बेटी ने मा के लिए अपने प्यार का इज़हार किया

जब भी मों किचन में या कुछ काम कर रही होती, तो मैं उन्हे टच करती, उन्हे पीछे से हग करती. मैं मों को देख कर एग्ज़ाइट हो जाती. मॅन ही मॅन मैं उनसे प्यार करने लगी थी. मैं उनकी बॉडी को न्यूड देखना चाहती थी, और चान्स ढूँढ रही थी. पर मिल नही रहा था.

एक दिन जब मेरी तबीयत कुछ अची नही थी, तो मैं कॉलेज से वापस जल्दी आ गयी. मैने अपनी के से लॉक खोला. मुझे लगा मों सो रही होगी, तो मैने आवाज़ नही दी, और गाते लॉक करके अपने रूम में चली गयी.

मैं बाग अपने रूम में रख कर वापस रूम में आई, तो मुझे उपर मों के रूम से शवर की आवाज़ आने लगी. तो मेरे मॅन में कुछ अजीब सा फील हुआ, और मैं दबे पावं के साथ उसके रूम में गयी. गाते क्लोज़ था, पर लॉक नही.

मैने हल्का धक्का दिया, तो खुल गया. मैने अंदर एंटर किया, तो रूम में अंधेरा था. पर बातरूम से हल्की सी रोशनी आ रही थी. मैने गौर किया, तो बातरूम का गाते खुला था, और अंदर से शवर के साथ-साथ मों की गुनगुनाने की आवाज़ भी आ रही थी. शायद मों को लगा की अभी घर में कोई और नही था, तो उसने गाते लॉक नही किया होगा.

बेडरूम में अंधेरा होने की वजह से अंदर की चीज़े आराम से दिखती, पर बातरूम में से बेडरूम उतना आचे से नही दिखता. मैने धड़कट्ी हुए दिल के साथ गाते को हल्का ओपन किया, तो ओह मी गोद. मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी. मेरी हेरोयिन मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी. क्या मखमली सा बदन, कोमल से लिप्स, और मस्त काससे हुए बूब्स. मेरी तो आँखें फटी सी रह गयी.

फिर जब नीचे नज़र पड़ी, तो उनकी छूट आज भी किसी जवान लड़की जैसी थी. हल्के से बाल थे उपर, पर मस्त लग रही थी. ये देख कर मेरा हाथ मेरी छूट के उपर चला गया. मैने उस दिन मों को नहाते हुए देखा, और मेरे अंदर उनको पाने की चाहत होने लगी. उस दिन से मेरा मों को देखने का नज़रिया ही पूरा चेंज हो गया.

जब वो किचन में होती, तो मैं उनको पीछे से हग करती, और उनके बूब्स को हल्का सा दबा देती. कभी उनकी गांद पे अपनी छूट को रब करती. पर मों का कुछ रेस्पॉन्स नही मिलता. यहा पे मेरे लड़की होने का ये फ़ायदा था, की मैं मों को ऐसे टच करती तो वो माना नही करती.

पर एक नुकसान भी था, की अगर मेरी जगह मों को उनका बेटा ऐसे टच करता तो मों को ये मेसेज तो जाता की उनका बेटा उनमे इंट्रेस्टेड था, और उनके साथ फिज़िकल होना चाहता था. पर मैं लड़की थी, इसलिए मेरे लिए ये तोड़ा मुश्किल था.

जैसे-जैसे मैं मोबाइल पे लेज़्बीयन वाला वीडियो देखती, वैसे मेरी मों को पाने की इक्चा बढ़ती जाती. मैं जब भी मौका मिलता, तब मैं उनको आचे से टच करती, और बहुत बार मैने उनको ई लोवे योउ भी कहा. उनको मेरी इंटेन्षन पता चला की नही, वो मुझे पता नही था. पर काश मैं मेरे दिल की बात मों को बता पाती. और मेरे बताने के बाद वो क्या रिक्ट करेंगी, ये भी तो डाउटफुल था.

मैं मों को नंगा तो देख चुकी थी, अब मुझे उनको सेक्स करते हुए देखना था. पर वो दोनो उपर अपने बेडरूम में करते थे. इसलिए मेरी ये विश पूरी नही हो पाई. फिर लॉक्कडोवन् के चलते हमे इंडिया शिफ्ट होना पड़ा, और यहा घर में ज़्यादा कमरे नही थे. इसलिए मुझे आख़िर-कार वो मौका मिल ही गया.

पापा की कल रिटर्न फ्लाइट थी फॉरिन की, और उन्हे पुरानी जॉब, घर सब वाइंड-उप करके आना था. इसलिए वो वाहा फॉरिन में कुछ महीना रुक के वापस इंडिया आने वाले थे. इसलिए मों की एक आखरी चुदाई तो बनती थी. और मेरा अंदाज़ा सही निकला. मैने हेडएक का बहाना बना कर जल्दी सोने का नाटक किया, और फिर रात को पापा ने मों को अपने उपर चढ़ाया.

पापा का लंड आवरेज साइज़ का था. मों उसके उपर जंप करती थी. उसे देख कर मुझे उस पर और भी प्यार आ रहा था. क्या सेक्सी माल, कितना मस्त बॉडी, और कैसे मस्त हिलती हुई अपनी गांद मतकाती हुई क्या बॉम्ब लग रही थी. मैं एंजाय कर ही रही थी, की पापा का झाड़ गये जल्दी, और उन्होने मों को नीचे उतार दिया. और वो रेस्ट करने लगे.

मों ने उनके लंड को हाथ से हिलाया, अपने मूह में लिया, अपनी छूट से रगड़ा, पर कुछ नही हुआ. मों अभी भी प्यासी लग रही थी. मुझे ये देख कर अछा नही लगा. पापा कुछ देर के बाद सो गये, और मों उठ कर किचन में आई. आज तो मुझ पर जैसे सेक्स का भूत सॉवॅर था, तो मैं भी मों के पीछे-पीछे किचन में चली गयी, और उनको पीछे से जाके दबोच लिया.

वो निघट्य में थी, ब्रा नही पहनी थी, तो इस बार हाथ सीधा उनके बूब्स पे लगा, और निपल फील होने लगे. मैं निपल्स को उंगलियों में भर कर मसालने लगी. मों ने पीछे मूड के देखा और मुझे देख कर अपने आप को च्चूधा लिया, और मुझे डाँटने लगी.

अनु: कायरा, ये तुम क्या कर रही हो? होश में तो हो? तुम्हे पता भी है की तुम ये क्या कर रही हो? पिछले कुछ दीनो से मैं तुम्हे नोटीस कर रही हू.

मों मुझे कुछ ना कुछ बोले जेया रही थी, पर मैं उनकी बॉडी को देखे जेया रही थी. क्या कट्स है उनके, क्या शेप है. मेरी नॅज़ारो ने उनकी छूट, बूब्स को ताड़ते हुए मेरी नज़र उनके रसीले होंठो पर पड़ी. उनके हिलते हुए होंठ को देख कर मेरा कंट्रोल नही रहा, और मैने उनको अपने मूह में भर लिया. मों भी सर्प्राइज़्ड थी, पर मैं अपनी पकड़ से उनके हाथो को पकड़ के उन्हे स्मूच करने लगी.

मों झटपटाने लगी. पर मैने उन्हे कस्स के पकड़ रखा था. पता नही मुझमे भी आज इतनी हिम्मत कहा से आ गयी थी. कुछ देर बाद मों ने अपने आप को मुझसे अलग किया, और मुझे एक छाँटा मारा.

मों: कायरा, तू होश में तो हैं? ये तू क्या कर रही थी? मैं मा हू तुम्हारी (और रोने लगी).

कायरा (रोने सी सूरत बना कर): मैं क्या करू मों. तुम्हे देख कर अब कंट्रोल नही होता, ई लोवे योउ मों. मुझे तुम पहले से पसंद हो. पर आज देखा की जो हॅपीनेस आपको मिलनी चाहिए, वो नही मिल रही थी.

मों: क्या मतलब है तुम्हारा?

कायरा: मैने देखा अभी आपको बेडरूम में. पापा आपको पूरा सॅटिस्फाइ नही कर पाते. और ये मुझसे देखा नही जेया रहा.

मों: तुझे शरम नही आती, अपने मों-दाद को इस तरह से देखते हुए?

कायरा: शरम आपको भी नही आती फिंगरिंग करते हुए बातरूम में. और मों मैं दाद को नही, सिर्फ़ आपको देख रही थी. आप जानते तो हो, पर मानते नही हो की आपको सेक्षुयल सॅटिस्फॅक्षन की ज़रूरत है. और उसी में मैं आपकी हेल्प करना चाहती हू.

मों: मैं सॅटिस्फाइड ही हू. तुझे मेरी चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है. मैं जैसी भी हू, अची हू. तुम्हे किसी आचे से डॉक्टर को दिखाने की ज़रूरत है. फिलहाल तू मेरा रास्ता छ्चोढ़. अभी तू होश में नही है, फिर बात करेंगे.

मैं मों मों सुनो, ऐसा चिल्लाने लगी. पर वो अपने बेडरूम में चली गयी, और मैं भी अपने रूम में जेया कर मों की नंगी बॉडी को इमॅजिन करके फिंगरिंग करते हुए सो गयी. दूसरे दिन से मों का बिहेवियर मेरी और चेंज हो गया था.

वो मुझसे सिर्फ़ काम की ही बातें करने लगी. कल पापा की फ्लाइट थी, वो भी चले जाएँगे. तब मैं और मों घर में अकेले होंगे, तो मैं फिरसे चान्स मारूँगी.

कुछ दिन बाद, “कल मामा मुझे पार्टी देने वाले है अपनी फ्रेंड के साथ. तो मैं उनको घुमा फिरा के पूछूंगी, की उनकी सिस्टर को कैसे पाटता जाए”

यहा पे ये लास्ट बात कायरा ने लिखी थी. और उसके दूसरे दिन बाद मैने उसकी मों को छोड़ा अपने बेडरूम में. अब आयेज की डाइयरी मुझे जाननी थी, क्यूंकी मुझे अब कायरा की छूट की तलब होने लगी. मैं उस नाइट कायरा को इमॅजिन करके मूठ मारी और सो गया.

दूसरे दिन मैं उसे मॉर्निंग में कॉलेज के बाहर मिला. फिर उसको उसका फोन दिया, और दूसरा मोबाइल दिया पुराना वाला, और उससे कहा-

मैं: अपने पुराने फोन का दाता इसमे ट्रान्स्फर कर ले. मैं शाम को ये लेने अवँगा. मुझे मोबाइल वाले चाचा को ये लौटना है. और उन्ही से अभी मैं ये सेकेंड फोन लाया हू.

फिर शाम को मैने उससे उसका ओल्ड मोबाइल फोन ले लिया. फिर नाइट को वापस मैं उसके घर गया, और उससे वो दूसरा फोन लेकर दी के सामने ही कायरा को दिया. जिससे दी कायरा को कोई क्वेस्चन ना करे. उस टाइम मैने कायरा को अपनी डाइयरी लिखने का ईज़ी वे बताया, और उसे गूगले ड्राइव पे वर्ड फाइल बना के दिखाया. एक फोल्डर बनाया जिसे मी डाइयरी नाम दिया, और कायरा को सिखाया, ये कैसे करना था.

उसको मैने बताया की ये फोल्डर उसके एमाइल ईद से लिंक होगा, मतलब की वो कितना भी मोबाइल चेंज करे, ये हमेशा वही रहेगा. और मैने उस फोल्डर को अपनी एमाइल ईद के साथ शेर किया, जिससे वो जो भी उसमे लिखेगी, मैं ईज़िली अपनी एमाइल ईद से उसको रेड कर सकूँगा.

उस नाइट मैं दी को बिना कुछ किए ही वापस आ गया. अब मेरा टारगेट मों से हॅट कर बेटी पे शिफ्ट हो गया था.

बाकी कहानी नेक्स्ट स्टोरी में. स्टोरी पे कॉमेंट्स/लीके कीजिए, और हमारी एमाइल ईद लज़्यलीहास@गमाल.कॉम पे आप मैल भी कर सकते हो.

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