रंडी माँ का खेत में ग्रुप सेक्स

हैल्लो दोस्तों, मेरी मम्मी मेरे चाचा के साथ चुदाई का खेल शुरू करती है और मम्मी ने मेरे चाचा के साथ अपनी जमकर चुदाई के मज़े लिए। उन दोनों की चुदाई को देखकर मेरी आखें पहली बार तो फटी की फटी रह गई और मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं था कि ऐसा भी कभी यह दोनों मिलकर कर सकते है, लेकिन उन दोनों ने तो सारी हदें पार कर दी और मुझे भी उनकी चुदाई देखकर बड़ा मस्त मज़ा आया और वो सब देखकर मेरी चूत ने जोश में आकर गीली होकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया। मुझे भी मेरी चूत में लंड लेकर अपनी प्यास को बुझाने की इच्छा होने लगी और मैंने अपनी चूत में वो सब देखकर ऊँगली करना शुरू कर दिया। मेरी चूत में आग लगने लगी थी और में अपनी चूत में लंड को लेकर वैसे ही दमदार धक्के खाने के लिए बड़ी ही बेचेन व्याकुल होने लगी थी। दोस्तों अब में आप लोगो को कहानी सुनाना शुरू करती हूँ और मुझे उम्मीद है कि मेरी यह कहानी सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी।

दोस्तों अब उस पहली बार की चुदाई के बाद से मेरी मम्मी हर दिन ही हमारे खेत में जाकर मेरे चाचा से अपनी जमकर चुदाई के मज़े लेकर अपनी तरसती हुई चूत की प्यास को बुझाकर मज़े करती, लेकिन उसके बाद भी वो अब इतनी हद तक जा पहुंची थी कि वो रात को भी हमारे घर में सही मौका देखकर सभी के सो जाने के बाद देर रात को उठकर मेरे चाचा के लंड से मज़े लेने उनके पास चली जाती और उन दोनों को अब चुदाई के सामने कुछ भी नजर नहीं आता, उनको तो बस चुदाई का भूत सवार हो चुका था और इस चुदाई के खेल को अब करीब 18 दिन हो चुके थे और मैंने हर रात को जल्दी सोने का नाटक करके मम्मी के चाचा के पास चले जाने के बाद चोरी छिपे उनकी चुदाई को देखकर मज़े लिए और उस रात को जब में छुपकर देख रही थी तब मैंने देखा कि चाचा ने मम्मी को हमेशा की तरह जमकर उनकी चुदाई करके उसकी चूत को ठंडा कर दिया और उसके बाद वो दोनों हंस हंसकर बातें कर रहे थे।

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फिर तभी मेरे चाचा ने मेरी मम्मी से कहा कि भाभी मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है उसका नाम रवि है वो पास वाले गाँव में ही रहता है और वो कल हमारे यहाँ पर सुबह ही पहुंच जाएगा और पूरा दिन यहीं पर रुकने के बाद वो शाम को 6 बजे की ट्रेन से शहर चला जाएगा उसने मुझे कई बार अपनी पत्नी की चुदाई करने का अवसर दिया है और दो चार बार तो हम दोनों ने ही मिलकर उसकी पत्नी को उसके घर में एक साथ भी चोदा है और अब अगर तुम तैयार हो जाओ तो वो तुम्हारी चूत को एक बार चोदना चाहता है और मैंने उससे कहा है कि में यह बात तुमसे पूछकर उसको जवाब दूंगा, तुम्हारी तरफ से क्या जवाब है? मुझे बता दो तो में उसको आज बता दूंगा? तो मम्मी मेरे चाचा की वो बात सुनकर बिल्कुल चकित होकर मुझसे बोली कि तूने मुझे क्या रंडी समझ रखा जो में तेरे साथ भी चुदाई करवाऊँ और तेरे दोस्तों का भी में लंड लूँ? मेरी पूरे परिवार में बहुत इज्जत है, तू क्या मुझे रंडी बाजार में ले जाकर बैठाना चाहता है जो हर किसी को मेरी चुदाई का न्यौता देता इधर उधर फिर रहा है। फिर चाचा ने मेरी मम्मी की वो सभी बातें सुनकर डरते हुए घबराकर कहा कि नहीं भाभी ऐसा कुछ भी नहीं, लेकिन भैया के घर में ना होने के बाद अगर तुम चाहो तो दो लंड से एक साथ अपनी चुदाई का मस्त मज़ा ले सकती हो और उसमे कोई बुराई वाली बात नहीं है, हमारी यह चुदाई बस हम तीनों के बीच ही रहेगी और किसी को पता नहीं चलेगा, प्लीज एक बार करके तो देखो अगर मज़ा ना आए तो में फिर कभी दोबारा यह काम करने के लिए आपसे नहीं कहूँगा।

फिर मम्मी मेरे चाचा की वो पूरी बात उनका आग्रह सुनकर थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहने लगी कि चल ठीक है, जब तेरे साथ मैंने चुदाई का यह काम अब शुरू ही कर दिया है तो में तेरे कहने पर एक लंड और सही उसको भी में लेकर देख लेती हूँ। चल अब तू बुला ले, उसको भी में भी देखूं कि वो तेरा दोस्त मेरी चुदाई करके कौन सा तीर मारता है, उसके लंड के अंदर कितना दम है, तू उसकी इतनी तारीफ कर रहा है, में भी तो देखूं वो क्या और कैसे करता है साला, आने दे तू उसको, तू देखना में कैसे उसका पूरा जोश एक ही झटके में पूरा ठंडा कर दूंगी? लेकिन घर में तो हमारा यह चुदाई का कार्यक्रम पूरा होना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि घर पर दिन में किसी के होने का या अचानक से आ जाने डर हमेशा हमे होगा और डरते हुए काम करने से वो मज़ा नहीं आता जो आना चाहिए। अब झट से मेरा चाचा बीच में बोल पड़ा और वो कहने लगा कि भाभी में एक काम करता हूँ। उसको रेलवे स्टेशन से सीधा अपने खेत पर ले जाता हूँ। वहीं पर हमारा यह काम बड़े आराम से बिना किसी रुकावट के पूरा हो जाएगा और तुम दोपहर को करीब 12 बजे तक खेत पर आ जाना और शाम तक चुदाई का खेल खत्म करके तुम वापस घर आ जाना और में अपने उस दोस्त को खेत से ही स्टेशन ले जाकर रेल में बैठाकर वापस घर आ जाऊंगा। तो मम्मी बोली कि हाँ यह बिल्कुल ठीक रहेगा और तुम उसको लेकर खेत पर पहुंच जाना। में भी तुम्हे वहीं मिल जाउंगी और फिर अगले दिन सुबह मम्मी ने हंसी ख़ुशी घर का सारा काम जल्दी से ख़त्म किया और वो करीब 11:30 बजे ही खेत की तरफ चल पड़ी। मुझे उनके चेहरे पर बड़ी ख़ुशी एक अजीब सी चमक नजर आ रही थी, जिसको देखकर में समझ चुकी थी कि मेरी रंडी माँ आज किसी दूसरे का भी लंड लेकर अपनी चुदाई करवाकर मज़े लेने जा रही है।

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