पापा की हेल्पिंग बेटी की चुदाई – 2

papa-ke-helping-beti chudai पापा की हेल्पिंग बेटी part 1 बातरूम के अंदर जाते ही पापा ने मुझे अपने से लिपटा लिया. बेड पेर तो मुझे अपनी हाइट का अंदाज़ा नही हुआ , मगर खरे हुए हालत मैं पता चला के मेरा सिर पापा के सीने तक ही पहुच पाया था. अभी सिर्फ़ मैं 13 साल की थी. हां थोरी सी मोटी थी. गोरा रंग था मेरा, जिस्म मेरा भरा भरा सा था और गांद मेरी खास तौर से बहुत मोटी और बाहर की तरफ निकली हुई थी. यह सब मैं इस लिये बता रहीं हूँ के मुझे पापा से लिपट कर अपने सरपे का एहसास हुआ. खरे होने की वजह से पापा का मुरझाया हुआ लंड मेरी टिट्स को छू रहा था. पापा मुझे झुक कर प्यार कर रहे थे और मेरे सारे जिसम और मेरी गांद और चूत पेर हाथ फेर रहे थे.

“उफ़ जानू कितना प्यारा और सेक्सी जिसम हे मेरी बेटी का…. क्या करूँ तेरे साथ जानू ….. बिल्कुल मुलतानी चिकनी मिट्टी की तरह जिसम हे तेरा जानू ….. ” इस के साथ ही पापा ने जब मेरी चूत के दाने (क्लिट) पेर उंगली फेरी तो मेरे सारे जिसम मैं सनसनी दौर गई. पेशाब मुझे भोथ ज़ोर से आ रहा था. पिछळी शाम से मैं ने पेशाब नही काइया था. “पापा मुझे बहुत ज़ोर से पी आ रही हे, निकल जाई गी” मगर पापा ने मेरी एक ना सुनी और बाथरूम के टाइल वाले फरश पेर लेट कर उन्हो ने पाकर कर मुझे अपने मुँह पेर बिठा लिया. मेरी हालत यह थी के एक तरफ मुझे फिर से चुड़वाने की शडीड खाविश हो रही थी, और दूसरी तरफ मुझे बरी ज़ोर का पेशाब आ रहा था, और तीसरी तरफ मैं स्क्वाटिंग पोज़िशन मैं पापा के मुँह के साथ अपनी चूत लगाए बैठी थी. “पापा, प्लीज़ मुझे पी करने दें पहले …. निकल जाए गी नहीं तो …..”

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“तो करो ने पी” पापा एक लम्हे के लिये मेरी चूत से मुँह हटा कर बोले. पापा की ज़बान मेरी चूत के पेशाब वाली जगह को चाट रही थी. मैं हैरान रह गई. मुझे अपने कानो पेर यक़ीन नही आ रहा था के पापा ऐसा भी सोच सकते हैं. “ची पापा …. आप के मुँह मैं चला जाए गा मेरी पी … पापा आप बोहट गंदे हैं ..” “जानू करो मेरे मुँह मैं … अपनी बेटी का पेशाब पीऊँगा … कर मेरी जान …” पापा यह कहने के बाद मेरी गांद को ज़ोर से पाकर कर मेरी चूत पूरी की पूरी अपने मुँह मैं भर ली, के मैं अब कुत्छ भी नहीं कर सकती थी, सिवाए पापा के मुँह मैं पी करने के. पी को रोकना अब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. ऐसा लगता था के अगर मैं ने अब और एक सेकेंड भी देर की तो मेरा ब्लॅडर फॅट जाए गा. फिर मेरी पेशाब के सुराख से पहली गरम गरम तेज़ धार मेरे पापा के मुँह मैं निकली. एक धार मार कर मेरा पेशाब रुक गया. मुझे लगा के पापा का मुँह मेरी एक धार से पूरा भर गया होगा. मेरी चूत चुनके पापा के मुँह मैं पूरी घुसी हुई थी,

लहज़ा मुझे पापा के मुँह की मूव्मेंट से पता चल गया के पापा ने अपने मुँह मैं भरा हुआ मेरा यूरिन पी लिया हे. “जानू ….. अब खरी हो कर अपने पापा पेर पेशाब करो … लेकिन आहिस्ता आहिस्ता …. जितना भी रुक रुक कर कर सकती हो … मेरे मुँह पेर …. मेरी बॉडी पेर और पापा के लंड पेर …” मैं पापा के मुँह पेर से उठ कर खरी हो गई. मैं ने अपनी गांद बिल्कुल आगे की तरफ करते हुआी, अपनी चूत को अपनी उंगलिओन से चीरते हुआी पेशाब की एक सीधी धार पापा के चेहरे पेर मारी. पापा मुँह को पूरा खले हुआी थे. मेरे गोलडेन कलर की गरम पेशाब की फुल तेज़ धार पापा के चेहरे पेर पार्टी हुई उनके मुँह मैं गई. मुझे पापा के हलाक़ से गर्र्र्र…गर्र्र्र…ग.र.र.र.र.र की आवाज़ आई, और पापा का खुला हुआ मुँह मेरे पेशाब से पूरा भर गया, बुलके उनके होंटो के किनारों से मेरा पेशाब झाग की शकल मैं बह रहा था.

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पापा के मुँह मैं अपनी पी देख कर मेरी जो मस्ती से हालत हो रही थी वो मैं बता नहीं सकती. जी चाहता था के अपने पापा के मुँह से अपना मुँह लगा कर उन्हे खूब प्यार करूँ और पापा के साथ अपनी पी शेर करूँ. मेरी पी अब रुक नही रही थी. मेरी चूत से मेरी गोलडेन पी अब पापा के बॉडी पेर गिर रही थी. फिर पीछे हट तय हुआी मैं ने पापा के हाफ हार्ड लंड पे पेशाब करना श्रु काइया. इसी तरह मैं ने आगे पीछे होते हुआी पापा को पूरा का पूरा अपने यूरिन से नहला दिया. बात रूम का पूरा वाइल टाइल्ड फ्लोर मेरे यूरिन से गोलडेन हो रहा था. पापा ने फिर मेरा हाथ पाकर कर मुझे अपने ऊपेर गिरा लिया. मेरा पेशाब अब भी मेरी चूत से निकल रहा था. इतना ज़ियादा पेशाब मैं कर रही थी के मैं हैरान रह गई. पापा के जिसम से लिपटने की वजह से मैं भी अपने यूरिन मैं गीली हो गई.

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