चोदी चाची की प्यासी चूत

हेल्लो फ्रेंड्स, हाउ आर यू! मेरा नाम अमित है और मेरी उमर अभी नयी नयी है. यानी की जवानी की उमर है. मैं 22 साल का हूँ. मैं दिखने मे काफ़ी हॅंडसम हूँ. और तो और मैं बहोत ही मज़े से रहता हूँ. मैं अपनी फॅमिली के साथ ही रहता हूँ.

आज मैं आपके लिए कहानी ले कर आया हूँ जिसको पढ़ कर आपको बहोत मज़ा आने वाला है. तो कहानी शुरू करने से पहले थोडा बहोत मेरे बारे मे भी जान लीजिए. ताकि आपको दिक्कत न्ही होगी.

मेरा नाम तो जान ही गये हो. मैं कॉलेज मे जाता हूँ और अपनी स्टडी कर रहा हूँ. मैं दिखने मे काफ़ी हॅंडसम हूँ और मेरा रंग सावला है. मेरे लंड का साइज़ भी काफ़ी अच्छा है यानी की वो 6 इंच लंबा है और पागलो की तरह चूत के लिए तड़प्ता रहता है.

मैं अपनी फॅमिली साथ रहता हूँ और मैं अपनी फॅमिली से बहोत प्यार भी करता हूँ. मैं बहोत खुश भी रहता हूँ जब भी मैं अपनी फॅमिली साथ टाइम स्पेंड करता हूँ.

मैं ऐसे ही अपनी लाइफ बिताता हूँ. चलो अब ज़्यादा टाइम ना वेस्ट करते हुए मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ.

ये कहानी आज से कुछ समय पहले की है. इस कहानी को पढ़ कर आपको सबको बहोत मज़ा आने वाला है इसलिए अपने दिल थाम कर इस कहानी को पढ़ना शुरू कीजिए.

मेरे एक चाचा और चाची है. दोनो की शादी को 15 साल हो चुके है और उनके 2 बच्चे भी है. मेरे चाचा चाची साथ हमारी न्ही बनती थी क्योकि वो काफ़ी रिच थे और काफ़ी ईगो भी रखते थे.और उनकी नज़र मे हम उनसे कम थे.और होंगे भी क्यू न्ही क्योकि हमारे पास इतने पैसे कहा थे.

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तो ये तो नॉर्मल सी बात थी की उनके अंदर ईगो तो आना ही था.पर एक टाइम ऐसा आया जब चाचा चाची को हमारी ज़रूरत पड़ ही गई. मेरे चाचा जी का बहोत अच्छे वाला आक्सिडेंट हो गया था. वो 2 महीने से आई.सी.यू मे थे और उनके बचने के चान्सस भी बहोत कम थे. पर भगवान की कृपा से वो बच गये थे. उन्हे ज़्यादा तो लगी थी पर ऐसा वेसा कुछ न्ही हुआ था जिसका हमे डर था.

कहते है ना ‘जाको राखे सैया मार सके ना कोई’.

और ऐसे ही मेरे चाचा जी के साथ हुआ. और जब चाचा जी सीरीयस कंडीशन से बाहर आए तो मेरे पापा मम्मी भी काफ़ी खुश हुए. आख़िरकार खून का रिश्ता खून का रिश्ता ही होता है बेशक जितनी मर्ज़ी लड़ाई क्यू ना हो.

पर उनके समझने की पावर बहोत कम हो गई थी. तब मेरी फॅमिली उनसे मिलने गई थी और 3 -4 दीनो बाद डॉक्टर ने उन्हे डिसचार्ज के लिए कह दिया था और साथ मे यह भी कह दिया था की अब जो भी ट्रीटमेंट चलेगा वो आपके घर पर ही चलेगा.

अब डॉक्टर के कहने पर हम उनको अपने घर पर ले आए. हमे उन्हे घर पर ले जा कर बहोत अछा लग रहा था क्योकि अब सब मिल कर उनका ख्याल रख सकते है.अब ऐसे ही मैं चाचा जी के घर डेली जाया करता था. मैं डेली चाचा जी की पूरे मन से सेवा किया करता था और चाची के साथ भी काम मे हेल्प किया करता था.

मेरो चाची बहोत ही सेक्सी थी. उनका फिगर तो लाजवाब था उनको देख कर कोई कह न्ही स्कता था की वो 2 बच्चो की मा है.उन्होने अपने आपको बहोत अच्छे से मेनटेन करके रखा हुआ था.

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मैं चाची साथ मे खूब बाते भी करते थे और अपने भाई और बेहेन के साथ भी टाइम स्पेंड करता था. वो अभी स्कूल मे थे तो टाइम से आया करते थे और तो और बस ऐसे ही टाइम स्पेंड करता रहता था.

मैं चाचा जी को अच्छे से तयार भी करता था और उनको खाना भी मैं ही खिलाता था. पहले तो हमे बहोत ही अजीब लगता था और डर भी लगता था की कही चाचा जी को कुछ हो ना जाए .

पर हमने अपनी हिम्मत न्ही छोड़ी और उनका साथ देने लग गये. बस ऐसे ही चल रहा था और सब चले ही जा रहा था. मेरी चाची बहोत ही उदास भी रहने लग गई थी.उनके चेहरे को पढ़ कर समझा जा सकता था की उन्हे चाचा जी की टेन्षन हो रही थी.

मैं चाची को हसने के लिए उनसे खूब मस्ती मज़ाक भी किया करता था जिससे की वो काफ़ी ज़्यादा हॅपी फील करती थी. मैं चाचा जी साथ भी ऐसे ही किया करता था जिससे की वो अब जल्दी से रिकवर होने लग गये थे.

अब जब हमे पता चला की वो अब खुद को रिकवर कर रहे है और अब वो जलदी से ठीक भी हो जाएँगे तो हम सब बहोत खुश हो गये और भगवान से थॅंक्स करने लग गये. मैं और मेरे भाई बेहेन सब खुश थे पर चाची के चेहरे पर अभी भी मायूसी छाई हुई थी.

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