शादी से पहले मेरी सुहागरात

चुदाई का वो मज़ा मुझे मिल रहा था जिसके लिए तड़प कभी शांत नहीं होती।
मेरी चूत का अब तक दो बार पानी निकल चुका था जिससे लंड फक फक करता चूत में अन्दर बाहर जा रहा था।

फिर लंड का अंत समय आ गया और उसने अपना पूरा गर्म उबलता हुआ लावा मेरी चूत में उगल दिया।
अब तक चूत से सब बाहर निकलता था, आज पहली बार कुछ चूत के अन्दर गिरा था।

लावा अन्दर गिरने के बाद जलती हुई चूत में ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म तवे पर पानी की बूंदें गिरा दी हों।
मेरी आँखों में अब एक सुकून था, एक संतुष्टि।

उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और हम दोनों को साफ किया फिर चादर लेकर लेट गए।
अचानक मुझे ख्याल आया, अगर प्रग्नेंट हो गई तो…?

मैंने उनको बोला- सर आपने कंडोम नहीं लिया, अगर मैं प्रग्नेंट हो गई तो किसी को मुँह दिखने के लायक नहीं रहूंगी।
सर- चिंता मत करो, कुछ नहीं होगा, ऐसे सेक्स से प्रग्नेंट नहीं हो सकती।
मैं- समझी नहीं सर, आपका वो तो अन्दर ही गया है न, तो फिर कैसे नहीं हो सकती?

सर- तुम्हें शायद पता नहीं है, मैं एक जिगोलो हूँ। पार्ट टाइम कभी कभी मस्ती के लिए करता हूँ और मैंने एक छोटा सा ऑपरेशन करवा रखा है, जिससे मैं किसी को कितना भी चोदू वो प्रग्नेंट नहीं हो सकती।

मैं- लेकिन आपने ऐसा करवाया क्यों हैं।
सर- अरे यार, कुछ लड़कियों को जब तक चूत में पानी न गिरे, तब तक चुदाई का मज़ा नहीं आता इसलिए ये सब करवाया है ताकि पूरा मज़ा मिले बिना किसी खतरे के।

मैं- फिर तो मज़े है आपके भी और आपसे चुदने वाली के भी!

उसके बाद थोड़ी और मस्ती एक बार और मस्त चुदाई और फिर चैन की नींद!

उसके बाद कब कहाँ क्या हुआ ये बाद में बताऊंगी।

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