रजिया फंसी गुंडों मैं पार्ट -2

रजिया फंसी गुंडों में पार्ट -1 जब सुबह हो गयी तब भी वाहा कोई आदमी या औरत नही दिखाई दिया. मुझे यह भी नही पता था की वो दोनो कामीनो ने मुझे कहा छ्चोड़ दिया है. मैं हिम्मत करके खड़ी हुई और अपनी ब्रा और पॅंटीस ढूँढने लगी. मेरी ब्रा मुझे नही मिली मगर मेरी कच्च्ची जोकि पूरी तरह से गंदी हो गयी थी और पीछे से उसमें एक च्छेद हो गया था. मैने जल्दी से उससे पहेन ळिया. फिर मैने ड्रेस को पहने की कोशिश करी मगर दोनो स्ट्रॅप्स कट्ट जाने के कारण मैं उससे पहेन नही पाई. मैने दोनो स्ट्रॅप्स पे गाठें बाँध दी और और उससे पहेन लिया. गातों की वजह से मेरा ड्रेस की उचाई काफ़ी बढ़ गई थी.

अगर मैं ज़रा सा भी झुकती तो कोई भी मेरी कच्ची आराम से देख लेता. मैने सोचा की आगे चलती हूँ थोडा सा शायद रोड आजाए या कोई गाओं आजाए जहा से मैं वापस जेया सॅकू. मैं आगे चली करीब 1 घंटे बाद मुझे एक छ्होटा सा घर डीिखा. उस्स इलाक़े में वही एक घर था. मैने रात से कुच्छ खाया भी नही था और पानी तक नही पीया था. मैं उस्स घर के पास चली गई. वो घर काफ़ी पुअरना सा टूटा हुआ सा लग रहा था. मैने काफ़ी दरवाज़ा खत खाटाया मगर किसीने दरवाज़ा नही खोला. निराश होके मैं वाहा से जाने लगी. जैसी मैने चलना शुरू किया तभी वो दरवाज़ा खुल गया. मैने देखा एक बूरहा सा आदमी खड़ा हुआ है. मैने उससे नमस्ते कहा और उससे बोला की मेरे पीछे कुच्छ गुंडे पद गये थे मैं किसी तरह से अपनी जान बचके आई हूँ. मुझे यह भी नही पता की यह जगह कौनसी है. अप प्लीज़ मुझे कुच्छ खाने पीने के लिए दे दीजिए, आपकी बड़ी मेहेरबानी होगी.

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उन्न बाबा ने मुझसे मेरा नाम पूछा. मैने नीति बता दिया और मैने उनसे उनका नाम पूचछा. उन्होने मुझे अंदर बुला लिया और अपना नाम सुलेमान बताया. मैं घर में जब गई तो वाहा एक बिस्तर दिखा जिसपे गंदी सी चादर बिच्च्ि हुई थी, एक पंखा और उसी रूम के कौने में बर्तन और चूला रखा हुआ था. सुलेमान बाबा ने मुझे कहा बेटी तुम अभी जॅयैपर हाइवे के पास ही हो. तुम कहा की रहने वाली हो? मैने कहा जी मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ. मैने बिस्तर पे बैठना ठीक नि समझा क्यूंकी अगर मैं बैठी तो मेरी ड्रेस और उपर हो जाती और मेरी कच्च्ची बिल्कुल अच्च्चे से बाबा को नज़र आ जाती. बाबा ने मुझे कहा की बेटी जाओ तुम अपने उपर तोड़ा पानी डाल्लो क्यूंकी तुम्हारी हालत काफ़ी खराब लग रही है. मैने पानी गरम होने के लिए रख दिया है.

मैने हस्ते हुवे इनकार कर दिया. मगर उन्होने कहा की बेटी कोई ग़लत ख़याल मत रखो अपने दिमाग़ में तुम मेरी बेटी जैसी ही हो. नहाने का सुनके मुझे वो याद आया की जब बिशन और संतोष ने मुझे कुतिया की तरह चोडा था और मेरे पे पिशाब कर दी थी. यह सोचके मेरे सिर चकरा गया और मैं बिस्तर पे बैठ गई. मेरे बैठने की आवाज़ से सुलेमान बाबा ने एक डम अपना सर मेरी तरफ किया और उन्हे मेरी गुलाबी कच्च्ची दिख गई. मूह फेरते हुए मैं खड़ी हो गई और बाथरूम में जाने लगी. बाबा ने मुझे हाथ में एक टवल पकड़ा दिया और मैं नहाने के लिए चली गई. बाथरूम में एक खिड़की थी जोकि काग़ज़ से ढाकी हुई थी. लाइट भी काफ़ी ठीक ताक थी. वाहा एक गंदी सी बाल्टी और मग रखा हुआ था. मैने अपने कपड़े उतार के कोने में रख दिए ताकि वो गीले ना हो जाए. मैने धीरे धीरे अपने उपर पानी डालना शुरू किया.

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मेरे आँखों में आँसू आ गये थे कल रात के भयानक हादसे के बारे में सोचके. मैने सोचा जो हो गया वो हो गया एब्ब किसी तरह घर पहुच ना है. हल्का सा गरम पानी मेरी बदन को गरम कर रहा था. उसी बीच में बाबा उस्स टूटे हुए दरवाज़े से मुझे नहाते हुए देख रहा था. बाबा अपने लॅंड से खेलते हुए मेरे गीले बदन को देखे ही जेया रहा था. मुझे नहाते समय तेज़ तेज़ सासो की आवाज़े सुनाई दे रही थी. जैसे ही मैने नहाने बंद कर दिया तो सासे आनी भी बंद हो गई. मैं अपने गीले बदन को उस्स टवल से पौचने लगी. मेरे दिमाग़ में एक गंदा ख़याल आया. मैने सोचा क्यूँ ना मैं इस्स बाबा को सिड्यूस करू.

देखने में तो यह बाबा शरीफ लगता है और मुझे कुच्छ नही कर सकता और मैं यहा से भाग जाऊंगी अगर ऐसा कुच्छ हुआ तो. यही सोचके मैने बाथरूम का दरवाज़ा खोला. सुलेमान बाबा चूले पे चाइ बना रहे था. जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला उन्होने अपना चेहरा मेरी ओर खुमाया और देखके तोड़ा सा डर गये. मैं उस समय सिर्फ़ टवल पहेन लप्पेट रखा था और उसके नीचे अपनी गुलाबी रंग की कच्छि. टवल का कपड़ा काफ़ी ग़रीबो वाला था मतलब काफ़ी पतला सा था और इसकी वजह से व्हो भी काफ़ी गीला हो गया था. सुलेमान बाबा के कुच्छ कहने से पहले मैने उनसे कह दिया की मेरी ड्रेस ज़मीन पे गिरके गीली हो गई है,

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