आफरीन की मस्त चुदाई-1

हैलो दोस्तो.. मैं संदीप नोयडा से हूँ। मेरी उम्र 23 साल है। मैं दिखने में गुड लुकिंग स्मार्ट हूँ। मैं अन्तर्वासना की कहानियाँ लगभग पिछले 4 साल से पढ़ रहा हूँ।

यह मेरी पहली स्टोरी है.. यह बात आज से 3 साल पहले की है जब मैंने 12 वीं पास की थी और मैं किसी पार्ट टाइम जॉब की तलाश में था।
मुझे जॉब मिल गई और वो भी घर से कुछ दूर नोयडा में ही मिली।

मेरे ऑफ़िस की लड़की
मेरे नए ऑफिस में मेरी टीम में कुछ लड़कियां भी थीं.. उनमें से एक का नाम था आफरीन!
वो बहुत ही सिंपल और आकर्षक थी, मैं उसकी सादगी का दीवाना हो गया था।

आफरीन एक सेक्सी फिगर की मालकिन थी और हाँ.. वैसे तो मैं हर लड़की और लेडी की बहुत इज़्ज़त करता हूँ और आफरीन के लिए भी मेरे मन में कुछ ऐसा ही था.. पर पता नहीं क्यों मैं धीरे-धीरे उसे पसंद करने लग गया था।
मैंने ऑफिस में काम के बहाने.. और कभी किसी दूसरे बहाने से उससे बात करना शुरू किया।

वो मुझ पर ध्यान तो देती थी.. पर ज़्यादा नहीं.. और इधर मैं ऑफिस आते ही उसे ढूँढता और उसके पास की सीट पर बैठने लगता। फिर मैं उसके लंच टाइम पर भी साथ जाने लगा।

एक दिन वो अकेले ही लंच पर जाने लगी.. दरअसल आज उसकी सहेली नहीं आई थी। मैंने भी सही मौका समझते हुए पीछे जाना ठीक समझा और उसके पीछे चल दिया।

हमारी मेज के आस-पास की चेयर खाली थीं क्योंकि लगभग सभी लोग लंच करके जा चुके थे।
मैं उसके सामने ही बैठ गया, उसने हल्की सी स्माइल दी।

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वो सफ़ेद कुर्ता और काले रंग की सलवार पहन कर आई थी.. उसके सफ़ेद कुरते से उसके अन्दर गुलाबी ब्रा झलक रही थी।

मुझे वो कुछ परेशान सी लगी, मैंने उससे पूछा- क्या बात है.. आज तुम कुछ परेशान सी लग रही हो?
तो वो बोली- कुछ नहीं..
मैंने फिर बोला- कुछ तो है आज तुम्हारे चेहरे पर वो चमक नहीं है।

वो हँसने लगी और बोली- आज तुम्हें क्या हो गया?
मैंने भी जबाव में मुस्कुरा दिया।

वो बोली- यार सैंडी, (सैंडी मेरा निक नाम है) तुम मेरी लाइफ नहीं समझ सकते.. बहुत ही उलझी हुई है.. मैं बोर हो चुकी हूँ अपनी लाइफ से!
मैंने बोला- क्यों.. यार तुम इतना नेगेटिव क्यों सोचती हो?
तो वो बोली- बस ऐसे ही।
मैंने फिर से उसकी बातों पर ज़ोर दिया और बोला- शायद अभी तक मैं तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त नहीं बन सका कि तुम मुझसे अपनी बातें शेयर करो।

दोस्तो.. वैसे एक बात है कि हमेशा किसी की भी गोपनीयता को महत्व देना चाहिए.. खास कर गर्ल्स और लेडीज की.. चाहे वे कोई भी हों.. क्योंकि एक बार उनके मन से आपकी छवि खराब हुई तो फिर उनका भरोसा लाइफ में दुबारा नहीं मिलता।

वो बोली- यार सैंडी, मेरा मन करता है.. मैं इस लाइफ से दूर कहीं अकेले चली जाऊँ.. जहाँ मेरा अतीत मेरे साथ ना हो।
मैंने उससे बोला- यार अपना माइंड उस तरफ मत ले जाया करो.. दोस्तों से बातें शेयर करो.. दिल हल्का हो जाएगा।

मूवी देखने का प्रोग्राम
मैंने उससे फ़िल्म चलने के लिए बोला.. तो उसने कुछ सोचते हुए कहा- ठीक है चलो।
मैं तो ऑफिस के बाद जाने की बात कर रहा था.. पर उसके जवाब में कुछ अलग बात थी।
मैंने पूछा- अभी?
वो बोली- चलो छोड़ो..

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