स्टूडेंट की सेक्सी मम्मी की मस्त चुदाई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है, आज में अपना एक सच्चा अनुभव लिख रहा हूँ और अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ. मुझे आशा है कि मेरी यह कहानी आप लोगों को बहुत पसंद आएगी. एक बार मेरे बगल वाले घर में एक परिवार कुछ महीनों के लिए नये-नये रहने आया था. उस परिवार में मियां – बीवी और उनका 18 साल का एक लड़का था, वो 8वीं क्लास में पढ़ता था. उनका लड़का स्कूल के बोरडिंग हाउस में रहकर पढ़ाई करता था और इस समय वो गर्मियों की छुट्टियों में आया हुआ था. उस लड़के के पिताजी मोहम्मद अंसारी जो कि करीब 48 साल के थे, उनकी बीवी का नाम तबसुम था, वैसे तो वो भी 35 साल के करीब थी, लेकिन बहुत ही सुंदर और गदराये बदन वाली थी. उनकी दूसरी शादी हुई थी, उनकी पहली वाईफ मर चुकी थी, वो सरकारी कर्मचारी थे.

हम दोनों सरकारी कर्मचारी होने के कारण एक दूसरे के घर आकर गप्पे मारा करते थे या फिर शतरंज खेला करते थे. में उन्हें अंकल कहकर बुलाता था और उनकी बीवी को भाभी कहता था. अंकल उनको चोद नहीं पाते थे, उनकी वाईफ काफ़ी सेक्सी थी, उनके बड़े-बड़े चूतड़ और चूचीयों को देखकर किसी का भी मन उसे चोदने के लिए तड़प उठता था. वो अक्सर मुझे सेक्सी निगाहों से देखती थी, कभी-कभी तो उसकी आँखे वासना से भरी नजर आती थी और बातें करते हुए मुझे देखकर कभी अपने होंठो को दाँतों से दबाती थी. कभी अपने होंठो पर बार-बार अपनी जीभ फैरती थी.

फिर एक दिन बातों-बातों में उन्होंने कहा कि राहुल जी युनुस (उनके लड़के का नाम है) के पापा को तो समय ही नहीं मिलता है और अगर तुम्हारे पास टाईम हो तो शाम को उसे गणित पढ़ा दिया करो. तो तब मैंने कहा कि मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है, में शाम को पढ़ाने आपके घर आ जाऊंगा. फिर में रोज शाम को आंटी के घर युनुस को पढ़ाने जाने लगा. अब मेरी आंटी से काफ़ी बात होने लगी थी. अब जब भी में उसके लड़के को पढ़ाता तो वो मेरे पास ही बैठी रहती थी.

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अब मैंने उसकी तरफ ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया था. तो तब मैंने महसूस किया कि वो अब मेरे सामने काफ़ी सेक्सी कपड़े पहनती थी. वो जब कभी साड़ी पहनती है तो उसका ब्लाउज काफ़ी कसा हुआ होता था, जिसकी वजह से उसकी 36 साईज की चूचीयाँ तनी हुई रहती थी और साड़ी भी चूतडों पर भी काफ़ी कसी हुई रहती थी. उसकी चूचीयाँ बहुत बड़ी-बड़ी थी जिसे देखकर ही मेरा लंड बुरी तरह से खड़ा हो जाता था और वो जब कभी सलवार पहनती थी तो वो भी बहुत कसी हुई होती थी और कमीज लो-कट वाले गले से उसकी चूचीयाँ बहुत ही सेक्सी लगती थी और उसकी गांड भी एकदम कसी हुई रहती थी. उसकी गांड का साईज भी 44 था और कमर 34 थी, वो पूरी की पूरी जबरदस्त माल लगती थी.

मेरा मन करता था कि जाकर दबोच लूँ और उसकी गांड और चूत में अपना लंड पेल दूँ, लेकिन संकोच के मारे मेरी हिम्मत नहीं बढ़ रही थी. फिर एक दिन जब में उसके लड़के को पढ़ा रहा था, तो वो मेरे सामने वाले सोफे पर बैठी थी. उस दिन उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और बहुत ही कसा हुआ ब्लाउज पहना था, ऐसा लगता था कि वो उसकी चूचीयों की साईज से काफ़ी छोटा था.

में थोड़ी-थोड़ी देर में आंटी पर नजर डाल रहा था और कभी-कभी उससे नजर भी मिल जाती थी, तो वो केवल मुस्कुरा देती थी. उस दिन वो कोई किताब पढ़ रही थी और फिर जैसे ही फोन की घंटी बजी तो उसके हाथ किताब गिर गई. फिर वो उसको उठाने की लिए झुकी, उउउफफफ्फ़ क्या गजब का नज़ारा था? एकदम कसी हुई दो बहुत ही मोटी गोल-गोल, गोरी-गोरी चूचीयाँ मेरे सामने थी. उसने ब्लाउज बहुत ही गहरे गले का पहना था, तो उसकी चूचीयाँ का काफ़ी भाग दिखाई दे रहा था.

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फिर जब मेरी और उसकी नजर आपस में मिली, तो वो समझ गयी थी कि में बड़े गौर से उसकी चूचीयों को निहार रहा था. तब वो मुस्कुराकर फिर से किताब लेकर पढ़ने लगी, लेकिन उसने अपनी साड़ी का पल्लू ऊपर नहीं किया था. अब उसकी कसी हुई मोटी चूचीयाँ ब्लाउज से कसी हुई साफ दिख रही थी. फिर वो ऐसे ही काफ़ी देर तक पढ़ती रही और मेरे लंड का बुरा हाल बना रही थी. फिर वो बाद में उठकर चली गयी. फिर अगले हफ्ते जब में उसके घर गया तो पता चला कि उसका लड़का अपने फ्रेंड के बर्थ-डे में गया हुआ था, इसलिए मैंने आंटी से कहा कि ठीक है तो में चलता हूँ. तब वो बोली कि चले जाना, थोड़ी देर रूको तो सही, तो में रुक गया. फिर मैंने उसको गौर से देखा तो उसने आज नाइटी पहनी हुई थी, वो भी काफ़ी पारदर्शी थी और उसके अंदर का सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था. उसने अंदर काली ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी, उसकी पेंटी तो उसके चूतडों में एकदम फंसी हुई थी, ऐसा लगता था की वो केवल ब्रा और पेंटी में खड़ी हो.

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