार अपनी जवानी का रस मुझे पीला दे.”

मैने कहा, “देख रोहित, तुने वादा किया था की तू सिर्फ़ देखेगा. कुछ करेगा नही.”

“कुतिया ऐसे वादे तो में पहले भी करता था और उसके बावजुद तू खुद आ कर मेरे नीचे पड़ती थी.”

“तब की बात और थी रोहित. तब में कुंवारी थी पर अब एक शादीशुदा औरत हूँ. प्लीज़ तू जा यहाँ से.”

“नैनसी, ये तो और भी अच्छा है की तू अब शादीशुदा है. अब तो तेरे पास लाइसेन्स है खुल कर ये खेल खेलने का.” इतना कह कर वो मेरे पास आ गया. में पलटी तो उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे अपनी और खींच लिया. मेरी पीठ उसकी तरफ थी और उसने तुरन्त ही मेरे दोनो बूब्स पकड़ लिये. वही उसका खड़ा लंड में अपनी गांड की दीवार में रगड़ ख़ाता महसूस कर सकती थी.

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