साली एक लड़की ने पूरी फॅमिली चुदवाइ – 1

Chudai ki kahaniya ये तब की बात है जब शबनम हमारे घर रहने के लिए आई, घर का महॉल काफ़ी ख़ुशगवार हो गया था वो थी भी कुछ ऐसी कि उस से मिल कर खुशी होती थी मासूम सी सूरत गोरे चेहरे पर बड़ी बड़ी काली आँखे,और कमर तक लंबे बाल हां मगेर शायद मासूम नज़र आने वाले लोग इतने मासूम होते नही.

वो मेरे मामा की बेटी थी और कॉलेज मे पढ़ने के लिए लाहोर आई थी और मोम ने उस को हॉस्टिल मे नहीं रहने दिया और इस तरहा वो हमारे घर मे रहने लगी, हम लोग घर मे 6 लोग थे… डॅड,मोम,असद भाई,शाज़िया बाजी मैं और सब से छोटी आसिया . शबनम और आसिया हम उमर थीं और दोस्त भी इसलिए मोम ने शबनम को आसिया के रूम मे शिफ्ट कर दिया और शाज़िया बाजी मेरे रूम मे आ गई.मुझे कुछ ऐतराज़ नहीं था क्यों कि मेरी शाज़िया बाजी से बनती थी और वो मेरा बहुत ख़याल रखती थीं.

शबनम मुझे पसंद थी लेकिन मुझे लगता था वो असद भाई को पसंद करती थी क्यों कि वो उन से बहुत बाते करती थी जब वो घर पर होते थे लेकिन ऐसा कम ही होता, उन्हों ने एम बी ए कर लिया था और डॅड के साथ ऑफीस का काम देखते थे और शाम मे अपने दोस्तों के साथ होते थे.

अब असल कहानी की तरफ आता हूँ,शबनम को आए हुए एक महीना हो चुका था और एक रात मे पानी पीने उठा तो किचन मे जाते हुए मुझे आसिया और शबनम के रूम से कुछ आवाज़े सुनाई दी जैसे कि कोई हंस रहा हो और सिसकियाँ ले रहा हो,लाइट बंद थी लेकिन आवाज़ आ रही थी रात के दो बज रहे थे और मे सोच मे पड़ गया मे ने खिड़की से देखने की कोशिश की लेकिन कुछ नज़र नहीं आया और तब मे लॉन की तरफ गया और वहाँ की खिड़की से अंदर झाँका.

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कमरे मे लाइट लॅंप ऑन था और कंप्यूटर था जिस पर एक ट्रिपल ऐक्स मूवी चल रही थी और कंप्यूटर की रोशनी मे बेड पर शबनम और आसिया नज़र आईं दोनो ने अपने पूरे कपड़े उतारे हुए थे और मे ने पहली दफ़ा लाइफ मे 2 लड़कियों को नंगी देखा था एक साथ जिन मे से एक मेरी बहन थी,वो एक दूजे से खेल रही थीं ,चूम रही थीं एक दूजे की चूत पर हाथ फेर रही थीं और साथ साथ मूवी देख कर हंस भी रही थीं.

फिर वो दोनो 69 पोज़िशन मे आ गई और पागलों की तरहा एक दूजे की चूत चाटने लगीं बल्कि खाने लगीं वो काफ़ी आवाज़े भी निकाल रही थीं और इन दोनो का जोश और बेक़ारारी देख के मेरा भी लंड खड़ा हो गया.और जब तक वो दोनो थक के बहाल हुईं मे भी फारिघ् हो चुका था.

अगली रात भी मे ने यही कुछ दखा और अब शबनम और आसिया मुझे घर मे घूमती हुई भी सेक्स ऑब्जेक्ट्स ही लगती थी और मे यही सोचता रहता था कि कैसे मैं इन दोनो को जाय्न करूँ . आख़िरकार चौथी रात शबनम किचन मे खाना निकाल रही थी तो मे गया और पीछे से जा कर उस के बूब्स प्रेस कर दिए उस के फेस पर गुस्से से ज़्यादा हैरानी थी और ये देख के मेरी भी हिम्मत बढ़ गयी और वो जब बोली ये क्या कर रहे हो तुम वसीम तो मेने उस की आँखों मे देखा और कहा कि आज रात डोर लॉक मत करना मे तुम लोगों को जाय्न करना चाहता हूँ,इतना कह कर उस का जवाब सुने बगैर उस को हैरान छोड़ कर मे किचन से बाहर आ गया.

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डिन्नर टेबल पर भी आसिया और शबनम दोनो परेशान लग रही थी और मुझ से नज़रे नहीं मिला रही थी, थोड़ी देर बाद सब सोने चले गये और मे 2 बजे का इंतज़ार करने लगा,2 बजे तक शाज़िया बाजी बेख़बेर सो चुकी थी और मे ने उन के रूम मे जाने से पहले लॉन वाली खिड़की से देखा तो वो दोनो जाग रही थी और आपस मे बाते कर रही थी आहिस्ता आहिस्ता और परेशान लग रही थी.और दोनो ने पूरे कपड़े पहने हुए थे.

मे ने आ कर दखा डोर लॉक था और मे ने आशिता से नॉक किया अंदर से सर्गोसियों की आवाज़ आ रही थी और 2न्ड नॉक पर शबनम ने डोर थोड़ा सा खोल दिया और बोली क्या है? मैं ने डोर को धक्का दिया और वो पीछे हट गई और मे ने अंदर दाखिल हो कर डोर बंद कर लिया .रूम मे नाइट लॅंप जल रहा था और दोनो काफ़ी डरी हुई थीं

तब मे ने उन्हे बताया कि मे 3 रातो से उन्हे देख रहा हूँ और अब मे भी थोड़ा एंजाय करना चाहता हूँ , लेकिन हम तुम्हारी बहनें हैं!!! हां तो क्या हुआ अगेर तुम दोनो बहनें आपस मे एंजाय कर सकती हो तो मे क्यों नहीं? तुम सब मर्द एक से हो ये कहते हुए शबनम मे मुँह नीचे कर लिया, देखो कोई आवाज़ सुन लेगा परदा बंद करो और बेड पर आ जाओ मे ने फ़ैसलाकूँ अंदाज़ मे कहा और बेड पर लेट गया मेरे पाँव बेड से नीचे ही थे.

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