अनजान औरत के साथ ट्रेन में सेक्स का मजा

करीब 3-4 मिनट बाद मैंने उसे वाशबेसिन पकड़ा कर झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड खुलकर मेरी तरफ आ गई। मैंने सीधे ही उसके थूक से भीगा हुआ लण्ड एक जोरदार झटके के साथ उसकी चूत में उतार दिया। इस अचानक हमले के लिए वो तैयार नहीं थी इसलिए उसके मुँह से जोरदार आह निकल गयी उम्म्ह… अहह… हय… याह… और बोली- जरा आराम से करो।

मैं लगातार उसे चोदता रहा और उसके झूलते हुए दोनों बूब्स को जोर जोर से दबा रहा था। उसके मुँह से आवाजें निकल रहीं थी पर वो अपना मुँह बन्द किए हुए थी इसलिए सिर्फ हल्की हल्की ऊॅह ऑह आह उऊऊॅऊॅ की आवाज आ रही थी. ये आवाजें मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहीं थीं।

रेलगाड़ी अपनी पूर्ण रफ्तार से चल रही थी और मैं भी उतनी ही रफ्तार से चोद रहा था। फिर करीब 4-5 मिनट बाद उसे खड़ा करके उसका एक पैर वाशबेसिन पर रख दी और खड़े होकर चुदाई करने लगे।
और कुछ ही देर बाद आयशा की चूत ने पानी छोड़ दिया, वो बोली- अब बस करो, मैं थक गयी हूँ.
मैं बोला- बस थोड़ी देर और … मेरा भी होने वाला है.
मैं उसे उसी मुद्रा में चोदता रहा।

तभी किसी ने टोयलेट का दरवाजा खटखटाया. हम दोनों की गाण्ड फट गयी। मैंने मुँह पर उंगली रखते हुए शान्त रहने का इशारा किया।
कुछ देर बाद मैं कड़कती आवाज में बोला- कौन है?
बाहर से आवाज आई- कुछ नहीं भाई, चैक कर रहा था. मुझे फ्रैश होना था. सामने वाले टोयलेट में भी कोई है, इसलिए चैक कर रहा था।

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फिर कुछ देर बाद सामने वाले टॉयलेट के गेट की खुलने और बन्द होने की आवाज आयी तब हम दोनों को थोड़ी शांति मिली. तब तक आयशा अपनी सलवार पहन चुकी थी और वो बाहर जाने लगी.

परंतु मेरा लण्ड अब भी खड़ा हुआ था। मैंने उसे पकड़ कर इशारे में पूछा- कहाँ चल दी?
तो उसने बोला- बाहर!
मैंने लण्ड की तरफ इशारे करते हुए बोला- फिर इसका क्या होगा?
वो बोली- अब नहीं, बहुत देर हो चुकी है. फिर से कोई आ जाएगा. बाहर मुन्ना भी अकेला है और मैंने अब कपड़े भी पहन लिए हैं।

मैंने भी मन में सोचा कि उसकी भी बात ठीक है.
फिर भी मैंने उसे लण्ड चूस कर ठण्डा करने की बोला तो उसने मना कर दिया- नहीं अब नहीं।

मैंने जबरदस्ती उसे पकड़ कर बिठाया और उसका सर पकड़ कर उसके मुँह में अपना लण्ड डाल दिया और लण्ड को उसके मुँह में अन्दर बाहर करने लगा। उसके मुँह से गौ गौ खौ खौ जैसी आवाजें निकलने लगी। मैं लगातार उसके सर को पूरी ताकत से पकड़ कर उसके मुँह को चोद रहा था मेरा लण्ड उसके गले तक उतर रहा था। उसकी आँखों से लगातार ऑसू आ रहे थे। कुछ देर बाद मेरे लण्ड ने उसके मुँह में वीर्य उगलना शुरू कर दिया। उसने मुँह से लण्ड बाहर निकालने की पूरी कोशिश की परंतु मैंने अपने लण्ड को उसके गले तक उतारे रखा और तब तक बाहर नहीं निकाला जब तक मेरे वीर्य की एक एक बूँद उसके गले के नीचे नहीं उतर गई।

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जब मैंने लण्ड उसके मुँह से बाहर निकाला तब उसने चैन की साँस ली। अब आयशा बहुत बुरी तरह से हांफ रही उसकी साँस बहुत तेजी से चल रही थी।
वो तेजी से उठी और बहुत जल्दी गेट खोलकर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी।
कुछ देर बाद मैं भी अपने कपड़े ठीक करके बाहर आ गया।

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