भाभी और ननद की लेज़्बीयन प्रेम कहानी

मेरा नाम प्रीति है, और मैं पुंजब की रहने वाली हू. मेरे परिवार में पापा, भैया, मों और भाभी रहते है. पापा और भैया काम के चक्कर में ज़्यादा बाहर ही रहते है, और घर में मैं, मों, और भाभी होते है.

मैने देसीकाहानी पर भाभी के साथ लेज़्बीयन सेक्स स्टोरी रेड करी, जिसे रेड करने के बाद मेरे भाभी के प्रति ख़याल चेंज हो गये थे, और मैं मॅन ही मॅन अपनी भाभी के साथ लेज़्बीयन करना चाहती थी.

मैं अपनी भाभी के बारे में तो आपको बताना भूल ही गयी. मेरी भाभी का नाम अलका है, और उसके बूब्स का साइज़ 34″ और गांद 36″ की है. रंग उसका फेर है, और जब वो जीन्स त-शर्ट पहनती है, तो क्या मस्त माल लगती है.

एक दिन घर पे कोई नही था. मों किसी काम से रिलेटिव के यहा गयी थी. मैं और भाभी घर पे अकेले थे. मैं सीधा भाभी के रूम में गयी, बुत भाभी वाहा नही थी. तो मैने सुना की बातरूम से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी.

फिर मैं बातरूम के पास गयी, और मैने बातरूम का कीहोल देखा. अंदर का क्या मस्त नज़ारा था. भाभी पूरी नंगी खड़ी थी, और अपनी उंगली को अपनी छूट के अंदर-बाहर कर रही थी, और आ उफ़फ्फ़ आ अफ की आवाज़े निकाल रही थी. भाभी की छूट एक-दूं गुलाबी और सॉफ थी, और वो एक हाथ से अपने बूब्स को भी मसल रही थी.

ये सब नज़ारा देख कर मैं भी अपने लोवर में उंगली डाल कर अपनी छूट को रग़ाद रही थी, और मुझे भी अब मज़ा आने लगा था. भाभी भी अब ज़ोर-ज़ोर से छूट में उंगली कर रही थी. कुछ देर में भाभी की छूट ने पानी निकाल दिया.

इधर मेरी भी छूट गीली हो गयी थी, और उसने ने भी पानी छ्चोढ़ दिया था. फिर मैं चुपके से वाहा से अपने रूम में आ गयी. कुछ देर बाद भाभी भी नहा कर और कपड़े पहन कर बाहर आ गयी. भाभी ने सलवार सूट पहना था, जिसमे वो बहुत सेक्सी लग रही थी.

मेरी आँखों के सामने अभी भी वही सीन चल रहा था. फिर भाभी छाई लेकेर मेरे रूम में आ गयी, और हम दोनो छाई पीने लगे और बातें करने लगे. भाभी मेरे से पूच रही थी-

भाभी: कॉलेज कैसे चल रहा?

तो मैने कहा: ठीक है.

फिर मैने सोचा की अभी मौका था, और भाभी भी प्यासी थी, और घर में भी कोई नही था. तो यही सही टाइम था. फिर मैने झट से भाभी को अपनी बाहों में लिया, और उनके होंठो पे किस करने लगी.

अचानक हुए इस वॉर से भाभी भी चौंक गयी, और वो मुझे पीछे धक्का देने लगी.

वो बोली: ये तुम क्या कर रही हो प्रीति? छोढ़ो मुझे.

बुत मैं भाभी को लीप किस किए जेया रही थी. फिर थोड़ी देर में भाभी भी नॉर्मल हो गयी, और मेरा साथ देने लगी. शायद भाभी को भी अब मज़ा आ रहा था. फिर मैं भाभी के सूट के उपर से ही उसके बूब्स को प्रेस करने लगी.

कुछ देर भाभी ने मुझे अपने से डोर किया और बोली: ये तुम क्या कर रही हो? ये ठीक नही है.

मैं बोली: जो तुम आज बातरूम में कर रहे थी, वो भी ठीक नही था.

तो भाभी बोली: तुझे कैसे पता मैं बातरूम में क्या कर रही थी?

मैने बोला: मैने आपको ये करते हुए देख लिया था.

तो भाभी बोली: प्लीज़ किसी को बताने मत. तुझे तू पता है तेरे भैया काम के चक्कर में अक्सर घर से बाहर रहते है, और मुझे छोड़ भी नही पाते. और मैं ऐसे ही तड़पति रहती हू.

फिर मैने कहा: भाभी आप टेन्षन मत लो. आज से मैं आपकी छूट को शांत किया करूँगी.

ये बात बोल कर मैं भाभी को फिर लीप किस करने लगी, और भाभी भी अब मेरा साथ दे रही थी. कुछ देर बाद मैने भाभी की सलवार और सूट उतार दिए. अब भाभी ब्रा और पनटी में क्या मस्त लग रही थी. बड़े-बड़े बूब्स ब्रा से बाहर आ रहे थे.

मैने फिर उनकी पनटी और ब्रा भी निकाल दी. भाभी अब मेरे सामने पूरी नंगी थी. मैं भाभी के बूब्स मूह में लेके चूसने लगी. भाभी भी मस्त हो रही थी. बूब्स चूस्टे-चूस्टे मैं भाभी की छूट को भी सहला रही थी, जिससे भाभी की भी छूट गीली हो रही थी. फिर मैने भाभी को बेड पे लिटा दिया, और उसकी छूट पे अपने लिप्स रख के भाभी की छूट चाटने लगी.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था भाभी की पिंक छूट चाट कर, और मैं अपनी जीभ को भाभी की छूट के अंदर-बाहर कर रही थी. भाभी भी अब आ अफ एयेए ऊओ एयेए की आवाज़े निकाल रही थी.

वो बोली: प्रीति बहुत मज़ा आ रहा है. चाट, बहुत प्यासी हू मैने भी.

अपनी उंगली मैं भाभी की छूट के अंदर-बाहर करने लगी, जिससे भाभी और उत्तेजित हो गयी. फिर मैने अपनी उंगली की स्पीड तेज़ कर दी, और कुछ देर भाभी की छूट ने सारा पानी छ्चोढ़ दिया, और मैं वो सारा पानी पी गयी. मैने उनकी छूट को चाट के सॉफ कर दिया.

फिर भाभी मुझे लीप-किस करने लगी, और मेरे बूब्स को प्रेस करने लगी. मुझे भी अब मज़ा आ रहा था. भाभी ने मुझे बहुत लोंग स्मूच किया और फिर वो मेरे बूब्स को देख बोली –

भाभी: प्रीति तेरे बूब्स बहुत बड़े है.

मैं बोली: भाभी आपसे तो छ्होटे है.

फिर वो बूब्स को मूह में लेके सक करने लगी, और साथ में मेरी छूट को उपर से सहला रही थी जिससे मेरी हालत पतली हो रही थी. कुछ देर बाद भाभी मुझे बेड पे लिटा के, मेरी टाँगो को उपर करके, मेरी छूट को चाटने लगी और एक हाथ से मेरे बूब्स को प्रेस कर रही थी.

भाभी ऐसे मस्त छूट चाट रही थी, जिससे मुझे बहुत आनंद आ रहा था. तो मैं मदहोश हो रही थी. फिर भाभी ने मेरी छूट में उंगली करनी स्टार्ट कर दी. छूट टाइट होने के कारण मुझे दर्द भी हो रहा था. लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था. भाभी अब ज़ोर-ज़ोर से मेरी छूट को छोड़ रही थी, जिसके कारण मेरा भी काम होने वाला था.

फिर कुछ देर बाद मेरी छूट ने सारा पानी छ्चोढ़ दिया, और भाभी भी मेरी छूट का सारा पानी पी गयी. फिर दोनो ने कुछ देर फिरसे सेक्स किया. उस दिन हमने 2 बार सेक्स किया.

होप आपको मेरी स्टोरी अची लगी होगी. अगर अची लगे तो मुझे मैल करके अपने रिव्यू ज़रूर देना. मिलते है इस स्टोरी के अगले पार्ट में. तब तक के लिए बाइ.

यह कहानी भी पड़े  लेज़्बीयन लड़कियों का वेटर के साथ थ्रीसम


error: Content is protected !!