दोस्त की सेक्सी माँ निर्मला की चूत चुदाई

मैं- कोई बात नहीं चाची, कभी कभी जीवन में ऐसी विकट परिस्थिति आती है, हमें बड़ी होश्यारी और सूझबूझ से उसका सामना करना चाहिये, मैं हूँ चाची तेरे साथ तू चिंता मत कर.
निर्मला- वो तो मुझे पता है तू है मेरे साथ लेकिन जो तेरे चाचा मुझे दे सकते हैं वो तू नहीं दे सकता.
मैं- मतलब ?
निर्मला- तू रहने दे पंडित बेटा, तेरे समझ नही आएगा, एक औरत की मजबूरी कोई नहीं समझ सकता, मैं तेरे लिए खाना बनाती हूँ.
मैं- चाची रुक तो, देख मैं तेरे लिए क्या लाया हूँ शहर से.
(मैं निर्मला के लिए लिपस्टिक, चूड़ियाँ, बिंदी, कंगन, पजेब, जालीदार नाईटी लेकर आया था, जिसे देखकर निर्मला खुश हो गयी लेकिन नाईटी देखकर वो सकपका गयी)
निर्मला(नाईटी दिखाते हुए) – ये क्या है ?? मैं ना पहनने वाली इसे, कैसा गन्दा है ये, इसमें शरीर दिखेगा पूरा.
मैं- ओहो चाची, अच्छा है ये, शहर में औरतें सब यही पहनती हैं घर पर, और वैसे भी यहाँ तेरे-मेरे अलावा कौन देख रहा है हमे.
निर्मला- नहीं रे, कमल आएगा देखेगा तो उसे अच्छा ना लगेगा.
मैं- कमल को मैं समझा दूंगा चाची, वो मेरी बात पक्का मानेगा देखना क्योंकि मैं उसके लिए भी कुछ लाया हूँ.
निर्मला- अच्छा और क्या क्या लाया है तू शहर से ?
मैं- वो उसके और मेरे मतलब की चीज़ है. तू नाईटी पहन ले जा, और लिपस्टिक और चूड़ी भी पहन लियो.
(दरअसल मैं दारु की बात कर रहा था, निर्मला नाईटी पहनती है, उसके साथ साथ अपने बड़े फुले हुए होंठों पर लिपस्टिक लगाती है और लाल चूड़ियाँ भी पहनती है, जब वो मेरे सामने आती है तो मेरा लण्ड एक दम से बौखला जाता है, उसके निप्पल नाईटी में साफ़ दिख रहे थे, उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, और वो नाईटी जालीदार थी तो अंदर का बदन साफ़ साफ़ दिख रहा था.
गाँव की औरत का गठीला बदन और सुडौल वक्ष उस नाईटी में बहुत ही कामुक और हिज़ड़े का लण्ड खड़े कर देने वाला लग रहा था, होंठों पर सुर्ख लाल लिपस्टिक, हाथों में चूड़ियाँ, पैरों में पजेब, माथे में बिंदिया, ऐसा लग रहा था जैसे कोई नई नवेली दुल्हन हो, लेकिन निर्मला ऐसे दृश्य में इस दुनिया की सबसे बड़ी रांड लग रही थी, जिसे देखकर कोई भी उसका भाव पूछ सकता था)
निर्मला- कैसी है ये बेटा.
मैं- उफ्फ्फ चाची, तू छा गयी सही में, दीवाना बना दिया तूने मुझे.
निर्मला- चुप बदमाश कहीं का. मुझे ये अच्छी ना लगी, इसमें पूरा बदन दिख रहा है, कमल देखेगा नाराज़ होगा.
मैं- रहने दे चाची, कमल को तुझ से ज्यादा मैं जानता हूँ, कहीं कमल को तू पसंद न आ जाये, हा हा हा
निर्मला- बड़ा बदमाश हो गया तू शहर में रह कर. हरामी कहीं का.
मैं- गाली मत दे चाची, वरना देख ले.
निर्मला- वरना क्या करेगा तू ?
(चाची मेरे बहुत करीब आ जाती है, उसकी साँसे मेरी साँसों से टकराती है, उसके विशालकाय स्तन मेरी छाती में दब जाते हैं)
निर्मला- बता क्या करेगा, बोल, चाची से जबान लडाता है
मैं- मैं कर दूंगा फिर मत बोलना, देख ले चाची
(मैं चाची के सुर्ख लाल होंठों को देखे जा रहा था)
निर्मला- हिम्मत है तो कर के दिखा ?
मैं- एक बार और गाली दे, तेरी कसम कर दूंगा.
निर्मला- हरामी कहीं का अब कर के दिखा, दे दी गाली
(तभी मैं चाची के दोनों हाथ की बाहें पकडकर उसके होंठ पर अपने होंठ रख देता हूँ, और काट देता हूँ, करीब 5 मिनट तक मैं उसके होंठ चूसता हूँ, उसमे से खून भी निकल रहा था मैं वो भी पी लेता हूँ, वो छुटने का प्रयास करती है लेकिन असफल रहती है)
निर्मला- हाय राम, हरामी क्या कर दिया तूने, होंठ काट दिया मेरा, शहर में ये सब सीखा तूने, कुत्ते इसलिए आया तू गाँव, अब कमल मेरे होंठ देखेगा तो क्या कहेगा
मैं- चाची, मैं प्यार करता हूँ तुझ से, तू बहुत सेक्सी है, शादी कर ले मेरे साथ, कमल को बेटा बना दे मेरा.
निर्मला- क्या बोलता है रे, ऐसा अनाप शनाप ना बोल, तू बेटे जैसा है मेरा, कमल के भाई जैसा है तू.
(फिर में चाची को पकड़ लेता हूँ और अपने सीने से जकड लेता हूँ, और उसके गालों, गले और कन्धों पर चूमने लगता हूँ और उसके गले में जोर से काटता हु जिससे उसके गले में निशान छूट जाता है)
निर्मला- अह्ह्ह्ह्ह.. हाये मार डाला काट दिया रे हरामी ने छोड़ मुझे हरामी, बदमाश, मादरचोद
मैं- चाची आज जी भर के प्यार कर लेने दे इस आशिक़ को, तू बहुत ही झबराहट लग रही है मेरी जान.
निर्मला- मत कर बेटा कुछ मेरे साथ, छोड़ दे मुझे भगवान के लिए. अह्ह्ह्ह्ह.. ओह्ह्ह्ह्ह.. ह्हह्हहररारामी!!!
(फिर मैं निर्मला की नाईटी जबरदस्ती फाड़ देता हूँ और उसके विशालकाय वक्ष को आज़ाद कर देता हूँ, उसके बूब्स झूलने लगते हैं, 50 साल की औरत के लटके हुए बूब्स बहुत मस्त लगते हैं और मैं उसके निप्प्ल को चूसने लगता हूँ, और दूध को निचोड़ने लगता हूँ)
निर्मला- अह्ह्ह्हह्ह्.. उफ्फ्फ्फ्फ.. पंडित बेटा, क्या करता है रेरेह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहिहो ऐसे ही चूस ले बेटा, चूस और चूस जोर जोर से चूस

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