बिहार की गर्म कुंवारी चूत-1

मैं उसे अनसुना करके छक्के लगाता रहा। कुछ ही देर में उसको भी मजा आने लगा था और वो भी पूरा साथ दे रही थी।
उसकी मादक ध्वनियाँ ‘आआहह.. ईईई..’ मुझे बहुत मधुर लग रही थीं।

इस बार मैं कुछ देर तक उसकी चूत चोदता रहा, फिर मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
मैंने उसको सुबह 4:30 तक पेला, फिर मैं थक कर सो गया।

दूसरे दिन मैं सुबह 10 बजे उठा तो देखा कि चांदनी नहीं थी। मैंने सोचा कि वो घर का काम कर रही होगी। पर जब मैंने चादर की ओर देखा और चांदनी को जोर से आवाज लगाई।

जब वो आ रही थी तो मैंने देखा कि उसे चलने में तकलीफ हो रही थी।
वो आई और मुस्कुरा कर बोली- बोलो मेरे राजा क्या हुआ?

मैंने हँसते हुए कहा- जानू.. तेरी हालत देखकर तुझे कुछ कहने का मन नहीं कर रहा। तूने चूत मरवा तो ली.. सील भी खुलवा ली.. अब यह खून वाली चादर और मेरा लंड तो धो दो।
चांदनी हँसती हुई बोली- तो खुद से धो लो.. किसने मना किया है।
‘मैं अभी बताता हूँ तुझे साली..’

मैं चांदनी के पीछे कोठी में पीछे भागने लगा। फिर उसे पकड़ कर दीवार से लगा कर लंबा चुम्मा किया और उसे चादर धोने के लिए कहा।

इसके बाद मैं नित्य क्रिया से फारिग होकर कसरत करने चला गया।

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा कि मैंने कैसे चांदनी के साथ खेत में रात गुजारी और उसे उसकी शादी के पहले तक कैसे चोदा।

कैसे वो अपने ससुराल जाने से पहले बिहार की चूत को.. बिहार की चूतों में बदल गई।

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