बिहार की गर्म कुंवारी चूत-1

नमस्ते मेरा नाम मन्नी है, मैं 23 साल का हूँ.. पूरे 6 फीट का हूँ। मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। अभी मैं मेडिकल का स्टूडेंट हूँ और कसरत करने का दीवाना हूँ। किशोरावस्था से ही जिम में कसरत करने के कारण मेरा कद इतना बढ़ गया।
मेरा लंड 18 की उम्र से ताकत बढ़ाने वाली दवाएं लेने के कारण मेरा लंड औसत से काफी बड़ा हो गया था।

गर्म कुंवारी बिहारन चूत
ये उस वक्त की बात है, मैं जब 19 साल का था।
हमारे खेतों में बिहार की एक लड़की काम कर थी और अब भी करती है। वो उस वक्त 23 साल की थी.. देखने में बहुत सुंदर है। उसका रंग गेहुआं है और नाम चांदनी है।

चांदनी 5.5 फिट की है। वो हमारे खेतों में ही अपने परिवार के साथ ही रहती है।

मेरे घर वाले ज्यादातर अमेरिका में रहते हैं, वो साल में एक बार ही आते हैं। इसलिए मेरे घर वालों ने चांदनी की माँ को मेरे कपड़े धोने और घर की साफ-सफाई के लिए रखा हुआ था और खाना मेरे दोस्त के घर से आता था।

चांदनी की 2 और बहनें हैं, वो अभी छोटी उम्र की हैं।

मेरे कसरती जिस्म के कारण गांव की हरेक लड़की मुझ पर मरती थी और चांदनी भी उनमें से एक थी।

अपनी बॉडी को अच्छा बनाए रखने के लिए मैं चुदाई वाली हरकतें.. जो जिस्म को कमजोर करने वाली होती है.. शादी तक कुछ नहीं करना चाहता था। बस कभी-कभी मुठ मार कर खुद को शांत कर लेता था क्योंकि मुझे मालूम था कि एक बार चूत का चस्का लग जाएगा.. तो चूत के बिना कुछ नहीं दिखाई देता।

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हमारे खेत घर के सामने हैं।

जब चांदनी के माँ-बाप को एक शादी के लिए 20 दिन के लिए बिहार जाना था। वो चांदनी और उसकी बहनों को यहीं पर छोड़ कर जा रहे थे।
वो चांदनी को घर पर काम की देखरेख करने के लिए छोड़ गए।

मेरे मन में तब चांदनी के लिए कोई बुरी सोच नहीं थी। चांदनी के घर वालों को भी ये पता था कि मैं सीधा और अच्छा लड़का हूँ।
मैं उनकी लड़की के साथ कुछ नहीं करूँगा।
पर वो क्या यह बात जानते थे कि उनकी लड़की ही मेरा लंड लेना चाहती है।

मैं कभी-कभी पोर्न फिल्म भी देख लेता था।
मेडिकल का स्टूडेंट होने के कारण सब कुछ पता भी था।

एक शाम बहुत तेज तूफान आया.. जिसके कारण चांदनी के झोपड़े की छत उड़ गई। तब मैं अपने खेतों में एक चौबारे में कसरत में लगा हुआ था।
तभी चांदनी भागती हुई आई।

पहले तो वो मेरी बॉडी पर पसीना और बॉडी के कट्स देख कर चौंक गई, फिर सहमी हुई बोली- मन्नी मेरे झोपड़े की छत तूफान के कारण उड़ गई।
मैं- कोई बात नहीं.. तुम अपना सामान उठाकर मेरी कोठी में रख लो।
पंजाब में बड़े घर को कोठी कहते हैं।

मैंने उसे कोठी के बाहर वाले कमरे में सामान ले आने के लिए कहा और मैंने उसको अपनी बहनों के साथ वहीं सोने की अनुमति दे दी।
वो सब मान गई।

चांदनी- मन्नी.. मेरे घर का सामान भारी भी है.. मैं अकेले नहीं उठा सकती.. मेरी मदद कर दो।
मैंने कहा- चलो मैं मदद कर देता हूँ।

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मैंने उसके झोपड़े की नई छत लगवाने का वादा भी किया।
उसने मुझे मुस्कुराते हुए मुझे ‘थैंक्यू’ कहा।

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