बड़ी साली की दबी हुई अन्तर्वासना-2

वो बोली- ये क्या कर रहे हो?
ऐसा कहते हुए भाभी की आवाज में विरोध नहीं बल्कि मादकता भरी हुई थी. मैंने उसकी बंद आंखों को भी ऊपर से चूम लिया. मेरे ऐसा करते ही वो मचल सी गयी. वहां से उठने की कोशिश करने लगी. मगर मैंने उसको उठने नहीं दिया.

जब वो छुड़ाने की कोशिश करते हुए चलने लगी तो मैंने उसको वापस से अपनी तरफ खींच कर उसको अपनी बांहों में भर लिया. उसके मादक और मांसल शरीर यह मेरा स्पर्श था. जिसको छूने भर से ही मेरी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गई थी.

वो बोली- छोड़ो मुझे!
मैं जानता था कि उसका ये विरोध केवल दिखावा मात्र था. उसके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि वह अंदर से गर्म हो चुकी है. मैंने उसको जोर से अपनी बांहों में जकड़ते हुए उसको गालों को जोर लगा कर चूम लिया. मेरी हवस बढ़ती ही जा रही थी.

फिर मैंने उनके माथे को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथों से उनकी पीठ और चूतड़ों को रगड़ कर सहलाने लगा. कुछ पल ऐसे ही चूमने पर वो और भी मदहोश हो गयीं और अपना दिखावटी प्रतिरोध छोड़ कर उन्होंने भी मेरी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया. मेरी पीठ को प्यार से अपनी बांहों से सहलाते हुए वो मुझसे और जोर से लिपट गयीं. मैंने मौका देखते ही उनके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और हम एक दूजे में खो गए.

काफी देर तक हमने एक दूसरे के होंठों को चूसा और इस बीच मैं बराबर उसके चूतड़ों को मसलता रहा. उनको बांहों में लिये हुए ही मैं उनको बिस्तर के पास ले गया और उसको आहिस्ता से बेड पर लिटा कर खुद भी उसके ऊपर लेट गया. मेरी छाती उसके चूचों पर रखने के कारण उसके चूचे मेरी छाती के नीचे दब गये जिनका स्पर्श मुझे पागल करने लगा.

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अपने बदन को मैंने उसके बदन से जोर से रगड़ना शुरू कर दिया. अब तो जैसे दोनों ही वासना के सागर में डूब से गये थे. उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी गर्दन और उसके ऊपरी हिस्से को मैं चूमता रहा और वो मुझे अपनी बांहों में लपेटती रही.

उसके बाद मैंने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया और उसके भारी स्तनों को ऊपर से ही दबाने लगा. फिर मैंने एक-एक करके उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिये और उसका ब्लाउज निकाल दिया. उसने नीचे से एक प्रिंटेड ब्रा पहनी हुई थी.

देर न करते हुए मैंने उसकी ब्रा को भी खोल दिया और उसके स्तन मेरे सामने नंगे हो गये. पहले मैंने उसके स्तनों को जोर से दबाया और फिर बारी-बारी से मुंह में लेकर उनका रस चूसने लगा. मेरी जीभ जब उसके निप्पलों पर लग रही थी तो उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.

इसके बाद मैंने एक-एक करके उसकी साड़ी और पेटीकोट को भी निकाल दिया. अब मेरी भाभी मेरे सामने एकदम से नंगी लेटी हुई थी. मैंने भी जल्दी से अपने सारे कपड़े निकाल दिये और हम दोनों के बदन अब बिल्कुल नंगे हो गये थे. मैं उसके बदन से लिपट गया.

हमारे बदन इतने गर्म हो चुके थे कि मानो दोनों के बदन से जैसे अंगारे निकल रहे हों.

कुछ देर तक अपने नंगे शरीर को उसके नंगे बदन पर रगड़ने के बाद मैंने उसकी जांघों के पास हाथ कर लिया. मैं उसकी जांघों के पास जाकर बैठ गया और उसकी योनि में उंगली डाल दी. उंगली डालते ही वो उछल पड़ी.

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जैसे ही उंगली उसकी योनि में गई तो उसके मुंह से जोर से आह्ह निकल गई. मैं उसकी योनि को धीरे-धीरे करके मसलने लगा. उसकी योनि को मसलने और सहलाने के बाद मैंने उसकी योनि से टपक रहा रस अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर उसकी योनि को चाटने के बाद मैंने उसको अपने बदन पर लिटा लिया और वो मेरे सीने पर आकर जोर से मुझसे लिपट गई. वो मेरे सीने को चूमने लगी. मैं अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को सहलाता रहा. वो काफी देर तक मेरे सीने को चूमती रही और चूसती रही.

उसके बाद मैंने उसको अपने बदन पर नीचे सरका दिया और अपने लिंग को उसके मुंह की तरफ कर दिया. मेरा इशारा वो समझ गयी थी लेकिन उसने ना में गर्दन हिलाते हुए मेरा लिंग चूसने से मना कर दिया. मैंने भी उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की.

इसके बाद मैं उसके ऊपर आ गया और मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो एकदम से सिहर उठी. मैंने उसकी गर्दन को चूमना शुरू किया और फिर एक झटके में नीचे से अपना लिंग उसकी योनि में धकेल दिया. उसके मुंह से एक जोर की आह्ह निकल गई.

अब मैं धीरे-धीरे उसकी योनि में धक्के लगाने लगा और उसके गालों और होंठों को चूमते-काटते हुए उसकी योनि का चोदन करने लगा. वो भी अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी. मैंने भाभी को अपनी बांहों में कस कर जकड़ रखा था.

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