पापा की हेल्पिंग बेटी

baap beti ki chudai kahani अपनी सच्ची कहानी सुनाने से पहले मैं थोरा सा बॅकग्राउंड आप सब को बता दूँ.

मेरी मदर की 3 साल पहले ट्रॅफिक आक्सिडेंट मैं डेथ हो गई थी. उस वक़्त मैं कोई 12 साल की थी और अपने पापा की अकेली बेटी थी. हम लोग काफ़ी साल पहले हयदेराबाद से रॅवॉल्पींडी शिफ्ट हो गये थे. यहाँ पिंडी मैं सिवई हमारे एक दो फॅमिली फ्रेंड्स के और कोई रिश्त्यदार ना था. बस हम तीनो अकेले रहते थे. मम्मी की डेथ के बाद हम सिर्फ़ 2 रह गये थे.

घर क एक कमरे मैं जो की बाहर कमर्षियल स्ट्रीट की तरफ खुलता था, पापा ने बोहत अक्चा जनरल स्ट्रोरे खोला हुआ था जिस से हमारी भोत आक्ची इनकम हॉट थी. मम्मी के जाने के बाद मुझे भी तन्हाई महसूस नही होती थी. सुबा मैं स्कूल चली जाती. काम वाली सुबा घर की सफाई वगेरा कर के खाना तय्यार कर के चली जाती. स्कूल से वापसी पेर हम दोनो बाप बेटी साथ खाना कहते. मम्मी की कमी भोत महसूस होती थी. इसी तरह एक साल गुज़र गया. और मुझे यह कभी भी एहसास ना हुआ के अगर मुहज़े मम्मी की कमी महसूस होती है टॉ पापा का क्या हाल होता होगा. गो के मैं जवानी की हदों को चू रही थी. मेरी छातियाँ आक्ची ख़ासी निकल आई थी. अक्सर मेरी चूत मैं भी मीठी मीठी खारिश होती थी. मगर ना मैं इन सब चीज़ों का मतलब जान सकी और ना यह महसूस कर सकी के पापा मम्मी के बाद सेक्स को कितना मिस करते हॉंगयन.

फिर एक रात वो हुआ जिसने हम दोनो बाप बेटी की ज़िंदगी बदल दी.

जुलाइ की रात थी. भोथ शेडेड गर्मी के बाद भोत तेज़ बेरिश हो रही थी. बदल भोत ज़ोर ज़ोर से गरज रहे थे. मैं अपने कमरे मैं सहमी हुई सोने की कोशिश कर रही थी, मगर दर के मारे नींद नही आ रही थी. अचानक जो एक दफ़ा बदल भोत ज़ोर से गर्जे टॉ मेरी चीख निकल गई और मैं बेड से उठ कर पापा के बेडरूम की तरफ भागी.

जल्दी से मैं ने पापा के बेडरूम का दरवाज़ा खोला और पापा के बेड के बिल्कुल सामने जा खरी हुई. सूब कुछ इतना जल्दी मैं हुआ के मैं बेडरूम का दरवाज़ा खोलते हुआी यह भी ना देख सकी के मेरे पियरे पापा उस वक़्त अपने बेड पेर बिल्कुल नंगे हो कर अपने टाने हुआी सख़्त लंड को अपनी मूती मैं पाकरे, मूती को लंड पेर ऊपेर नीचे कर रहे थे. मैं ने ज़िंदगी मैं पहली बार लंड को इतना बरा (बिग) देखा था. पापा को भी मोक़ा ना मिल सका के हू अपने जिस्म पेर शीट डाल लेते. उनका मुँह खुला का खुला रह गया.

मेरे भी मुँह से सिवाए इसके और कुत्छ ना निकल सका “सॉरी पापा, मैं दर गैट ही, इस लिये जिलदी मैं डोर पेर नॉक नही कर सकी”.

पापा ने इतनी देर मैं अपने ऊपेर शीट डाल ली और घबरा कर उठ कर बेड पेर बैठ गाए, और बोले: “सॉरी बेटा के तुम ने मुझे इस हालत मैं देख लिया. आ जाओ और यहाँ मेरे पास बैठ जाओ. जुब बेरिश रुक जाए टॉ चली जाना अपने बेडरूम मैं”.

“मगर पापा ….. आप डिस्टर्ब होंगे. आप कुत्छ कर रहे थे अभी?”

लेकिन पापा ने जवाब देने की बजाए मुझे हाथ पाकर कर अपने साथ बेड पेर बिता लिया.

“पापा आप ने कुछ नही पहना … मुझे शरम आती है.” यह कहते हुआी मुझहार खुद अपने बारे मैं एहसास हुआ के मैं ने भी गर्मी की वजह से सिर्फ़ एक थिन सी, सी-थ्रू क़िसम की टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी हुई थी. ब्रा भी नही पहनी थी, इस लिये मेरा जिस्म भी बिल्कुल रिवील हो रहा था. टी-शर्ट भागते हुआी ऊपेर हो गई ही, जिस की वजह से मेरा पायट और मेरे टिट्स सॉफ नज़र आ रहे थे.

एक तरफ पापा को मैं नंगा अपना लंड पाकरे देख चुकी थी, और अब वो शीट डाले बैठे थे के पीछे से उनकी कमर नीचे टुक नंगी थी. और दूसरी तरफ मैं भी सेमी-नेकेड उनके ब्राबार बैठी हुई थी. मेरी साँस फूल रही थी.

मुझे उस रात पापा के ब्राबार बैठ कर पहली दफ़ा एहसास हुआ के मेरा जिस्म भोत सेक्सी है. मेरे बूब्स मेरी 13 साल की आगे के मुक़ाबले मैं ज़ियादा बिग और रौंद हैं और सामने को निकले हुआी हैं. मेरे हिप्स भोत रौंद, हार्ड और बल्जिंग हैं. मेरा जिस्म भरा भर लगता है.

अचानक बेरिश का शोर और ज़ियादा हो गया और साथ ही बदल एक बार फिर भोत ज़ोर से गर्जे के मैं दर के मारे एक दम पापा से चिमत गई. इस तरह चिमटने से पापा की शीट हूट गई, और पापा फिर से नंगे हो गाए. मैं कोई 10 सेकेंड उन्ही चिमती रही, टब मुझे पता चला के मैं अपने पापा के नंगे जिसम से लिपटी हुई हून.

मैं ने घबरा कर पापा से अलग हो ने की कोशिश की टॉ पापा ने मेरी कमर मैं अपना हाथ डाल कर मुझे मज़बूती से अपने नंगे जिसम के साथ जकर लिया.

“जानू ऐसे ही बैठी रहो”

मैं कुत्छ ना जवाब दे सकी. मैं पापा के लेफ्ट साइड से लिपटी हुई थी. मेरा सर पापा के सीने पेर था. शीट हूट जेनी की वजह से पापा का खरा हुआ लंड मेरे फेस से एक फीट के फ़ासले पेर था. पापा ने एक बार फिर अपने लंड को रिघ्त हॅंड की मूती मे जकर लिया और हाथ को लंड पेर आहिस्ता आहिस्ता ऊपेर नीचे करने लगे.

“पापा यह आप काइया कर रहें हैं?”

“आज तुम्हारी मम्मी की बोहत याद आ रही हे” पापा ने जवाब दिया.

“ची पापा, जुब मम्मी की याद आती हे तो आप ऐसे करते हैं?”

“बेटा, वो तुम्हारी मया थी, लेकिन मेरी बीवी थी, और मीयन बीवी का रिश्ता और तरह का होता हे”.

“मैं समझी नही पापा!”

“बेटी काइया तुम्हे नही पता मीयन बीवी का काइया जिन्सी रिश्ता होता हे?” पापा ने पूछा

“नही पापा, आप बताएँ”

“अब मैं कैसे तुम्हें बताऊं के मीयन बीवी मैं सेक्स का रिश्ता होता. और इसी रिश्ते की वजह से तुम पायदा हुईं और आज तुम मेरे साथ इस तरह बैठी हो”

“हू कैसे पापा?” मेरी समझ मैं अब भी नहीं आ रहा था.

“शादी के बाद मीयन अपनी बीवी के साथ सेक्स करता हे, यानी अपनी बीवी तो इस लंड से उसकी चूत को चोद्ता हे. चोदते हुआी जुब लंड से मनी चूत मैं निकलती हे टॉ फिर 9 मंत बाद बाकचा पैदा होता हे”.

लंड और चूत का नाम टॉ मैं ने कहीं सुन रखा था, मगर “चोद्ता” मैं ने पहली बार सुना था.

“पापा यह “चॉड्टा” काइया होता हे?”

पापा की साँस आहिस्ता आहिस्ता फूल रही थी. शिवरिंग सी आवाज़ मैं वो बोले.

“अब इस से आगे मैं जो तुम्हाइन बताऊँगा टॉ उसके लिये तुम्हाइन भी मेरी तरह काप्राय उतार कर नंगी होना परे गा. काइया तुम तय्यार हो.”

मैं पापा की बात सुन कर बुरी तरह शर्मा गई और उनकी ग्रिफ़्ट से निकालने की कोशिश करने लगी.

लेकिन पापा ने ज़बरदस्ती मेरी शॉर्ट्स और टी-शर्ट उतार दी और हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे होगएय.

अब पापा ने मेरा रिघ्त हॅंड पाकर कर अपना लंड मेरे हाथ मैं पकरा दिया, और साथ ही मेरी चिकनी और हेरलेस चूत पेर उंगली फेरते हुआी बोले.

“यह तुम ने मेरा लंड पकरा हुआ हे और मैं टुमरी चूत पेर उंगली फेर रहा हून. तुम्हे प्यार करते हुआी अगर मैं अपने इस लंड को अपनी बेटी की चूत मैं डाल कर अपने लंड को तुम्हारी चूत मैं अंदर बाहर करूँ गा टॉ इसका मतलूब होगा के मैं तुम्हाइन छोड़ रहा हून, या तुम मुझ से छुड़वा रही हो, और या मैं तुम्हे छोड़ता हून”

मेरी चूत पेर पापा की उंगली लगते ही मेरी चूत मैं करेंट सा दौर गया. पापा ने जुब मेरी चूत के दाने को उंगली से चेरा टॉ मैं ने बुरी तरह से मचल कर पापा के हाथ को अपनी राणो के दरमियाँ भींच लिया. इस के साथ ही मैं ने पापा के लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी. पापा का लंड मेरी मूती मैं किसी ज़िंदा मखलूक़ की तरह मचल रहा था. मुझे अब एहसास हो रहा था के सेक्स काइया होता हे.

“पापा लंड मेरी चूत मैं डाल कर मुझे छोड़ के दिखाएँ” मैं ने पापा से कहा.

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“जानू तुम अभी कुँवारी हो, और मेरी सग़ी बेटी हो. पहली बात टॉ हुमैन ऐसा नहीं करना चाहिये. लेकिन एक साल से मेरा लंड किसी चूत को छोड़ने के लिये तारप रहा हे. बाहर जा कर मैं रंडी को नही छोड़ना चाहता. अगर तुम्हारी मर्ज़ी हो टॉ फिर मैं अपनी बेटी को छोड़ कर दिखा सकता हून”

“पापा मैं अभी सिर्फ़ 13 साल की हून, लेकिन अभी अभी आप के मेरी चूत को हाट लगाने से जो मेरी हालत हो रही हे, टॉ मैं आप की हालत भी समझ सकती हून .. … पापा छोड़ के दिखाएँ मुझे, ता के मुझे भी पता चले के आप मेरी मम्मी को कैसे छोड़ते थे … और पापा मेरी शकल सूरत भी चूँके मम्मी से बोहत मिलती हे, इस लिये आप को छोड़ते हुआी लगे गा के आप अपनी बीवी को छोड़ रहें हैं…”

“उफ़ जानू … मेरी प्यारी बेटी … तूने टॉ मेरी मुश्किल आसान करदी …”, यह कहते हुआी पापा ने एक दूं से उठा कर मुझे अपनी गौड़ मैं बिता लिया. पापा का लंड मेरी राणो के बीच मैं से बाहर को निकल कर मेरे पायट से टच कर रहा था. पापा के लंड के मुँह से चिकना चिकना लेसडार पानी निकल कर मेरे पायट पेर लग रहा तट.

पापा ने मुझे अपने से चिंता कर खूब मेरे मुँह पेर, मेरे होंतों पेर प्यार करना श्रु काइया. मेरी दोनो छातियाँ पापा ने अपने हाथों मे पाकर कर मसलनी श्रु कर्दीन.

मेरे पूरे जिस्म मे जैसे आग सी लग गई. मैं भी बे-इकतियार हो कर अपने पापा को उसी तरह चूमने चाटने लगी. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रहीं थी. मेरा पूरा जिस्म शिद्दत-ए-जज़्बात से काँप रहा था. पापा ने प्यार करते करते मुझे बेड पेर लिटा दिया और खुद अपना लंड हाथ मैं ले कर मेरे मुँह के ऊपेर आ गाए, और लंड की टोपी को मेरे होंतों से लगते हुआी बोले: “शहला, मेरी प्यारी सी बेटी, अपने पापा का लंड चूसो मुँह मैं ले कर. पापा के लंड से मनी निकालने वाली है, फिर इसके बाद मैं अपनी बेटी को छोड़ूं गा”.

“पापा यह मनी काइया होती हे?”

“अभी जुब तुम्हारे मुँह मैं निकले गी टॉ देख लेना. यह वाइट क्रीम या मलाई की तरह होती हे, और बोहत गरम और मज़ेदार होती हे. लो अब चूसो पापा का लंड.”

मैं ने मुँह पूरा खोल दिया, और पापा ने अपना हड्डी की तरह सख़्त लंड मेरे मुँह मैं डाल दिया. मैं लंड मुँह मैं ले कर लंड को अपने लिप्स से दबा लिया, और पापा होले होले मेरे मुँह को छोड़ने लगे.

“उफ़ शहला …. जानू …. मज़ा आरहा है …. छोड़ रहा हून अपनी बेटी शहला के मुँह को. उफ़ … …. निकालने वाली हे पापा के लंड से मनी….”

और इसके बाद छूँड हे लम्हे मैं पापा के लंड से एक तेज़ पिट्‍चकारी मेरी मुँह के अंदर निकली, और उसके बाद टॉ जैसे पिट्‍चकारीओं की लाइन लग गई. मेरा मुँह पापा की गरम गरम मनी से भर गया. पापा की मनी मुँह से बाहर ना निकल जाई, इस ख़याल से मैं काफ़ी मनी पी गई.

पापा घहरी घहरी साँसाइन ले रहे थे और उनका लॉरा मेरे मुँह मैं ढीला परता जा रहा था.

पापा ने आख़िर अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकल लिया. मुझे पापा का लंड देख कर हँसी आ गई के वो अब बिकुल सूकर कर लुल्ली बुन गया था. हंस ने की वजह से पापा की बाक़ी मनी मेरे मुँह से बाहर निकल कर मेरी छातियों पेर बहने लगी.

गारही गारही, सुफैइड क्रीम जैसी लेसडार मनी. मनी मैं से एक अजीब सी खट्टी मीठी खुश्बू उठ रही थी (जैसे आता गूंधने के बाद आती हे).

“देखी अपने पापा की मनी? ऐसी होती हे मनी. यह मनी जुब लर्की या औरत की चूत के अंदर निकलती हे तू उस से औरत के पायट मैं बाकचा तहर जाता है.”

मैं इतनी ज़ियादा गरम हो चुकी थी के मैं ने पापा की मनी अपनी टिट्स पेर मालनी श्रु करदी.

“बेटी मैं अब तुम्हारी चूत को चाटून गा ता के तुम्हारी नून्न्ी मुन्नी चूत पापा के मोटे सख़्त लंड को अंदर लेने के लिये तय्यार हो जाए.”

आज मैं अपने पियरे पापा से जो कुत्छ भी छुड़वाने के नाम पेर करवाने जा रही थी, यह मेरी ज़िंदगी का सब से अनोखा तजर्बा था. आअज से पहले मैं अपनी चूत को सिर्फ़ पेशाब करने की जगह समझती थी. मुझे आज पहली बार पता चला के चूत मैं ऐसी खारिश भी होती हे जो सिर्फ़ लंड से मिट ती हे. मुझे आज और अभी पता चला के चूत को चाट तय भी हैं.

पापा अब खुद सीधे हो कर लाइट गाए और मुझे अपने ऊपेर आने को कहा. मैं पापा के ऊपेर इस तरह लेती के मेरी चूत पापा के मुँह पेर थी और पापा का दोबारा से खरा होता हुआ लंड मेरे होंतों के आईं सामने था.

पापा ने पीछे से मेरी दोनो राणो को हाथ डाल कर खोलते हुआी मेरी चूत को अपनी ज़बान से चाटना श्रु काइया. पापा की ज़बान मेरी चूत मैं लगने की देर थी के मेरे सारे जिस्म मैं करेंट सा दौरने लगा. ऐसा ही करेंट जैसा बिजली के लिव तार को छूने से होता हे. पापा की ज़बान मेरी चिकनी चिकनी नून्न्ी मुन्नी चूत के पंखों के बीच मैं घूम रही थ्री. कभी पापा मेरी चूत के दाने पेर ज़बान फेरते, और मैं बुरी तरह से मचल जाती. फिर पापा उस जगह ज़बान फेरते जहाँ से मेरी पी निकलती हे. पी की जगा पेर ज़बान लगते ही मुझे अभी ज़ोर से पी आनी हनी लगती के पापा एक दूं मेरी चूत के छोड़ने वाले छेड़ मैं ज़बान डाल कर चाटना श्रु कर देते.

इधर मेरी आँखों के बिल्कुल सामने पापर का पूरी तरह ताना हुआ लंड था. मैं इतने क़रीब से पापा के लंड को पहली दफ़ा देख रही थी और सोच रही थी के यही वो लंड हे जिसने मम्मी को छोड़ा और उसकी वजह से मैं पैदा हुई, और आज खुद अपने बाप के ऊपेर लाइट कर उसके लंड को सामने देख रही हून, हाथ मैं पाकर रही हून और चूस रही हून, और पापा अपनी हे सग़ी बेटी की चूत को चाट और चूस रहाीन हैं.

“पापा मेरी चूत मैं भोत खारिश हो रही हे … उफ़ मार जाऊंगी … पापा भोत खुजली हो रही हे …”

पापा ने जुब यह सुना टॉ मुहज़े अपने ऊपेर से उतार कर बेड पेर चिट लिटा दिया, और मेरी टाँगों के बीच मैं घुटनो के बाल बैठ कर बोले”

“जानू, अब पापा अपनी बेटी के साथ वो करने जा रहाीन हैं जो पापा तुम्हारी मम्मी के साथ करते थे. तय्यार हो तुम, शहला?”

“पापा काइया अब आप छोदान गे मुझे? पापा भोत मोटा और सख़्त लंड हे आप का, और लंबा भी भोत हे. इतना मोटन लंड कैसे मेरी चूत मैं जाएगा, पापा?”

“मैं ने अपनी बेटी की चूत चाट चाट कर इतनी चिकनी कर दी हे अब इस्मे हाथी का लंड भी चला जाएगा. डरो मूत शहला, मैं पहले सिर्फ़ अपने लंड के टोपी चूत मैं डालूँगा. फिर आहिस्ता आहिस्ता छोड़ते हुआी पूरा लंड डालूं गा.”

यह कहते हुआी पापा ने मेरी दोनो तांगे उठा कर अपने कांधों पेर रखीं, और मेरी गोल गोल गांद के नीचे पिल्लो रख दिया, जिस से मेरी गांद और चूत बिल्कु ऊपेर उठ गई. पापा मेरे ओपपेर औन्हे हो गाए और मेरी दोनो टिट्स को पाकारते हुआी कहा: “शहला .. पहली दफ़ा तुम मुझ से छुड़वा रही हो.. अक्चा हे के बेटी अपने बाप का लंड खुद अपने हाथ से पाकर कर अपनी चूत के छेड़ से लगाई.”

मैं और पापा फुल मस्ती मैं थे. मैं ने रिघ्त हॅंड से पापा का ताना हुआ लंड जो मेरे चूसने की वजह से चिकना हो रहा था, पाकर कर उसकी टोपी को अपनी चूत के मुँह से लगाया.

पापा ने होले से अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश काइया, और इसके साथ हे मेरी चूत के छेड़ मैं पापा के लंड की टोपी फँस गई.

“मज़ा आया शहला?” पापा ने कहा

मेरी नज़रैयण पापा की नज़रों से मिली, और मैं शरम से आंखाईं बूँद करलीन. पापा ने बे इकतियार हो कर, मेरे गालों, मेरे होंतों और मेरी टिट्स को प्यार करना श्रु कर दिया.

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अब जुब के पापा का लंड अपनी बेटी की चूत मैं जा चुका था, टॉ मुझे शरम आ र्है थी के आज मैं अपने ही सगे बाप से छुड़वा रही हून.

“जानू, और लंड डालूं अंदर?”

मैं ने शरम से कुत्छ ना बोल पाई. पापा ने फिर कहा: “जानू, शर्मा क्यूँ रही हो अपने पापा से. अब टॉ पापा का लंड जा चुका हे तुम्हारी चिकनी चूत मैं. बोलो और डालूं अंदर; जानू मैं पूरी तरह लंड तुम्हारी चूत मैं डाल कर छोड़ना चाहता हूँ. वही सही चुदाई होती हे”.

मैं फिर भी कुत्छ ना बोली और सिर्फ़ मेरे मुँह से आहिस्ता से “हून” निकल सका.

पापा जैसे हे मेरी “हून” सुनी, और उन्हों ने एक हे झटके से अपना पूरा स्कहत और लंबा लंड मेरी चूत मैं डाल दिया. मेरी चूत चिकना चिकना पानी चोर रही थी, मगर फिर भी पहली दफ़ा तकलीफ़ की वजह से मेरी चीख निकल गई.

“मार गई पापा. दर्द हो रहा मेरी चूत मैं भोत ज़ोर का. मेरी चूत फॅट गई पापा. उफ़ …. मार गई …”

पापा ने मेरी टांगायन अपने कांधो से उतार कर मेरे जिस्म को अपने जिस्म से चिंता लिया. मेरी टांगायन खुली हुई तीन और डर्मायाण मैं पापा का लंड पूरा का पूरा मेरी छोटी सी चूत मैं घुसा हुआ था. मेरी चीख सुन कर पापा ने मुझे प्यार करते हुआी कहा: “जानू, पहली पहली बार दर्द होता है, 2 मिनिट मैं यह दर्द ख़तम हो जाए गा, और फिर मज़ा आने लगे गा. वैसे भी तुम्हारी चूत इस क़दर टाइट हे के रब्बर बंद की तरह मेरे लंड को जाकरा हुआ हे”.

हम डॉन बाप बेटी कुत्छ देर तक उन्ही लिपटे रहे. इस डॉरॅन पापा मुझे किस करते रहे. मेरी आँखों मैं तालकीफ़ की वजह से आँसू आ गाए थे. पापा के प्यार करने से मैं ठीक होने लगी और मैं ने भी पापा के होंतों पेर प्यार करना श्रु काइया. किस करते हुआी पापा ने अपनी ज़बान मेरे मुँह मैं डाल दी, और मैं पापा की ज़बान को चूसने लगी. पापा की ज़बान से मुझे अपनी चूत का टेस्ट आ रहा था. मैं भोत ज़ियाड गरम हो गई. शहवात से मेरा बुरा हाल होने लगा. पापा ने फिर मेरे बूब्स को चूसना श्रु काइया, और मैं बुरी तरह मचलने लगी.

दर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और उसकी जगा वाक़ई अब मुझे इतना मज़ा आ रहा था के मैं बता नहीं सकती. मैं सोच रही थी के मम्मी भी इसी तरह पापा से चुड़वाते हुआी मज़ा लेती होंगी.

जुब मज़ा मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, और पापा उन्ही मेरे ऊपेर परे हुआी थे, टॉ मुझ से रहा ना गया: “पापा, कुत्छ कराईं ना …. मेरी चूत मैं आग लगी हुई हे ….”

इस के साथ ही मैं ने नीचे से पापा को ऊपेर की तरफ पुश काइया. पापा अपनी बेटी का इशारा साँझ गये.

“चलो अब अपनी जानू को गौड़ मैं ले कर छोड़ूं गा”

यह कहते हुआी पापा ने मुझे अपनी गौड़ मैं भर लिया; इस तरह के मेरी दोनो टांगायन उन्हो ने अपनी कमर (वेस्ट) के गिर्द लपट लीं, और मेरे दोनो बाज़ू अपनी नेक के गिर्द लपट लिये, और इस तरह मेरी गांद को नीचे से पाकारते हुआी वो बेड से उतार कर मुझे गौड़ मैं ले कर फर्श पेर खरे हो गये. पापा का लंड उसी तरह से पूरा मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.

इसी तरह उठाए हुआी पापा मुझे ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिर्रों के सामने ले गये.

“जानू, देखो मिर्रों मैं. कैसे लग रहे हैं हम दोनो बाप बेटी?”

मैं मिरर मैं देख कर बुरी तरह शर्मा गयी.

“पापा … आप बारे वो हैं …”

पापा मिरर के सामने इस तरह खरे थे के मेरी बॅक साइड मिरर की तरफ थी. मैं ने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा. हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे थे. मैं पापा की गौड़ मैं बंदर्या की तरह चींटी हुई थी. पापा ने अपने दोनो हाथों से मेरी गांद को थमा हुआ था. पापा की उंगलियाँ मुझे अपनी गांद के गोश्त के अंदर घुसती हुई दिखाई दे रही तीन. मेरी गांद का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था. और उसके नीच पापा का मोटा सख़्त लंड जर तक मेरी चूत मैं फँसा हुआ था. मेरी चूत के छेड़ ने पापा के लंड को रब्बर बंद की तरह ग्रिप काइया हुआ था.

“कैसी बुरी लग रही हून मैं पापा …. ”

“नही जानू, तुम भोत हसीन लग रही हो. बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लर्की मज़े ले कर चुड़वाते हुआी लगती है…. इतना हसीन जिसम हे मेरी बेटी का …. बिल्कुल ब्लू बंद मार्जरिन की तरह .. देखो मिर्रों मैं, कैसे पापा ने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांद को पकरा हुआ हे … और मेरा लंड कैसा लग रहा अपनी जानू बेटी की टाइट चूत मैं ….”

पापा ने यह कहते हुआी मेरी गांद को ऊपेर उठाया, यहाँ तक के उनका लंड खींचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.

“भोथ टाइट चूत हे मेरी बेटी की. उफ़ मज़ा आ गया जानू …. इस तरह टॉ 3 या 4 धक्कों मैं हे मेरी मनी निकल जाई गी”

यह कहते हुआी पापा ने मेरी गांद को नीचे करते हुआी अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश काइया. फिर बाहर निकाला, फिर काइया. और फिर बाघैर रुके तीज़ी से वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा पूरी तरह जोश और मस्ती मैं आ गये तट. उनके गले से अजीब अजीब आवाज़ैईन निकल रही तीन. मुझे अब पता चला के चुड रही हून. आइसे छोड़ना कहते हैं. मेरी अपनी हालत घैर हो चुकी थी. मेरे मुँह से भी है है की और बिल्ली की तरह घुर्रने की आवाज़ निकल रही थी.

“छोड़ रहा हून अपनी जानू को …. लंड जा रहा तेरी चूत मैं जानू … चुड मेरे लंड से …. चुड अपने पापा के लौरे से …. मज़ा आर रहा से …. टाइट चूत है मेरी बेटी की …. ”

“पापा छोदान अपनी बेटी को …. छोदान मुझे ….. फार डैन मेरी चूत को ….. उफ़ मरगई पापा … बोहत सख़्त लंड हे आप का …… उफ़ लंड पायट मैं चला गया मेरे ….. पापा फॅट गई मेरी चूत …. छोदान ….. छोदान ….. उफ़ चुड गई मैं मम्मी. ओ’ मम्मी पापा ने छोड़ दिया मुझे …… पापा ज़ोर से छोदान …. और ज़ोर से छोदान ….. धक्के लगायन ज़ोर ज़ोर से …… मज़ा आ रहा है …”

अब मेरा जिस्म अकारना श्रु हो रहा था. मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था. मेरी चूत के सारे मुस्छले अकारने लगे थे. और चूत के अंदर पापा का लंड फूलने और पिट्‍चकने लगा था.

“उफ़ जानू मेरी मनी निकल रही तेरी चूत मैं.” इस के साथ हे पापा का जिस्म बुरी तरह मुझे गौड़ मैं लिये झटके मरने लगा. मेरी गांद को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया, और नीचे से अपने पूरी तरह मेरी चूत मैं फँसा दिया.

पापा की गरम गरम मनी की पिट्‍चकारियाँ मुझे अपनी चूत की गहराइयों मैं जाती हुई सॉफ महसूस हो रही थी. इस के साथ हे मैं भी ख़तम हो रही थी और मेरी चूत ने पानी चोरना श्रु कर दिया था.

हम दोनो बाप बेटी का जिसम अब ढीला परता जा रहा था. पसीने मैं हम दोनो नहा चुके थे. मेरी चूत मैं बिल्कुल ठंड पेर गई थी. पापा का लंड भी ढीला पर्णाए लगा था. मगर अभी तक मेरी चूत मैं ही.

पापा इसी तरह मुझे गौड़ मैं लिये लिये, सोफे पेर बैठ गये, और मैं अपने पापा के सीने के साथ उन्ही चिपकी रही. मेरी पसीने मैं भीगी हुई छातियाँ पापा के बलों भारी सीने से चींटी हुई तीन.

पापा का लंड आख़िर नरम हो कर मेरी चूत से बाहर निकल आया, और इसके साथ ही मेरी चूत से पापा की मनी बह बह कर बाहर आने लगी.

सोफा खराब ना हो जाए, इस ख़याल से मैं ने नीचे अपनी चूत पेर हाथ रख दिया, और पापा की मनी अपने हातों मैं ले ले कर अपने पैर ओर बूब्स पेर मलने लगी.



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