Bua Ki Beti Ki Choot Ki Pyas

जाते वक़्त मैंने नीलिमा को बोला- मिलते हैं शाम को..
तो वो भी मुझे खुश लगी।

रात को करीब 8.30 बजे मैं फूफा के घर पहुँचा। घर पहुँचते ही नीलिमा ने खाने के लिए बोला, उसने खाना तैयार कर रखा था।
हाथ-मुँह धोकर मैं और नीलिमा और उसका छोटा भाई खाना खाने बैठ गए।
खाना खाने के बाद हम टी.वी. देखने बैठ गए।

थोड़ी देर बाद नीलिमा ने बोला- भैया आज मुझे लैपटॉप में आप अपनी शादी की फोटो दिखाओ। सर्दी के दिन थे.. सो हम दोनों ने रज़ाई अपने पैरों पर डाल रखी थी।

मैंने लैपटॉप निकाला और उसको दे दिया।
वो फोटो देखने लगी और रज़ाई में ही मेरे पास सट कर बैठ गई।

वासना का भूत

मैं समझ गया कि आज रात दिल का अरमान पूरा होने वाला है.. जो होगा देख लेंगे।

वो मुझसे फोटो देख कर पूछती कि ये कौन है.. वो कौन है। मैं उसको बताने लगा। धीरे-धीरे मैंने अपना हाथ उसके स्तनों तक पहुँचा दिया। मैंने दबाया नहीं लेकिन सहलाने लगा।

उसको पता लग गया था.. लेकिन वो अनजान बनी चुप रही।
मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैंने उसके स्तनों को धीरे से दबा दिया।
उसने मेरी तरफ देखा, मेरी आँखों में तो वासना का भूत सवार था, आँखें एकदम सुर्ख लाल हो रही थीं.. साथ ही नशीली भी।

उसके देखने के तरीके में एक आमंत्रण था। उसने अपने छोटे भाई की तरफ इशारा किया, जो टीवी देख रहा था।

मैंने छोटे भाई को कहा- यार टीवी आवाज़ में डिस्टर्ब हो रहा है। हम दूसरे कमरे में चल जाते है.. तू आराम से देख।
वो कुछ नहीं बोला।

मैं और नीलिमा दूसरे कमरे में आ गए। वहाँ जाकर वापस उसी तरीके से हम बिस्तर पर बैठ गए और मैंने धीरे-धीरे अपना कार्यक्रम चालू किया।
नीलिमा का ध्यान पूरी तरह से मेरी तरफ हो गया।

मैं उसकी गर्म-गर्म साँसें महसूस करने लगा। इतने में नीलिमा ने मेरे गाल पर एक किस कर दिया और बड़े ही कामुक अंदाज में मेरी तरफ देखा।
फिर मैंने भी उसके होंठों पर अपने होंठ लगाए और एक लंबा किस किया और उसके चूचों को ज़ोर से मसल दिया।

अब हम पूरी तरह से तैयार थे.. मैंने धीरे से उसकी पैन्टी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा।
वो बिल्कुल बेकाबू हो गई थी।

लेकिन छोटे के कमरे से टीवी की आवाज़ आ रही थी, तो मैंने थोड़ा रुकना ठीक समझा।
15-20 मिनट बाद मैंने छोटू के कमरे में जाकर देखा तो टीवी चल रहा था.. लेकिन छोटू सो चुका था।

नीलिमा भी मेरे पीछे-पीछे आ गई थी। हम दोनों पूरी तरह निश्चिन्त हो गए कि छोटू अब सो गया है।

हम दोनों एक-दूसरे की तरफ मुस्कुराए, वापस हम दूसरे कमरे में आ गए।
अब हम पूरी तरह से फ्री थे।

मैंने नीलिमा को अपने गले से लगा लिया और एक लंबा चुंबन उसके होंठों पर किया.. साथ ही मैं उसके चूचे भी दबाता रहा। उसके चूचे काफ़ी सख़्त थे।
उसने शानदार गुलाबी गाउन पहन रखा था.. जिसमें वो बिल्कुल काम की देवी लग रही थी।
उसने सेंट भी लगाया हुआ था, शायद आज वो भी मौका नहीं छोड़ना चाह रही थी।

मैंने नीलिमा की गर्दन पर.. गालों पर होंठों पर चुम्बनों की बौछार कर दी.. वो बहुत गर्म हो गई थी। धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड को टटोलने लगा।

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