रजिया फंसी गुंडों मैं पार्ट – 4

रजिया फंसी गुंडों में पार्ट -1

रजिया फंसी गुंडों मैं पार्ट -2

रजिया फंसी गुंडों मैं पार्ट -3

 

जैसे ही मैंने मेरी BMW कार रोकी एक 15 साल का लड़का आया मैंने उससे अकरम भाई का मकान पूछ तो बोला यही है ,मैं कार से उतर कर दूकान के सामने खड़ा हो गया [11 बजे आयशा के घर पहुंच गया,आयशा का छोटा सा घर जिसमे आगे के कमरे में और कुछ रोड में रद्दी सामान बिखरा पड़ा हुआ था और एक 55-58 साल के आसपास ब्यक्ति दूकान में बैठा हुआ था सिर के बचे हुए बालो में और दाढ़ी में लाल रंग की मेहदी लगाए हुए जिसका एक हाथ कंधे से कटा हुआ था पास ही एक बैसाखी भी रखी हुई थी उसका एक पाँव भी घुटने के ऊपर से कटा हुआ था]

इतने में ओ सज्जन बैसाखी उठाया और बैसाखी के सहारे मेरे पास आये और पूछने लगे किससे मिलना है,ये बात कर ही रहा था की इतने में आयशा बाहर आई सिर पर दुपट्टे को रखे हुए और बोली ”सर आपको घर ढूढने में परेसानी तो नहीं हुई ” तो मैंने बोला ” कोई परेसानी नहीं हुई मेडम ” आयशा मेरे मुह से अपने लिए मेडम सब्द सुनकर पुलकित हो उठी और दूकान के अंदर बिठाया एक कुर्शी में तो मैंने आयशा से बोला ” आपके सौहर कहा है उनसे मिलवाए तो आगे की बात कर लेता हु ” इतना सुनते ही आयशा घबरा गई और बोली ” क्या बात करनी है ” तो मैंने आयशा को बोला ” फाइनेंस के लिए आपसे बात हुई थी उस बिषय में ” तो आयशा को तसल्ली हुई और बोली ” ये है मेरे शौहर ” [बैसाखी वाले ब्यक्ति की तरफ इसारा किया] मैं आयशा के मुह से इतना सुनते ही ” ये है मेरे शौहर ” बहुत साक लगा की ये लंगड़ा मेरी प्यारी आयशा का पति है

मैं अपने आपको कंट्रोल किया [कार में बैठकर बाते करते समय आयशा की उदासी का पूरा राज समझ आ गया] और आयशा के शौहर से बात करने लगा मैंने उन्हें बताया की मैं एक फाइनेंस कम्पनी से हु और आपके दूकान के लिए फाइनेश कर सकता हु,जबकि ये कोई बात आयशा और मेरे बीच नहीं हुई थी,आयशा मेरा मुह ताकती और प्रश्न भरी निगाहो से मेरी तरफ देखती, तब आयशा के पति खुसी खुसी बोले ”साहब कर दो फाइनेंस” तब मैंने बोला ”आपका मकान देखना है अंदर से” तो आयशा तुरंत तैयार हो गई और मकान के अंदर ले गई अपना मकान दिखाया , मकान देखते ही मैं समझ गया की कितनी गरीबी और तंगहाली में आयशा जीवन काट रही है | आयशा अंदर पहुंची तो कान में धीरे से बोली ” कर क्या रहे है आप ” तो मैंने आयशा को धीरे से बोला ” तुम्हारी जिंदगी सवार रहा हु,चुपचाप देखती रहो ”और फिर आयशा के साथ बाहर आ गया और कुछ देर तक बैठा और आयशा की तरफ देख कर बोला ” मेडम आपको ये ब्यवसाय बंद करना पडेगा , क्योकि इस धंधे के लिए हम फाइनेस नहीं करते है ” तब आयशा मेरी तरफ देखी और बोली ” फिर कौन सा धंधा करू साहब जी ” तो मैंने आयशा को बोला ” हम कपडे की दूकान के लिए फाइनेंस करते है ” तो आयशा बोली ”यहाँ इतनी जगह में कैसे चलेगी कपडे की दूकान ”

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तो मैंने ”बोला चल जाएगी ” और आयशा के शौहर से बोला ”आप ये सब कबाड़ हटा कर दूकान को कपडे की दूकान लायक फर्नीचर बनवाए” ओ कुछ संकित हुए तो मैंने उन्हें समझाया की ”इसी धंधे के लिए फाइनेंस करुगा आपको करवाना है तो टेक है नहीं तो चलू मैं” तो अकरम मिया तैयार हो गए और मैं आयशा के घर से आने लगा तो आयशा बोली ”चाय तो पीते जाइए”तो मैंने मना कर दिया और अपने ससुराल आ गया और साम को 5 बजे फिर से आयशा के घर गया और आयशा से बोला ” आपको माकान की रजिस्ट्री हमारे पास गिरवी रखनी होगी ” इस बात पर आयशा के पति तैयार नहीं हुए और बोले ”रजिस्ट्री रख दू और आपने लोन नहीं दिया तो” मैंने बोला ”मैं आपको लोन दे दुगा दूकान में सामान भरवा दुगा तब आप मुझे अपने मकान की रजिस्ट्री दे देना ” तो ओ मान गए तब मैंने अकरम मिंया से बोला ”ये लोन मैं मैडम के खाते में ट्रांसफर करुगा” तो आयशा के पति ने कोई आपत्ति नहीं उठाया फिर मैं अगली कार्यवाही के लिए आयशा के घर से निकल लिया |

अगले दिन आयशा को बैंक बुलाया सभी डॉक्युमेंट्स के साथ और आयशा का बैंक अकाउंट और लाकर खुलवा दिया और अकाउंट में 2 लाख रुपये अपने खाते से ट्रांसफर करवा दिए, आयशा के लिए ATM कार्ड बनवा दिया ATM से रुपये कैसे निकालते है ये भी सीखा दिया | बैंक में बैठे बैठे बहुत सी बाते आयशा ने बताया |

आयशा जब मेरे घर से गई थी तब आयशा के अब्बु ने सभी गहने अपने पास रख लिए थे जो मेरे घर वालो ने आयशा को दिया था , आयशा को उसके मामू के घर में 25 दिन तक एक कमरे में कैद रखा और फिर आयशा का निकाह आयशा की दुगुनी उम्र के एक ब्यक्ति से करवा दिया जब आयशा को कोई संतान नहीं हुई तो आयशा को तलाक दे दिया आयशा फिर से अपने अब्बु के घर खाली हाथ आ गई क्योकि निकाह के समय सिर्फ एक रुपये का ”मेहर” तय हुआ था , फिर आयशा के अब्बु ने आयशा का फिर से निकाह करवाया अकरम मिंया के साथ , अकरम मियाँ एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे आयशा का जीवन सुख से निकल रहा था पर अकरम मिंया का एक्सीडेंट हो गया जिसमे एक पाँव , दोनों हाथ काट गए ,और ये आफिज हो गए आयशा के जीवन में फिर से परेसानी सुरु हो गई,कारखाने से जो रकम मिली थी उसी से रद्दी का बिजनेस सुरु कर दिया जिससे बड़े मुस्किल से पुरे परिवार के पेट भर पाता था गरीबी के कारण बच्चे नहीं पढ़ पाये दोनों बच्चे ठेले लेकर गली गली घूमते और रद्दी सामान खरीदते फिर दूकान से को बेचते ,अकरम मिया दिन भर दूकान में बैठे रहते,आयशा भी दूकान का काम सम्हालती इस तरह से इनकी जिंदगी चल रही थी ये सब बताते बताते आयशा के आँखों से आसु आ गए तो मैंने आँशु पोछकर आयशा को बोला अब तुम्हारे जीवन में कभी भी कष्ट नहीं होगा मैं मेरे बीबी से बगावत करके भी तुम्हे सुखी रखूँगा |

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