गांव की मौसी की चुदाई कहानी

हां बेटा मैं कई बार तुझे मेरी छाती और पिछवाड़ा घूरते हुए देखा है मेरा भी मन करता था तुझसे चुदवाने का पर अब तक मैं मन दबा कर रह रही थी. इसलिए तो तेरी भाभी को रचना के यहाँ भेजा ताकि हमको पूरा मौका मिल सके मज़े करने का आज शाम तक तेरी भाभी घर नही आने वाली तो अपने पास पूरा दिन है चुदाई करने के लिए. वैसे मैं तेरी भाभी जितनी सेक्सी तो नही हू पर तुझे पूरा मज़ा दूँगी. क्या मौसी मुझे तुम्हारे जैसे मोटी औरत ही पसंद है मेरी नज़र मैं तुम भाभी से ज़यादा सेक्सी हो जयदा भरपूर बदन वाली हो जो मुझे पसंद है. ठीक है लाल मेरे जैसे तू कहे. तूने कभी किसी औरत के साथ कुछ किया है.

नही मैं आज तक किसी औरत को नही भोगा यहाँ तक कि नंगा भी नही देखा.

हाए तो आज भोग अपनी मौसी को और नंगा भी देख. पर उससे पहले अपने कपड़े उतार कर नंगा हो जा मैं भी तो देखु मेरे लाल का लण्ड कितना मोटा और लंबा है.

ओ मौसी तुम तो कितना खुल कर लण्ड और चूत बोल रही हो मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हारे मुँह से ये सब्द सुन कर अपनी कमीज़ उतारते हुए मैं बोला.
क्रमशः………………..

गतांक से आगे………………………

बेटा चुदाई मैं कोई शर्म नही करनी चाहिए तबी तुम पूरा मज़ा ले सकते हो. तब मैने अपने कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया. मैं बिस्तर के नीच मौसी के सामने खड़ा था मौसी बिस्तर पर बैठी थी और मेरा लण्ड एक दम उनके चेहरे के सामने था जो मौसी की खूबसूरती को मस्त कपड़ो मैं बंद देख कर तन कर एक दम मोटा हो गया था.

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दैया रे क्या मोटा लण्ड है तेरा बेटा इतना बड़ा और मोटा लण्ड तो मैं आज तक नही देखा. 8 इंच लंबा है बहुत मोटा है मेरी चूत तो मस्त हो जायेगी तेरे लण्ड से चुदवा कर.

मौसी तुम क्या कई लण्ड से चुदवा चुकी हो.

“हां बेटा मैं शादी से पहले बड़ी चुड़दकड़ औरत थी और कई मूसल लण्ड घोंटे है मैने अपनी चूत की ओखली मैं पर तेरा लण्ड अब तक का सबसे बड़ा लण्ड देखा है मैने”

कह कर मौसी अपने मुलायम हाथो से मेरे लण्ड को सहलाने लगी. मेरा लण्ड तन कर खड़ा होने लगा.

“कितना प्यारा लण्ड के मेरे लाल का और सूपाड़ा तो देखो क्या हथौड़े जैसा”.

कह कर मौसी ने मेरा लण्ड चूम लिया.

“आज तुझे खेत मैं जाने की कोई ज़रूरत नही आज तू मौसी को चोद कर अपने फ़र्ज़ को पूरा कर.”

“ठीक है मौसी जैसा आप कहो.”

मौसी मेरे लण्ड को ज़ोर से सहला रही थी. उसने अभी तक कपड़े पहन रखे थे और मेरी नज़र उनको मोटी चूचियों पर था.

“मौसी सहलाने से बहुत मज़ा आ रहा था.”

“अरे बेटा मज़ा तो तब आएगा जब तेरा लण्ड मेरी चूत मैं घुसेगा चल अब मैं तुझे अपना बदन दिखाती हूँ मेरा बदन देखना है ना. बोल हां ठीक है ले मेरी चोली के बटन खोल ज़रा.”

मौसी की चोली के बटन आगे से मैं अपने काँपते हाथो से उसके बटन खोलने

लगा. मेरे हाथ उसकी गु्दाज चूचियों से टकरा रहे थे. बड़ा अच्छा लग रहा था मुझे. मैने चोली के बटन खोल दिए और चोली एकदम खुल गयी. मौसी की बड़ी बड़ी दूधिया चूचियाँ भाभी की काली ब्रा मैं क़ैद थी जिससपर रात मैं मैने मूठ मारी थी. वह ब्रा बहुत ही टाइट थी मौसी के ऊपर बड़ी मुस्किल से बँधी लग रही थी. जैसे चूचियों के ज़ोर से अभी खुल जाएगी. वो नज़ारा देख कर तो मेरा मन मचल उठा. तभी मौसी ने चोली उतार दी. और मौसी की चूचियाँ मेरे सामने थी. वो भाभी की उस छोटी से ब्रा मैं बिल्कुल नही समा रही थी और बाहर निकलने को तैयार थी. मौसी के निपल्स भी कड़े हो गये थे और ब्रा मे छेद करने के कोशिश कर रहे थे. मैने अपने हाथ मौसी की गोल दूधिया चूचियों पर रखे और धीरे से उनको सहलाने लगा.

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वो बड़े ही प्यार से बोली. “बड़े दिनो बाद किसी मर्द का हाथ मेरी चूचियों पर लगा है बड़ा अच्छा लग रहा है. बेटा इतने प्यार से क्यों खेल रहा है चूची तो बेरहमी से मसलने के लिए बनाई गयी ज़रा खुल के खेल तेरी मौसी को तेरी कोई भी हरकत पर कोई ऐतराज नही है जैसे चाहे खेल अपनी मौसी के बदन से. तेरा पूरा हक है मेरे बदन पर. मैं मौसी की चूचियाँ अपने हाथ मे लेकर धीरे से दबाने लगा. और धीरे धीरे मैं अपने हाथो को दवाब चूचियों पर बढ़ा दिया और मेरे ज़ोर से दबाने से मौसी की मुँह से कराह निकलने लगी मौसी अपने होंटो को कातिलाना ढंग से दबा कर अपने मस्ती को जाहिर कर रही थी. मौसी के निपल्स भी उनकी चूचियों की तरह बड़ी थी जो अब तन कर खड़ी हो गयी थी मैं कभी ब्रा की ऊपर से उनकी निपल्स भी मसल देता.

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