आदित्य बेटे!! मुझे माफ कर दो !! मै बहक गयी थी??’ मेरी इश्कबाज सीटियाबाज माँ बोली. मैंने उसपर फिर से लात घूसों की बरसात कर दी. मैंने सिगरेट सुलगाई और उसके बड़े बड़े मम्मो की काली काली निपल्स पर दाग दी. ऐसा करते हुए मुझे बड़ा मजा आया. मैंने कुछ नुकीले पिन लिए और उसके मस्त मस्त आम जैसे दिखने वाले चुच्चों में गड़ा दिए. मेरी सौतेली माँ की गांड फट गयी. फिर मैंने उसको एक खम्बे से बाँध दिया. उसके दोनों पैर मैंने खीच पर बाँध दिए जिससे उसकी गांड और बुर साफ साफ दिखे. मैंने अपने बाप की बेंत उठाई उसकी बुर में खोस दी. मैं उस बेंत से जोर जोर से उस कामिनी औरत की बुर चोदने लगा. बेंत का चौड़ा मुट्ठा बहुत चौड़ा था. जब मैं उसको उसकी बुर में चलाता था तो उसे खूब दर्द होता था. ये देखकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था.
फिर मैंने अपनी सौतेली माँ के भोसड़े में अपना मोटा लौड़ा डाल दिया और उसको चोदने पेलने लगा. मैं उसे खूब चोदा. फिर मैंने अपने बाप की वो लम्बी बेंत सौतेली माँ की गांड में डाल दी. ‘मर गई!! हाय मैं मर गई!! बचाओ! कोई मुझे बचाओ!’ वो कुतिया चिल्लाने लगी. मैं उसकी कसी कसी गांड में अपने बाप की वो बेंत डालकर उसकी गांड चोदने लगा. मैं उसके गोल गोल मस्त मस्त चूतडों पर रस्सी भी मार रहा था. सट सट! की आवाज निकल रही थी. जहाँ पर रस्सी पडती ती, वहां की खाल उधड़ जाती थी. मैं उसे खूब तड़पा रहा था. बड़ी देर तक मैं उस दुस्त औरत की गांड में बेंत डालकर उसकी गांड चोदता रहा. फिर मैंने उसको कुतिया बना दिया. और उसकी कसी कसी गांड में मैंने अपना लौड़ा डाल दिया. मैं अपनी सौतेली माँ के मस्त मस्त चूतडों पर हाथ से जोर जोर से चपत लगाने लगा.
वो सिसकने लगी. मैं उसकी गांड मारने लगा. मेरा बड़ा सा लौड़ा उसकी कसी गाड़ में पूरा अंदर उतर गया था. बड़ा मखमली अहसास था वो. मेरी माँ की गांड इतनी मस्त, इतनी मीठी होगी मैं नही जनता था. मैं जोर जोर से अपनी माँ की गांड चोदने लगा. मेरा लौड़ा जो अन्दर सरक रहा था बहुत ही मजा पा रहा था. मेरे लौड़े की खाल में नशीली रगड़ लग रही थी. सौतेली माँ की गांड बड़ी गुद्देदार थी. बिल्कुल खरबूजे जैसे थी. लग रहा था की मैं कोई कद्दू काट रहा हूँ. अपने मजे को बढ़ाने के लिए मैं अपने सीधे हाथ को नीचे ले गया और उस छिनाल की चूत को मैं सहलाने लगा. वो मचलने लगी. फिर मैंने अपनी २ ऊँगली अपनी सौतेली माँ के भोसड़े में डाल दी और ऊँगली चलाने लगी. उधर मैं उपर से मैं उसकी गांड को चोद ही रहा था.
ले कुतिया !! कितना लौड़ा चाहिए तुझको !! आज जी भरके के लौड़ा खा ले !’ मैं गुर्राया. मैंने उत्तेजना में २ ४ थप्पड़ उस कामिनी के लगा दिए. फिर से मैंने अपनी २ ऊँगली उसकी बुर में डाल दी. ऊँगली से मैं उसकी बुर चोदने लगा और लौड़े मोटे लौड़े से उसकी गांड. कुछ देर बाद मैंने उसकी गांड के छेद में ही अपना माल गिरा दिया. मेरे बदले हुए वहसी रूप को देखकर मेरी सौतेली माँ अब मुझसे बहुत खौफ खाने लगी थी. अब वो मेरी पालतू कुतिया बन गई थी. अब मेरे घर में उसके नहीं मेरे नियम् कायदे चलते थे. मैं कहीं भी बाहर जाता था वो उसे घर में बंद कर देता था. बाहर मैं ताला मार देता था. इस तरह मित्रों कई दिन गुजर गए, मेरी सौतेली माँ मेरी पालतू कुतिया बन गई थी.
मैं जब कहता था की बैठ जाओ, तब वो बैठ जाती थी. जब मैं कहता था की खड़ी हो जाओ, वो कामिनी खड़ी हो जाती थी. अब उसका दिमाग बिल्कुल ठिकाने था. मुझे आज भी उसके जुल्म ओ सितम याद आते थे. जब वो मुझे झूठे बहाने बनाकर मुझे मेरे बाप से मार खिलवाती थी. आज भी मुझे उसके जुल्म ओ सितम याद थे. पर अब पॉवर मेरे हाथों में आ गया था. एक दिन मेरा दोस्त संजय मेरे घर आया.
जा मेहमान के लिए चाय लेकर आ !! मैंने अपनी सौतेली माँ को आदेश दिया. अंदर रसोई में चली गयी. मेरा दोस्त संजय मेरी जवान और चुदासी माँ को गौर से देखने लगा. जब वो चाय की ट्रे हाथ में लेकर आई और झुककर मेज पर रखने लगी तो उनके मस्त मस्त दूध दिखने लगे.
‘यार आदित्य!! तुम्हारी सौतेली माँ तो बड़ी सोलिड माल है!!’ वो बोला
चोदेगा इसे ??’ मैंने संजय से पूछा.
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